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    Supertech के प्रोजेक्ट भी हो सकते हैं NBCC के हवाले, कंपनी ने भी कहा - हम परियोजनाएं पूरी करने के लिए तैयार

    NCLT में चल रहे सुपरटेक लि. के मामले में एनबीसीसी से इसके प्रोजेक्टों को पूरा करने का सुझाव मुख्य कर्जदाता बैंक यूनियन बैंक की ओर से दिया गया है। सुपरटेक की नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई परियोजनाएं हैं। एनसीएलटी में पेश हुए अटार्नी जनरल वेंकट रमानी ने भी कहा कि एनबीसीसी इन परियोजनाओं पर काम करने का इच्छुक है।

    By Agency Edited By: Ram Mohan Mishra Updated: Thu, 11 Jul 2024 06:40 PM (IST)
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    Supertech के प्रोजेक्ट भी NBCC के हवाले हो सकते हैं।

    मनीष तिवारी, नई दिल्ली। आम्रपाली परियोजनाओं की तरह सुपरटेक लिमिटेड के रुके-फंसे प्रोजेक्ट भी एनबीसीसी के पास जा सकते हैं। खास बात यह है कि एनबीसीसी ने भी सैद्धांतिक रूप से इस पर सहमति जताई है कि अगर उसे इन प्रोजेक्टों को पूरा करने की जिम्मेदारी दी जाती है तो वह इसके लिए तैयार हैं- बस यथोचित प्रक्रिया का सही तरह पालन किया जाए।

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    मुख्य कर्जदाता यूनियन बैंक ने दिया सुझाव

    एनसीएलटी में चल रहे सुपरटेक लि. के मामले में एनबीसीसी से इसके प्रोजेक्टों को पूरा करने का सुझाव मुख्य कर्जदाता बैंक यूनियन बैंक की ओर से दिया गया है। बैंक का केवल एक प्रोजेक्ट इको विलेज-टू में लगभग 432 करोड़ रुपये सुपरटेक पर बकाया है। एनबीसीसी के सूत्रों के अनुसार कंपनी सुपरटेक के सभी रुके और खटाई में पड़ गए प्रोजेक्टों को पूरा करने के लिए तैयार है, लेकिन उसे सभी परियोजनाओं का विवरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जैसा कि आम्रपाली मामले में किया गया था।

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    एनबीसीसी से अभी केवल इको विलेज-टू के लिए आइआरपी (दीवालिया मामले में अंतरिम समाधान के लिए नियुक्त किए जाने वाले पेशेवर) की ओर से संपर्क किया गया था। एनसीएलटी में सुनवाई के दौरान आइआरपी ने कहा है कि अगर यूनियन बैंक की ओर से अनुरोध किया जाता है तो सभी परियोजनाओं की पूरी जानकारी एनबीसीसी के साथ साझा की जा सकती है।

    एनबीसीसी इन परियोजनाओं पर काम करने का इच्छुक

    सुपरटेक की नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई परियोजनाएं हैं। एनसीएलटी में पेश हुए अटार्नी जनरल वेंकट रमानी ने भी कहा कि एनबीसीसी इन परियोजनाओं पर काम करने का इच्छुक है और सुपरटेक को कर्ज देने वाले बैंकों का मत भी इसके पक्ष में है। अगर सुपरटेक के फंसे प्रोजेक्टों को पूरा करने की जिम्मेदारी एनबीसीसी को मिलती है तो इस सरकारी कंपनी के लिए आवासीय प्रोजेक्टों के मामले में यह एक और बड़ी बात होगी।

    ढाई लाख से अधिक घरों के पूरा होने की निकलेगी राह

    इस तरह अकेले एनसीआर में वर्षों से अधूरे पड़े ढाई लाख से अधिक भवनों के पूरा होने की राह निकल सकती है। एनबीसीसी के सूत्रों के अनुसार हरियाणा रेरा ने भी उससे आग्रह किया है कि गुरुग्राम और अन्य शहरों में फंसी परियोजनाओं को एनबीसीसी अपने हाथ में ले। अभी इस प्रस्ताव पर एनबीसीसी ने कोई जवाब नहीं दिया है।

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