भारतीय वित्तीय बाजार में बड़ी उथल-पुथल की संभावना नहीं, RBI Governor बोले- चौंका देंगे दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ें
विशेषज्ञों के मुताबिक इससे दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में अरबों डालर का निवेश आने का प्लेटफार्म तैयार होगा। ऐसा होने पर भारत को अपने चालू खाते और राजकोषीय घाटे को वित्तपोषित करने में मदद मिलेगी। उन्होने एक कार्यक्रम को संबोधित करते कहा कि अर्थव्यवस्था में विकास की गति मजबूत बनी हुई है और दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ें सभी को चौंका देंगे।
एजेंसियां, नई दिल्ली। आरबीआइ गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि जेपी मार्गन बांड सूचकांक में देश के सरकारी बांडों को शामिल करने से भारतीय वित्तीय बाजार में किसी तरह की बड़ी उथल-पुथल होने की संभावना नहीं है। इसके अलावा उन्होने कहा है कि दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ें सभी को चौंका देंगे।
शक्तिकांत दास ने क्या कहा?
विशेषज्ञों के मुताबिक इससे दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में अरबों डालर का निवेश आने का प्लेटफार्म तैयार होगा। ऐसा होने पर भारत को अपने चालू खाते और राजकोषीय घाटे को वित्तपोषित करने में मदद मिलेगी। समाचार एजेंसी रायटर के मुताबिक दास ने कहा है कि सबसे पहली बात तो यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था और यहां के वित्तीय बाजार में घरेलू और विदेशी लोगों का एक विश्वास है।
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उन्होने कहा कि हम न केवल बड़े पैमाने पर विदेशी पूंजी आने के प्रवाह को संभाल सकते हैं बल्कि बड़े पैमाने पर जब विदेशी पूंजी देश से बाहर जाती है, तो उस स्थिति से भी हम निपट सकते हैं। ऐसे में मुझे नहीं लगता है कि अगर बाहरी कारणों के चलते बाजार गिरता है तो किसी तरह की उथल-पुथल देखने को मिलेगी। दास को लगता है कि आरबीआइ के पास इस तरह की स्थिति से निपटने की क्षमता है।
चौंका देंगे जीडीपी के आंकड़ें
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर आरबीआइ गवर्नर शक्तिकांत दास ने सुनहरी तस्वीर दिखाई है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, उन्होने एक कार्यक्रम को संबोधित करते कहा कि अर्थव्यवस्था में विकास की गति मजबूत बनी हुई है और दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ें सभी को चौंका देंगे। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता वैश्विक विकास के लिए सबसे बड़ा जोखिम है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारत किसी भी संभावित जोखिम भरी स्थिति से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में हैं। बता दें कि तमाम वैश्विक एजेंसियां वैश्विक विकास दर में बढ़ोतरी को जहां कम करके आंक रहे हैं वहीं भारत के संदर्भ में उनका अनुमान उम्मीद से बेहतर दिखाई दे रहा है।
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