RBI Repo Rate: 5 दिन बाद शुरू होगी MPC मीटिंग, कितना घटेगी आपकी EMI; एक्सपर्ट ने क्या बताया?
3 दिसंबर को मौद्रिक समिति की बैठक के दौरान वित्तीय संबंधित फैसले लिए जाएंगे। इसके साथ ही रेपो रेट (RBI ...और पढ़ें

नई दिल्ली। हर दो महीने में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा मौद्रिक समिति की बैठक आयोजित की जाती है। ये बैठक 5 दिन बाद 3 दिसंबर से शुरू होगी। इस बैठक के दौरान वित्तीय संबंधित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। इसके अलावा रेपो रेट (RBI Repo Rate) रिव्यू कर ये तय किया जाएगा कि इसमें कोई बदलाव करना है या नहीं?
रेपो रेट का सीधा असर आपके होम लोन की ईएमआई पर पड़ता है। रिजर्व बैंक ने जून से लेकर अब तक रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अगले महीने हो रही बैठक में रेपो रेट कटौती (Repo Rate Cut करेगा या नहीं? आइए जानते हैं कि इसे लेकर एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं-
एक्सपर्ट ने क्या बताया?
आनंद राठी समूह के मुख्य अर्थशास्त्री और कार्यकारी निदेशक, सूजन हाजरा ने कहा कि उनका अनुमान है कि आरबीआई इस बार 25 आधार अंकों या 0.25% की कटौती कर सकता है। इसके साथ ही खाद्य कीमतों में अपस्फीति बनी रहने की संभावना है, जिससे वित्त वर्ष के अंत तक समग्र मुद्रास्फीति लक्ष्य से नीचे बनी रहेगी, और जीएसटी दरों में कटौती का लाभ भी इसमें मिलेगा। हालांकि वित्त वर्ष 26 में भारत की विकास दर 7% रहने का अनुमान है, जो अर्थव्यवस्था की अनुमानित क्षमता से कम है।
खाद्य कीमतों में गिरावट रहने की उम्मीद है, लेकिन कोर महंगाई (सोने के प्रभाव को छोड़कर 4%) के लक्ष्य से नीचे चल रही है। यह हालात आरबीआई की कमेटी को न सिर्फ रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती करने की गुंजाइश देता है, बल्कि नीतिगत ढील के लिए भी इशारा करता है।
अग्नम एडवाइजर्स संस्थापक और सीईओ, प्रशांत मिश्रा ने कहा कि RBI के पास इस चक्र में विकास को समर्थन देने के लिए सीमित गुंजाइश है और 25 bps की रेपो दर कटौती संभव है। यदि बैंक इस कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाते हैं, तो उधारकर्ताओं की EMI में मामूली कमी आ सकती है—लेकिन यह गिरावट लोन की राशि, रीसेट अवधि और बैंक ट्रांसमिशन की गति पर निर्भर करेगी, इसलिए राहत सीमित ही रहने वाली है, कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।
महंगाई 4% से नीचे जरूर है, जिससे थोड़ी राहत मिलती है, लेकिन यह मुख्यतः खाद्य और कोर कीमतों में अस्थायी नरमी की वजह से है, कोई स्थायी रुझान नहीं। कमजोर होती वैश्विक मांग, टैरिफ जोखिमों और घरेलू विकास पर बने दबाव को देखते हुए, MPC से संतुलित और सतर्क रुख की उम्मीद है, जो सीमित राहत देगा, लेकिन यह संकेत नहीं देगा कि महंगाई के जोखिम पूरी तरह खत्म हो चुके हैं।
बेसिक होम लोन के सीईओ और सह-संस्थापक अतुल मोंगा ने कहा कि हमें उम्मीद है कि महंगाई में राहत के संकेत दिखने के बावजूद, आरबीआई रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगी। इसका मतलब है कि जल्द ईएमआई बढ़ोतरी आ सकती है। साथ ही अगले साल तक रेपो रेट में कटौती की गुंजाइश है। लेकिन जरूरी नहीं कि राहत ही मिले, क्योंकि पिछले 18-24 महीनों में फ्लोटिंग-रेट लोन (Floating Rate Loan) लेने वाले कई उधारकर्ता अभी भी ज्यादा भुगतान करने की समस्या से जूझ रहे हैं।
अब तक कब-कब कितना हुआ बदलाव
| तारीख | रेपो रेट | बदलाव |
| 7 फरवरी | 6.25% | -0.25% |
| 9 अप्रैल | 6.00% | -0.25% |
| 6 जून | 5.50% | -0.50% |
| अगस्त | 5.50% | कोई बदलाव नहीं |
| 1 अक्टूबर | 5.50% | कोई बदलाव नहीं |
(सोर्स- बैंक बाजार)
कितना घट सकता है रेपो रेट?
हाल ही में Morgan Stanley की रिपोर्ट में भी रेपो रेट में 0.25 फीसदी कटौती की बात कही गई थी। अगर 0.25 फीसदी की कटौती होती है तो आपका रेपो रेट 5.25 फीसदी ही रह जाएगा। इस कटौती का सबसे ज्यादा फायदा फ्लोटिंग रेट पर लोन लेने वाले उधारकर्ता को होगा।
