नई दिल्ली। सरकार ने यूरोपीय संघ और अमेरिका को चीनी निर्यात के नियमों में ढील दी है। अब कोई भी व्यापारी या कंपनी भारत से यूरोप और अमेरिका में शुल्क-दर कोटा (टीआरक्यू) व्यवस्था के तहत चीनी निर्यात कर सकेगी।

प्राइवेट चीनी मिलों के संघ इस्मा (आईएसएमए) ने इस सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। इस पर पुनर्विचार की अपील की गई है। टीआरक्यू व्यवस्था के तहत संबंधित वस्तु को रियायती दर पर सीमित मात्रा में निर्यात किया जा सकता है। इससे अधिक निर्यात पर शुल्क की अपेक्षाकृत ऊंची दर लागू होती है।

इससे पहले सरकार ने दो चीनी संघों इस्मा और एनएफसीएसएफ की तरफ से गठित इंडियन शुगर एक्जिम (आयात-निर्यात) कॉरपोरेशन को यूरोपीय संघ और अमेरिका को टीआरक्यू के तहत चीनी निर्यात की अनुमति थी।

सरकार का तर्क

विदेश व्यापार निदेशालय ने कहा है कि यूरोप और अमेरिका के लिए वरीयता पूर्ण कोटा के तहत चीनी निर्यात को एसटीई (सरकारी व्यापार उपक्रमों) के घेरे से निकाल कर कुछ शर्तों के साथ मुक्त व्यवस्था में रख दिया गया है।

इस्मा की आपत्ति

इस्मा के महानिदेशक अविनाश वर्मा इस कदम को बिल्कुल गलत बताया है। सरकार ने मिलों को अपनी बात रखने का मौका दिए बगैर और खाद्य मंत्रालय की सलाह की अनदेखी करके यह निर्णय लिया है। इसका फायदा केवल कुछ छोटे व्यापारियों को होगा।

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Posted By: Shashi Bhushan Kumar

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