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    पोस्टर बॉय से बैड बॉय तक, कॉमर्स ग्रेजुएट ने खड़ी की IT कंपनी 'सत्यम', फिर कैसे बर्बाद हुए रामलिंगा राजू

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 06:15 PM (IST)

    रामलिंगा राजू, सत्यम कंप्यूटर्स के फाउंडर रहे, और साल 2009 में 7000 करोड़ के घोटाले के सामने आने के बाद गुमनामी का शिकार हो गए। सत्यम कंप्यूटर्स, उस स ...और पढ़ें

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    नई दिल्ली। रामलिंगा राजू (Ramalinga Raju), ये नाम आपने जरूर सुना होगा। कभी भारत के आईटी सेक्टर में इस नाम की गूंज थी लेकिन अब यह शख्स गुमनाम है। साल 2009 में सत्यम घोटाले (Satyam Scam) के सामने आने के बाद रामलिंगा राजू, अचानक से सुर्खियों में आकर बदनाम हुए। दरअसल, सत्यम कंप्यूटर्स, उस समय इंफोसिस, विप्रो और टीसीएस जैसी नामी आईटी कंपनियों में से एक थी, और रामलिंगा राजू इस कंपनी के फाउंडर थे। साल 2009 में कंपनी में बड़े पैमाने पर उन्होंने अकाउंटिंग फ्रॉड की बात कबूली और इसके बाद आईटी सेक्टर की इस दिग्गज कंपनी में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ।

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    इस घटनाक्रम के बाद रामलिंगा राजू, गुमनामी के शिकार हो गए और अब 15 साल बाद अचानक से उनका नाम एक डॉक्यूमेंट्री के चलते सुर्खियों में आया है। दरअसल, दिसंबर 2025 में नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री "Bad Boy Billionaires" का एपिसोड रिलीज हुआ। यह सीरीज बी. रामलिंगा राजू के हाईप्रोफाइल सत्यम स्कैम पर आधारित है। खास बात है कि 5 साल की कानूनी लड़ाई के बाद, नेटफ्लिक्स ने आखिरकार डॉक्यूसीरीज़ बैड बॉय बिलियनेयर्स: इंडिया का आखिरी, लंबे समय से रुका हुआ एपिसोड रिलीज़ किया। 

    क्या था सत्यम कंप्यूटर्स घोटाला?

    साल 2009 में सामने आया सत्यम कंप्यूटर्स घोटाला, भारत के कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा अकाउंटिंग फ्रॉड माना जाता है, और यह आईटी सेक्टर में हुआ एक बड़ा स्कैम था। हैरान करने वाली बात है कि इस घोटाले को अंजाम कंपनी के फाउंडर बी. रामलिंगा राजू ने ही दिया। रामलिंगा राजू ने खुद कबूल किया कि उन्होंने वर्षों से कंपनी के खातों में हेराफेरी की थी।

    सत्यम कंप्यूटर्स घोटाले की राशि करीब 7,000-7,800 करोड़ रुपये (लगभग 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर) थी। कंपनी में इस बड़े फ्रॉड की शुरुआत 2002 से शुरू हुई, और सात साल तक फर्जीवाड़े का यह सिलसिला जारी रहा।

    कॉमर्स की पढ़ाई, कंप्यूटर साइंस में करियर

    रामलिंगा राजू की परवरिश एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुई। उनके पिता सत्यनारायण राजू 1960 के दशक में समृद्ध तटीय आंध्र क्षेत्र से हैदराबाद आने वाले शुरुआती प्रवासियों में से एक थे। उन्होंने गांव में खेती से कमाए पैसों से टेक्सटाइल का बिजनेस शुरू किया। उधर, रामलिंगा राजू ने आंध्रा के लोयोला कॉलेज, विजयवाड़ा से कॉमर्स की पढ़ाई की और एमबीए करने के लिए अमेरिका चले गए।

    यूएस से भारत लौटने के बाद रामलिंगा राजू ने एक उद्यमी के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की। हैरानी की बात है कि देश की चौथी सबसे बड़ी आईटी कंपनी के फाउंडर रहे रामलिंगा राजू ने सबसे पहले कॉटन स्पिनिंग, एक्सपोर्ट और रियल एस्टेट बिज़नेस किया। रामलिंगा राजू को कंप्यूटर साइंस का कोई नॉलेज नहीं था, और बिना किसी अनुभव के बावजूद उन्होंन सॉफ्टवेयर सर्विसेज़ सेक्टर में कदम रखा।

    पिता के नाम पर कंपनी 'सत्यम'

    दिलचस्प बात है कि रामलिंगा राजू के शुरुआती बिज़नेस सफल नहीं हुए जैसा उन्होंने चाहा था। आखिरकार, उन्होंने आईटी इंडस्ट्री में कदम रखा और पिता के नाम पर रखी गई कंपनी सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज़ से सफलता मिली। जहां, सत्यम का मतलब सच है।

    बहनोई की मदद से बढ़ाया बिजनेस

    इस आईटी कंपनी को शुरू करने के लिए रामलिंगा राजू और उनके एक बहनोई, डी.वी.एस. राजू की मदद ली, जिन्होंने ओहियो यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री की थी। दरअसल, जून 1987 में जब रामलिंगा राजू ने कंपनी शुरू की, उस दौरान उन्हें सॉफ्टवेयर सर्विसेज़ आउटसोर्सिंग में काफी संभावनाएं दिखीं। हालांकि राजू ने एक बार कहा था कि उन्होंने सत्यम की को-फाउंडिंग किसी और चीज़ से ज़्यादा एक शौक के तौर पर की थी।

    इसके बाद रामलिंगा राजू ने 20 लोगों की टीम जिसने सिकंदराबाद में एक छोटे से ऑफिस में अपना काम शुरू किया था। शुरुआत में कंपनी दूर-दराज की जगहों पर मौजूद क्लाइंट्स के लिए टेक्नोलॉजी कंसल्टिंग करती थी और सॉफ्टवेयर कोड लिखती थी, जिसे बाद में सॉफ्टवेयर आउटसोर्सिंग के नाम से जाना जाने लगा।

    राजू ने 1990 के दशक के आखिर और 2000 के दशक की शुरुआत में तेज़ी से विस्तार किया, और हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, सिकंदराबाद, पुणे, भुवनेश्वर, अमेरिका, कनाडा, जापान, मलेशिया, चीन और ऑस्ट्रेलिया जैसी जगहों पर और ज़्यादा ऑफिस स्पेस हासिल किया।

    जब CM ने राजू को बनाया पोस्टर बॉय

    रामलिंगा राजू के लिए सबसे यादगार पल वह रहा जब आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 2000 में भारत आए अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के सामने राजू को भारतीय IT का पोस्टर बॉय बनाकर पेश किया। जब उन्होंने हैदराबाद में क्लिंटन के साथ मंच शेयर किया, तो बिज़नेस जगत में उनकी पूछ बढ़ गई, जबकि रतन टाटा जैसे इंडस्ट्री लीडर दर्शकों के बीच बैठे थे।

    गिरफ्तारी और सजा के बाद अब कहां है रामलिंगा राजू?

    सत्यम घोटाले का खुलासा होने के बाद रामलिंगा राजू को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावा, कंपनी के सीएफओ को भी अरेस्ट किया गया। फरवरी 2009 में सीबीआई ने यह केस अपने हाथ में ले लिया। 6 साल तक चली सुनवाई के बाद 9 अप्रैल 2015 को रामलिंगा राजू समेत 7 लोगों को सत्यम कंप्यबूटर्स घोटाले में दोषी पाया गया और 7 साल की सजा सुनाई गई। हालांकि, अपील के बाद उनकी सजा को निलंबित कर दिया गया और बताया जाता है कि रामलिंगा राजू अभी जमानत पर हैं।

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    फैमिली बिजनेस को बढ़ा रहे आगे

    रामलिंगा राजू के करीबी सूत्रों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, "वह आज भी उतने ही बिज़ी हैं जितने अपने सुनहरे दिनों में थे।" वह अब भी हैदराबाद स्थित घर पर अपने परिवार और बिज़नेस से जुड़े लोगों से रेगुलर मिलते रहते हैं। रामलिंगा राजू के परिवार के लोग और उनके बिज़नेस खूब फल-फूल रहे हैं। यह परिवार हैदराबाद के सबसे अमीर परिवारों में से एक है, जिसमें उनके बड़े बेटे और बहू क्रमशः खेती और हेल्थकेयर में सफल बिज़नेस चला रहे हैं।

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