मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन ने पश्चिमी देशों के प्रति नरम रवैये को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) की खिंचाई की। उन्होंने कहा कि मुद्राकोष न सिर्फ विकसित देशों की उदार मौद्रिक नीतियों के प्रति नरम रुख रखता है, बल्कि उनकी तारीफ भी करता है। पश्चिमी देशों की आसान कर्ज की नीतियों का उभरते बाजारों में प्रतिकूल असर पड़ा है।

राजन के मुताबिक, आईएमएफ जैसी बहुपक्षीय एजेंसियों को इस पर गौर करना चाहिए। मुद्राकोष को नरम मौद्रिक नीतियों से करीब एक दशक से जारी मुद्रा प्रवाह के प्रभाव को काबू में करने के लिए कदम उठाना चाहिए। राजन पूर्व में आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री रह चुके हैं। उनका बयान इस लिहाज से मायने रखता है कि अगले महीने वह तुर्की में होने वाली मुद्राकोष की बैठक को संबोधित करने वाले हैं।

आरबीआई के गवर्नर ने कहा कि मुद्राकोष से अपेक्षा होती है कि वह इन चीजों को एक ग्लोबल नजरिये से देखे। लेकिन वह एक किनारे बैठकर देखता है। यहां तक कि इस तरह की नीतियों की सराहना करता रहा है। उसने इन नीतियों पर कभी सवाल खडा नहीं किया। इन मुद्दों की समीक्षा करने की जरुरत है।

दुर्भाग्य से अगर आप दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों को मिली जिम्मेदारियों पर नजर डालें तो किसी भी सेंट्रल बैंक के पास दुनिया भर के लिए कोई मैंडेट नहीं है। उन्हें सिर्फ घरेलू हालात से निपटने की जिम्मेदारी मिली हुई है कि रोजगार और वृद्धि के लिए क्या किया जा रहा है? उन्हें दुनिया की चिंता उसके बाद ही होती है।

राजन के मुताबिक, "यदि मैं कुछ ऐसा करूं जिससे दूसरे देश के लिए समस्याएं खड़ी होती हैं और नतीजतन मेरे मुल्क के लिए उस देश से मांग घटती है तो मुझे इस पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन जब तक वह देश मेरे देश से आयात नहीं करता है, मुझे उसकी परवाह नहीं है। ऐसी समस्या के निजात के लिए राजन ने राजनीतिक नेतृत्व के स्तर पर मौद्रिक नीतियों में बेहतर तालमेल बिठाने पर जोर दिया।

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Edited By: Shashi Bhushan Kumar

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