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    'मैं टाइगर की सवारी कर रहा था', रामलिंगा राजू की वो चिट्ठी, जिससे हिल गया था पूरा देश; सबसे बड़े कॉरपोरेट फ्रॉड की कहानी

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 09:32 PM (IST)

    Satyam Computer Scandal: भारत के सबसे बड़े कॉर्पोरेट घोटालों में से एक 'सत्यम स्कैम' पर नेटफ्लिक्स का एपिसोड जारी हुआ है। यह लेख बताता है कि कैसे सत्य ...और पढ़ें

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    'मैं टाइगर की सवारी कर रहा था', रामलिंगा राजू की वो चिट्ठी, जिससे हिल गया था पूरा देश? सबसे बड़े कॉरपोरेट फ्रॉड की कहानी

    नई दिल्ली| भारत के सबसे बड़े कॉरपोरेट घोटालों में गिने जाने वाले 'सत्यम स्कैम' (Satyam Computer Scandal) पर बना नेटफ्लिक्स का एपिसोड आखिरकार रिलीज हो गया। लेकिन इसके पीछे की कहानी सिर्फ एक डॉक्यूमेंट्री (Bad Boy Billionaires: India) नहीं, बल्कि कोर्ट, अरबों की धोखाधड़ी और आईटी इंडस्ट्री की साख से जुड़ा पूरा घटनाक्रम है।

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    साल 2000 के दशक के मध्य में सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज (Satyam Computer Services) भारत की टॉप आईटी कंपनियों में गिनी जाती थी। कंपनी के 60 से ज्यादा देशों में क्लाइंट थे, करीब 53 हजार कर्मचारी काम कर रहे थे और यह टाटा कंसल्टेंसी और इंफोसिस जैसी दिग्गज कंपनियों के बराबर खड़ी मानी जाती थी। शेयर बाजार में सत्यम को 'ब्लू-चिप IT स्टॉक' कहा जाता था।

    कैसे सामने आया था यह घोटाला?

    भारत के सबसे बड़े कॉरपोरेट घोटालों में शामिल सत्यम स्कैम किसी सरकारी जांच या छापेमारी से नहीं, बल्कि कंपनी के मालिक के एक सनसनीखेज कबूलनामे (Ramalinga Raju Confession) से सामने आया था। जनवरी 2009 की एक सुबह बायराजू रामलिंगा राजू (Byrraju Ramalinga Raju), जो सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज (Satyam Computer Services) के संस्थापक और चेयरमैन थे, उन्होंने कंपनी के बोर्ड, शेयर बाजार नियामकों और निवेशकों को एक चिट्ठी भेजी।

    इस चिट्ठी में उन्होंने खुद स्वीकार किया कि सत्यम के खातों में सालों से बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी (Corporate Accounting Fraud India) की जा रही थी। इस चिट्ठी के जरिए भारत के सबसे बड़े कॉरपोरेट स्कैम का पर्दाफाश हुआ।

    रामलिंगा राजू ने लिखा कि, "कंपनी की बैलेंस शीट में करीब 7,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की नकली नकदी दिखाई गई थी। मुनाफा और रेवेन्यू लगातार बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाते रहे, जबकि हकीकत में कंपनी के बैंक खातों में उतना पैसा था ही नहीं। इतना ही नहीं, करीब 13,000 ऐसे कर्मचारी (Satyam Fake Employees) कंपनी की लिस्ट में दिखाए गए, जो असल में मौजूद नहीं थे। इन फर्जी कर्मचारियों की सैलरी के नाम पर पैसा निकालकर उसे इधर-उधर घुमाया जाता रहा।"

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    HCL से भी बड़ी कंपनी थी सत्यम कंप्यूटर

    यह घोटाला अचानक नहीं हुआ। सालों तक फर्जी अकाउंटिंग, झूठे बैंक स्टेटमेंट और गलत आंकड़ों के सहारे कंपनी को 'ब्लू-चिप IT स्टॉक' की छवि में बनाए रखा गया। शेयर बाजार में सत्यम की गिनती TCS और इंफोसिस जैसी दिग्गज कंपनियों के बराबर होती थी। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सत्यम कंप्यूटर उस वक्त एचसीएल से भी बड़ी कंपनी थी। हालांकि, अंदर ही अंदर कंपनी के हालात बिगड़ते जा रहे थे। कंपनी में नकदी की भारी कमी हो चुकी थी और नए निवेशकों से पैसा जुटाना मुश्किल होता जा रहा था।

    दिसंबर 2008 में मामला तब और बिगड़ा, जब सत्यम ने Maytas इंफ्रास्ट्रक्चर और Maytas प्रॉपर्टीज को खरीदने का ऐलान किया। ये दोनों कंपनियां रामलिंगा राजू के बेटों से जुड़ी थीं। आरोप लगे कि सत्यम के पैसों को इन कंपनियों में डायवर्ट कर घाटे और नकदी की कमी छुपाने की कोशिश की जा रही है। निवेशकों और बाजार ने इस सौदे का कड़ा विरोध किया, जिसके बाद डील रद्द करनी पड़ी।

    'मैं बाघ की सवारी कर रहा था', कबूलनामे के बाद राजू ने क्या कहा?

    इसके बाद शक और गहराया, शेयर तेजी से गिरने लगे और सवाल उठने लगे। हालात पूरी तरह हाथ से निकल चुके थे। खुद राजू ने बाद में कहा कि वह "बाघ की सवारी कर रहे थे और उतरने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा था।" इसी मजबूरी में उन्होंने सच कबूल करने का फैसला किया। कबूलनामे के बाद शेयर बाजार में हड़कंप मच गया, सरकार को कंपनी बचाने के लिए दखल देना पड़ा और जांच एजेंसियां सक्रिय हो गईं। यहीं से सत्यम घोटाला पूरी तरह देश के सामने आया और भारतीय कॉरपोरेट इतिहास का सबसे काला अध्याय बन गया। इस घोटाले को 'भारत का एनरॉन' कहा जाता है।

    सत्यम की नीलामी, टेक महिंद्रा से महिंद्रा सत्यम तक

    घोटाले के बाद सरकार ने दखल दिया, ताकि कंपनी पूरी तरह ढह न जाए और कर्मचारियों की नौकरियां बच सकें। आखिरकार सत्यम की नीलामी हुई और उसे टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) ने खरीद लिया। इसके बाद कंपनी का नाम बदलकर महिंद्रा सत्यम किया गया और फिर इसे पूरी तरह टेक महिंद्रा में मर्ज कर दिया गया। उधर, रामलिंगा राजू और उनके सहयोगियों को दोषी ठहराया गया और जेल की सजा सुनाई गई।

    Maytas कंपनियां क्या थीं? दिचलस्प है कहानी

    सत्यम घोटाले में Maytas कंपनियों का नाम भी सामने आया। Maytas, दरअसल सत्यम को उल्टा लिखने से बना नाम था और ये कंपनियां राजू के बेटों से जुड़ी थीं। आरोप था कि सत्यम के पैसों को Maytas इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में डायवर्ट करने की कोशिश की गई।

     

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