पिछले 3 महीनों में बिकी 155 टन से ज्यादा ज्वेलरी, फेस्टिव सीजन में सोने की कम कीमत के चलते बढ़ी मांग
डब्ल्यूजीसी इंडिया के सीईओ सोमासुंदरम पीआर का कहना है कि पिछली तिमाही के दौरान सोने की कीमतों में मामूली नरमी रही है लेकिन अब इसका मूल्य बढ़ने लगा है। उनका कहना है कि धनतेरस पर्व और अगले दो महीने के शादियों के सीजन के दौरान सोने की मांग में इसके मूल्य की काफी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। आइए आंकड़ों के बारे में जान लेते हैं।

पीटीआई, नई दिल्ली। कीमतों में नरमी और त्योहारी सीजन के चलते कैलेंडर वर्ष 2023 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2023) के दौरान देश में सोने की मांग में 10 प्रतिशत की वृद्धि रही है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बीती तिमाही में देश में 210.2 टन सोने की मांग रही है। जुलाई-सितंबर 2022 के दौरान देश में 191.7 टन सोने की मांग रही थी।
डब्ल्यूजीसी की रिपोर्ट में हुआ ये खुलासा
डब्ल्यूजीसी इंडिया के सीईओ सोमासुंदरम पीआर का कहना है कि पिछली तिमाही के दौरान सोने की कीमतों में मामूली नरमी रही है, लेकिन अब इसका मूल्य बढ़ने लगा है। उनका कहना है कि धनतेरस पर्व और अगले दो महीने के शादियों के सीजन के दौरान सोने की मांग में इसके मूल्य की काफी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। धनतेरस को कीमती धातुओं से लेकर बर्तनों और अन्य कीमती सामान खरीदने के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है।
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व्यापारियों का पूर्वानुमान
व्यापारियों से मिली प्रतिक्रिया के अनुसार, उपभोक्ताओं ने 60 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम मूल्य को स्वीकार कर लिया है। ऐसे में इससे कम मूल्य रहने पर सोने की मांग में महत्वपूर्ण उछाल आ सकता है। सोमासुंदरम के अनुसार, बीती तिमाही में ज्वेलरी की मांग सात प्रतिशत बढ़कर 155.7 टन रही है जो पिछले वर्ष समान अवधि में 146.2 टन थी। इसी प्रकार बार (छड़) और सिक्कों की मांग 20 प्रतिशत बढ़कर 54.5 टन रही है जो पिछले वर्ष समान अवधि में 45.4 टन थी।
क्या कहते हैं आंकड़े?
बीती तिमाही में बार और सिक्के में निवेश 2015 के बाद सबसे ज्यादा रहा है। जुलाई-सितंबर 2022 के दौरान सोने का आयात भी बढ़कर 220 टन रहा है, जो पिछले वर्ष समान अवधि में 184.5 टन था। डब्ल्यूजीसी का कहना है कि बीती तिमाही में कम कैरेट (18 और 14 कैरेट) के आभूषण काफी लोकप्रिय रहे हैं और खुदरा विक्रेताओं द्वारा इन उच्च-मार्जिन वाले उत्पादों को बढ़ावा देने से लाभ हुआ है।
सोमासुंदरम का कहना है कि यदि मूल्य में कोई वृद्धि नहीं होती है तो चौथी तिमाही यानी अक्टूबर-दिसंबर 2023 के दौरान भी मांग इसी स्तर पर बनी रहने की उम्मीद है।
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