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    वेनेजुएला के पीछे हाथ धोकर क्यों पड़े हैं ट्रंप, कैसे सऊदी अरब को टक्कर देने वाले देश को अमेरिका ने किया बेबस?

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 02:07 PM (IST)

    अमेरिकी वायुसेना के हमलों के बाद वेनेजुएला (Venezuela crisis) के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो की गिरफ्तारी ने ध्यान खींचा है। लेख बताता है कि अमेरिका वेनेज ...और पढ़ें

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    वेनेजुएला का तेल अभिशाप: अमेरिका क्यों पड़ा पीछे, कैसे दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार बना मुसीबत?

    नई दिल्ली। अमेरिकी वायुसेना के हमलों के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो (Nicolas Maduro arrest) की गिरफ्तारी ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ट्रंप इस देश के पीछे इतनी आक्रामकता से क्यों पड़े हैं?

    वजह साफ है कि ये सिर्फ राजनीतिक कारण ही नहीं, बल्कि वेनेजुएला की बेशकीमती प्राकृतिक संपदा भी है। वेनेजुएला में दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। आइए समझें कि कैसे तेल की संपदा और अन्य वो चीजें जो वेनेजुएला के लिए अभिशाप बन गई है।

    वेनेजुएला की रैंकिंग भंडार में नंबर-1, उत्पादन में क्यों पिछड़ा

    वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े सिद्ध कच्चे तेल भंडार हैं। वेनेजुएला के पास 303 अरब बैरल क्रूड ऑयल का भंडार है, जो कि सऊदी अरब (267 अरब) और कनाडा (169 अरब) से भी ज्यादा है। यानी भंडार के मामले में सऊदी अरब, कनाडा को टक्कर देने वाले देश आज बेबस और लाचार है। वेनेजुएला भले भंडार के मामले में सबसे आगे हो लेकिन उत्पादन में यह 11वें स्थान पर है, जो मात्र 0.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। रिफाइनरी थ्रूपुट में 16वें और निर्यात में भी पिछड़ा हुआ है। यह 2023-24 के आंकड़े पर आधारित है।

    क्या रही वजह

    अमेरिकी प्रतिबंधों, कुप्रबंधन और निवेश की कमी ने इसकी क्षमता को बर्बाद कर दिया है। ह्यूगो शावेज और मदुरो शासन के दौरान सरकारी नियंत्रण ने निजी निवेश को रोक दिया, जिससे उत्पादन 2013 के 2.5 मिलियन बैरल से घटकर आज के स्तर पर आ गया।

    सोना और दुर्लभ खनिज

    तेल के अलावा वेनेज़ुएला में सोना, बॉक्साइट, निकल और दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार हैं। ये संसाधन आधुनिक उद्योग, रक्षा और तकनीक के लिए बेहद अहम माने जाते हैं और यही इन्हें भू-राजनीतिक रूप से मूल्यवान बनाता है।

    प्राकृतिक गैस का विशाल भंडार

    देश के पास प्राकृतिक गैस के भी बड़े संसाधन हैं, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज़ से महत्वपूर्ण हैं। अमेरिका लंबे समय से गैस बाज़ार में अपनी पकड़ मज़बूत करना चाहता है।

    क्यों पिछड़ता गया वेनेजुएला

    जीडीपी प्रति व्यक्ति में भारी गिरावट

    वेनेजुएला की जीडीपी प्रति व्यक्ति (पीपीपी आधार पर) के 1980 से 2026 तक डेटा पर नजर डालें तो पता चलता है कि 2013 में यह चरम पर थी, जो 20,000 डॉलर के करीब रही। लेकिन उसके बाद तेज गिरावट आई, और 2026 तक यह 5,000 डॉलर से नीचे पहुंच गई है। जो कि भारी-भरकम यह 86% की गिरावट है। इसके पीछे का कारण तेल पर अत्यधिक निर्भरता है जिसकी वजह से जब तेल की कीमतें गिरीं तो अर्थव्यवस्था डगमगा गई। इसके अलावा, 2017 से अमेरिकी प्रतिबंधों ने निर्यात को आधा कर दिया, जिससे मुद्रास्फीति और गरीबी बढ़ी। जिससे आर्थिक संकट ने राजनीतिक अस्थिरता को जन्म दिया, जिससे विपक्षी ताकतें मजबूत हुईं।

    कैसे सरकारी कर्ज का बोझ ओपेक देशों में सबसे ज्यादा हुआ?

    ओपेक सदस्य देशों में सकल सरकारी कर्ज को जीडीपी के प्रतिशत के रूप में देखें तो वेनेजुएला का कर्ज 200% से ऊपर पहुंच गया, जबकि सऊदी अरब (25%), इराक (50%) और अन्य देशों का काफी कम है। 1990 से 2025 तक का ग्राफ दर्शाता है कि शावेज युग में कर्ज बढ़ना शुरू हुआ, लेकिन मदुरो के समय में यह चरम पर पहुंचा। अमेरिकी प्रतिबंधों ने कर्ज चुकाने की क्षमता को कमजोर किया, जिससे डिफॉल्ट की स्थिति बनी। विश्लेषकों का मानना है कि यह "रिसोर्स कर्स" का क्लासिक उदाहरण है, जहां प्राकृतिक संसाधन मजबूत संस्थानों की कमी में अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं।

    निर्यात में गिरावट - तेल पर निर्भरता का खामियाजा

    वेनेजुएला के निर्यात में 1994 से 2024 तक, निर्यात मुख्य रूप से तेल पर आधारित रहा, लेकिन 2010 के बाद तेज गिरावट आई। अन्य कमोडिटी जैसे मिनरल्स का हिस्सा नगण्य रहा। विविधीकरण की कमी ने देश को संकट में डाला। जब वैश्विक तेल कीमतें गिरीं और प्रतिबंध लगे, तो निर्यात 5 अरब डॉलर से नीचे आ गया। मदुरो की गिरफ्तारी के बाद, विशेषज्ञों का कहना है कि नई सरकार को अर्थव्यवस्था को विविधीकृत करने की जरूरत है, वरना "रिसोर्स कर्स" जारी रहेगा।

    वैश्विक तेल निर्यात में हिस्सेदारी का पतन

    चुनिंदा ओपेक देशों की वैश्विक कच्चे तेल निर्यात में हिस्सेदारी की बात करें तो 1994 में वेनेजुएला का हिस्सा 3% से ज्यादा था, लेकिन 2024 तक यह लगभग शून्य हो गया। वहीं सऊदी अरब 10% से ऊपर स्थिर रहा। इसके पीछे की वजह अमेरिकी प्रतिबंध, ब्लॉकेड और निवेश की कमी रही। यानी संसाधन होने से समृद्धि नहीं मिलती; अच्छी शासन व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंध जरूरी हैं।

    लोग इस घटना पर क्या बोल रहे?

    मदुरो की गिरफ्तारी के बाद, सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ यूजर्स इसे अमेरिकी साम्राज्यवाद का उदाहरण बता रहे हैं, तो कुछ कुप्रबंधन को दोषी ठहरा रहे। एक यूजर ने लिखा, "वेनेजुएला में पहले से लोकतंत्र है, अमेरिका किस बहाने हमला कर रहा है?" जबकि दूसरे ने कहा, "संसाधन अकेले समृद्धि नहीं लाते, संस्थाएं जरूरी हैं।"

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