RBI को महंगाई पर रखना होगा कंट्रोल, सरकार रख सकती है 4% इंफ्लेशन टारगेट, हर पांच साल के लिए मिलता है लक्ष्य
सरकार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के लिए 4 प्रतिशत महंगाई के लक्ष्य को बरकरार रख सकती है। भारत ने इंफ्लेशन टारगेट फ्रेमवर्क को अपनाया और 2016 में आरबीआइ को ...और पढ़ें

नई दिल्ली। केंद्र सरकार आरबीआई के लिए 4 प्रतिशत महंगाई के लक्ष्य को बरकरार रख सकती है। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने यह बात कही है। दरअसल, सरकार ने दो प्रतिशत की घट-बढ़ के साथ महंगाई के लक्ष्य को चार प्रतिशत पर बरकारर रखने का लक्ष्य आरबीआई को दिया है। आरबीआई अपना लक्ष्य प्रत्येक पांच साल में तय करता है और यह समयावधि मार्च में पूरी होनी है।
ऐसे में महंगाई को सहनीय क्षमता यानी चार प्रतिशत के अंदर रखना जरूरी है। पिछले साल सितंबर में रायटर्स ने बताया था कि वह फ्रेमवर्क का समर्थन करने वाले सभी हितधारकों से मिले फीडबैक के बाद मौजूदा महंगाई लक्ष्य को लगातार तीसरी बार बनाए रखने की सिफारिश करेगा।
क्या है इंफ्लेशन टारगेट फ्रेमवर्क?
भारत ने इंफ्लेशन टारगेट फ्रेमवर्क को अपनाया और 2016 में आरबीआइ को औपचारिक रूप से इसका काम सौंपा। 2021 में इसका नवीनीकरण किया गया। पिछले एक दशक में तीन-चौथाई समय महंगाई तय लक्ष्य के अंदर रही और महामारी के समय के दौरान इसमें उतार-चढ़ाव सबसे ज्यादा था। हालांकि, 2022 में ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण लगातार तीन तिमाहियों तक आरबीआइ महंगाई को चार प्रतिशत के अपने लक्ष्य के अनुरूप रखने से चूक गया।
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इसके चलते आरबीआइ गवर्नर से स्पष्टीकरण की मांग की गई थी। बता दें के भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने पिछले वर्ष कहा था कि आरबीआइ को मुद्रास्फीति मापते समय खाद्य पदार्थों को शामिल नहीं करना चाहिए।
उनका मानना था कि खाद्य पदार्थों की कीमतें अक्सर आपूर्ति में होने वाले उन झटकों से प्रभावित होती हैं जो आरबीआइ के नियंत्रण से बाहर होते हैं। हालांकि, आरबीआइ के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस विचार को खारिज कर दिया था।

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