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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 03, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

टाइम-बम की तरह हैं मुफ्त में मिलने वाली चीजें, जीडीपी के एक फीसद तक सीमित हो इन पर होने वाला खर्च: SBI रिपोर्ट

By Siddharth PriyadarshiEdited By:
Published: Mon, 03 Oct 2022 06:58 PM (IST)

एसबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जब वित्त वर्ष 2023 के लिए राज्यों द्वारा घोषित की गईं मुफ्त ...और पढ़ें

SBI report warns of freebies, says its a time-bomb
SBI report warns of freebies, says its a time-bomb

नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। जहां एक के बाद एक राज्य मुफ्त की योजनाएं पेश करने की होड़ में लगे हुए हैं, वहीं एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ये योजनाएं 'टाइम बम' की तरह हैं। रिपोर्ट में सर्वोच्च न्यायालय के नेतृत्व वाली समिति से आग्रह किया गया है कि ऐसी कल्याणकारी योजनाओं को राज्य के सकल घरेलू उत्पाद या कर संग्रह के एक प्रतिशत तक सीमित रखा जाए।

भारतीय स्टेट बैंक के समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में सिर्फ तीन राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि छत्तीसगढ़, झारखंड और राजस्थान के गरीब राज्यों की वार्षिक पेंशन देनदारी 3 लाख करोड़ रुपये है। इन राज्यों को प्राप्त होने वाले कर राजस्व को देखें तो झारखंड, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की पेंशन देनदारियां क्रमशः 217, 190 और 207 प्रतिशत हैं, जो काफी अधिक है।

खराब हो रही है राज्यों की हालत

हिमाचल प्रदेश के मामले में देनदारी कर राजस्व का 450 प्रतिशत, गुजरात के मामले में राजस्व का 138 प्रतिशत और पंजाब के लिए 242 प्रतिशत है। ये वो राज्य है जो पुरानी पेंशन प्रणाली को वापस लागू करने की योजना बना रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि नवीनतम उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्यों के ऑफ-बजट उधार, जो राज्य के स्वामित्व वाली संस्थाओं द्वारा लिए गए हैं और जिनको राज्यों की गारंटी मिली है, 2022 में सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 4.5 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं।

रिपोर्ट में शीर्ष अदालत के पैनल से इन कल्याणकारी योजनाओं के लिए जीडीपी का 1 प्रतिशत या राज्य के अपने कर संग्रह का 1 प्रतिशत या राज्य के राजस्व व्यय के 1 प्रतिशत की सीमा तय करने का आग्रह किया गया है।

कहां हो रहा है अधिक खर्च 

लोन गारंटी राशि तेलंगाना के लिए जीडीपी का 11.7 फीसदी, सिक्किम के लिए 10.8 फीसदी, आंध्र के लिए 9.8 फीसदी, राजस्थान के लिए 7.1 फीसदी और यूपी के लिए 6.3 फीसदी है। इस गारंटी राशि का लगभग 40 प्रतिशत बिजली क्षेत्र के लिए जाता है। सिंचाई, बुनियादी ढांचे के विकास, खाद्य और जल आपूर्ति जैसे क्षेत्र में भी अच्छा-खासी रकम खर्च होती है।

जिन राज्यों ने पुरानी पेंशन योजना को वापस ले लिया है या ऐसा करने का वादा किया है, उनकी संयुक्त देनदारियां वित्त वर्ष 2020 में 3,45,505 करोड़ रुपये थीं। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य के लिए यह वित्त वर्ष 2020 में 6,638 करोड़ रुपये से बढ़कर 60,000 करोड़ तक बढ़ जाएगी। झारखंड के लिए यह 6,005 करोड़ रुपये है, अब इसमें इसमें 54,000 करोड़ रुपये की वृद्धि हो जाएगी।

आंध्र और पंजाब में जीडीपी के 2 प्रतिशत से अधिक खर्च

वित्तीय सहायता/नकद हस्तांतरण, यूटिलिटी सब्सिडी, ऋण या शुल्क माफी और राज्यों द्वारा अपने नवीनतम बजट में घोषित ब्याज मुक्त ऋण पर हाल ही में आरबीआई के एक पेपर का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि एक अनुमान के अनुसार मुफ्त योजनाओं पर राज्यों का 0.1 से 2.7 प्रतिशत खर्च होता है। आंध्र और पंजाब जैसे कुछ अत्यधिक ऋणग्रस्त राज्यों के लिए मुफ्त योजनाओं का खर्च जीडीपी के 2 प्रतिशत से अधिक हो गया है।

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