जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। दुनिया भर की एजेंसियों ने वैसे तो यह कयास लगाया था कि आर्थिक विकास दर के मामले में भारत चालू वित्त वर्ष के दौरान विश्व की सबसे तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था वाले देश चीन से आगे निकल जाएगा। लेकिन सरकार के ताजा आंकड़े बताते हैैं कि यह कारनामा पिछली तिमाही (जनवरी से मार्च, 2015) के दौरान ही हो चुका है।

इस दौरान भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.5 फीसद रही है जबकि चीन की अर्थव्यवस्था इस दौरान 7 फीसद की तेजी से आगे बढ़ी थी। इस प्रकार चीन को पछाड़ कर भारत अब दुनिया का सबसे तेज विकास दर वाला देश हो गया है। वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान भारत की आर्थिक विकास दर 7.3 फीसद रही है, जो बताता है कि मोदी सरकार का पहला साल संतोषजनक रहा है। पीएम मोदी को विरासत में (वर्ष 2013-14) में 6.6 फीसद की रफ्तार वाली अर्थव्यवस्था मिली थी।

चौथी तिमाही ने बदली तस्वीर
वर्ष 2014-15 की चारों तिमाहियों में अर्थव्यवस्था में क्रमश: 6.7 फीसद, 8.4 फीसद, 6.6 फीसद और 7.5 फीसद की वृद्धि दर हासिल हुई है। तीसरी तिमाही में (6.6 फीसद) मंदी के जो आसार बने थे, वह अंतिम तिमाही (जनवरी से मार्च - 7.5 फीसद) में खत्म हो गए हैैं। देश के सकल घरेलू उत्पाद का आकार 106.44 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है। यह वर्ष 2013-14 से 7.3 फीसद ज्यादा है। सरकार के लिए अच्छी बात यह है कि कृषि और खनन को छोड़ कर अर्थव्यवस्था के अन्य सभी वर्गो ने सात फीसद से ज्यादा की रफ्तार पकड़ी है। दोनों प्रमुख सर्विस सेक्टर में 10.5 से 11.5 फीसद की वृद्धि दर बहुत ही अहम है। क्योंकि पिछले वर्ष इसकी रफ्तार कम हुई थी और विशेषज्ञों ने भारत में सर्विस सेक्टर (व्यापार, होटल, रीयल एस्टेट, वित्तीय सेवा आदि) के दिन लदने की बात कही थी।

तीसरी तिमाही के अनुमान घटाए
आर्थिक विकास दर के ये आंकड़े संदेह से परे नहीं है। क्योंकि अक्टूबर-दिसंबर की तिमाही में पहले सरकार ने 7.5 फीसद की आर्थिक विकास दर हासिल होने की बात कही थी, लेकिन अब उसे घटा कर 6.6 फीसद कर दिया गया है। जानकारों का मानना है कि आंकड़ों में इतना बड़ा अंतर कई तरह की आशंकाएं पैदा करता है। हालांकि औद्योगिक उत्पादन की बदहाल स्थिति और कर्ज वितरण की सुस्त रफ्तार के बावजूद चौथी तिमाही में निजी निवेश की रफ्तार बढ़ी है। इसके चलते मैन्यूफैक्चङ्क्षरग क्षेत्र के प्रदर्शन में भी चौथी तिमाही में तेज सुधार देखने को मिला है।

कई स्तरों पर चुनौतियां बरकरार
कई जानकारों का मानना है कि सात फीसद से ज्यादा की आर्थिक विकास दर के बावजूद अभी कई स्तरों पर चुनौतियां बरकरार हैैं। मैन्यूफैक्चङ्क्षरग की रफ्तार बढऩे से रोजगार के अवसर तो पैैदा होंगे। लेकिन 15 से 20 ïवर्षों में बेरोजगारी और गरीबी दूर करने के लिए भारत को हर वर्ष 10 से 12 फीसद की आर्थिक विकास दर हासिल करनी होगी। मसलन, मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था में मैन्यूफैक्चङ्क्षरग की हिस्सेदारी मौजूदा 18 फीसद से बढ़ा कर 25 फीसद करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए हर वर्ष 13 से 14 फीसद की वृद्धि दर मैन्यूफैक्चङ्क्षरग में होनी चाहिए। पिछले दो वर्षों से इसमें औसतन 6.2 फीसद रही है। पीएचडी चैैंबर के अध्यक्ष आलोक बी श्रीराम का कहना है कि सरकार को कई स्तरों पर सुधार करने होंगे। फिक्की के महासचिव ए दीदार सिंह ने कहा है कि अर्थव्यवस्था में इस तेजी के बावजूद उद्योग जगत नया निवेश करने को तैयार नहीं है। इसी तरह से मानसून की स्थिति खराब है और मांग भी काफी सुस्त पड़ी हुई है। सरकार को इन मुद्दों को देखना होगा।

अब यह साफ है कि अर्थव्यवस्था सुधार की तरफ है। सबसे अच्छा प्रदर्शन मैन्यूफैक्चङ्क्षरग का रहा है। हम आठ और नौ फीसद से ज्यादा की तरफ बढ़ सकते हैैं।

-अरुण जेटली, वित्त मंत्री

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Posted By: Kamal Verma

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