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अमेरिका-वेनेजुएला जंग से कच्चा तेल होगा महंगा? भारत के तेल आयात पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा

Published: Sat, 03 Jan 2026 07:10 PM (IST)

अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतों पर असर की चिंता है। वेनेजुएला के पास ...और पढ़ें

अमेरिका-वेनेजुएला जंग से कच्चा तेल होगा महंगा? भारत के तेल आयात पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा

अमेरिका-वेनेजुएला जंग से कच्चा तेल होगा महंगा? भारत के तेल आयात पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा

HighLights

  1. अमेरिका-वेनेजुएला तनाव से कच्चे तेल की कीमतों पर चिंता।

  2. अमेरिकी प्रतिबंधों से वेनेजुएला का तेल निर्यात प्रभावित।

  3. भारत का वेनेजुएला से तेल आयात 2023-24 में बढ़ा।

नई दिल्ली।कच्चे तेल की कीमतें चर्चा में हैं क्योंकि अमेरिका वेनेजुएला पर हमले (america venezuela conflict) कर रहा है। तेल की कीमतें थोड़ी कम हुई हैं और $60/बैरल के आसपास बनी हुई हैं। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा साबित तेल भंडार है। इससे इस बात की चिंता बढ़ गई है कि इस हमले का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है।

फिलहाल ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतें कम हैं क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वेनेजुएला का तेल निर्यात कम रहा है। इसके अलावा, शनिवार की लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, वेनेजुएला की मुख्य फैसिलिटी में तेल की रिफाइनिंग सामान्य थी।

वहीं, रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार वेनेजुएला का सरकारी तेल उत्पादन और रिफाइनिंग शनिवार को सामान्य रूप से चल रहा था और देश के राष्ट्रपति को हटाने के लिए अमेरिकी हमले से उसे कोई नुकसान नहीं हुआ, एनर्जी कंपनी PDVSA के ऑपरेशंस की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने बताया।

अमेरिकी राष्ट्रपति का बड़ा दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया है। ड्रग तस्करी और सत्ता में अवैधता के आरोपों को लेकर महीनों तक उन पर दबाव बनाने के बाद यह कार्रवाई की गई।

एक सूत्र ने बताया कि कराकस के पास ला गुआरा बंदरगाह, जो देश के सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक है, लेकिन जिसका इस्तेमाल तेल एक्सपोर्ट के लिए नहीं किया जाता, उसे भारी नुकसान हुआ है।

दिसंबर में, ट्रंप ने देश में आने या जाने वाले तेल टैंकरों पर नाकाबंदी की घोषणा की, और अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल के दो कार्गो जब्त कर लिए। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी उपायों के कारण कई जहाज़ मालिकों ने वेनेजुएला के पानी से अपने जहाज़ों का रास्ता बदल दिया, जिससे PDVSA के कच्चे तेल और ईंधन का स्टॉक तेज़ी से बढ़ गया है। PDVSA को बंदरगाहों पर डिलीवरी धीमी करनी पड़ी और कच्चे तेल के उत्पादन या रिफाइनिंग में कटौती से बचने के लिए टैंकरों में तेल स्टोर करना पड़ा।

मॉनिटरिंग डेटा और अंदरूनी दस्तावेजों के अनुसार, इससे पिछले महीने OPEC देश का एक्सपोर्ट नवंबर में भेजे गए 950,000 बैरल प्रति दिन (bpd) का लगभग आधा रह गया।

अमेरिका के इन कदमों से कई जहाज मालिकों ने वेनेजुएला के पानी से अपने जहाजों को मोड़ लिया, जिससे PDVSA के कच्चे तेल और ईंधन का स्टॉक तेजी से बढ़ गया है।

वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले से हिंदुस्तान को कितना नुकसान?

चीन वेनेजुएला के तेल का सबसे बड़ा आयातक है, हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों को भारतीय नजरिए से भी देखने की जरूरत है। पिछले एक साल में भारत का तेल आयात तेज़ी से बढ़ा है।

वेनेजुएला के साथ भारत के व्यापार संबंध ज्यादातर तेल आयात पर निर्भर हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण 2021 और 2022 में वेनेजुएला से भारत का तेल आयात न के बराबर हो गया था। वित्त वर्ष 2021-22 और वित्त वर्ष 2022-23 में वेनेजुएला से भारत का कुल आयात क्रमशः $89 मिलियन और $250 मिलियन तक गिर गया था।

हालांकि, 2023-24 तक भारत-वेनेजुएला तेल व्यापार फिर से पटरी पर आ गया, जिसमें पेट्रोलियम आयात बढ़कर लगभग $1 बिलियन हो गया। दिसंबर 2023 में, भारत कुछ समय के लिए वेनेजुएला के तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था।

वेनेजुएला में अमेरिका के तुरंत मिलिट्री एक्शन का मौजूदा ओवरसप्लाई वाले मार्केट की वजह से ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों पर कम समय के लिए सीमित असर पड़ने की उम्मीद है, लेकिन लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष या बढ़े हुए प्रतिबंधों से कीमतों में काफी बढ़ोतरी हो सकती है। भारत कच्चे तेल के इंपोर्ट पर निर्भर है। ऐसे में ग्लोबल कीमतों में बढ़ोतरी से इंपोर्ट की लागत और घरेलू महंगाई बढ़ सकती है।