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    आ रहा है ऑटोमेटेड टैक्स फाइलिंग सिस्टम, और आसान होगा टैक्स भरना, कब और पहले किन लोगों को मिलेगी ये खास सुविधा

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 05:13 PM (IST)

    भारत के बड़े टैक्सपेयर्स को आने वाले दिनों में पूरी तरह से ऑटोमेटेड टैक्स फाइलिंग और कंप्लायंस का लाभ मिल सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ...और पढ़ें

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    नई दिल्ली। भारत में जल्द ही ऑटोमेटेड टैक्स फाइलिंग (Fully Automated Tax Filings) की सुविधा शुरू हो सकती है। दरअसल, भारत के बड़े टैक्सपेयर्स - जिनमें कॉर्पोरेट, विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स और मल्टीनेशनल कंपनियाँ शामिल हैं, इन्हें आने वाले दिनों में पूरी तरह से ऑटोमेटेड टैक्स फाइलिंग और कंप्लायंस का लाभ मिल सकता है। क्योंकि, केंद्र सरकार अपने टैक्स पोर्टल्स के एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफ़ेस (API) का एक्सेस थर्ड पार्टियों के लिए खोल रही है।

    मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, सरकार ने गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) सिस्टम के लिए पहले ही API एक्सेस दे दिया है, जबकि सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज और कस्टम्स के तहत डायरेक्ट टैक्स के लिए भी इसी तरह का एक्सेस मिलने की उम्मीद है।

    AI तकनीक का होगा इस्तेमाल

    इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह के एक्सेस से कंसल्टिंग फर्म और टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित टूल्स बना पाएंगे, जिससे टैक्स कंप्लायंस में मैनुअल दखल काफी कम हो जाएगा।

    यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़ी कंपनियां अभी GST, इनकम टैक्स और कस्टम्स में फाइलिंग, नोटिस और मुकदमेबाज़ी को ट्रैक करने के लिए कई सरकारी पोर्टल्स पर निर्भर करती हैं। हालांकि ज़्यादातर रिटर्न अब ऑनलाइन फाइल किए जाते हैं, लेकिन कई तरह के प्रोसेस- जैसे टैक्स अपील को ट्रैक करना के लिए अभी भी अलग-अलग सिस्टम में मैन्युअल जांच की ज़रूरत होती है।

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    इस डेवलपमेंट से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा, "सरकार द्वारा जारी किए गए API टैक्स कंप्लायंस को एक आसान, टेक्नोलॉजी-आधारित फंक्शन में बदलने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये API बड़े टैक्सपेयर्स को अपने इंटरनल अकाउंटिंग और कंप्लायंस सिस्टम को सीधे सरकार के टैक्स इकोसिस्टम के साथ इंटीग्रेट करने की अनुमति देते हैं।" "अब कंसल्टेंट इस एक्सेस को AI टूल्स के साथ मिलाकर ऐसे सिस्टम बना सकते हैं जिनमें इंसानी दखल बहुत कम हो।"