नई दिल्ली, पीटीआइ। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को भरोसा जताया कि भारत खाद्य कीमतों पर आपूर्ति संबंधी दबावों से निपटने में पूरी तरह सफल रहेगा। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति इस साल जनवरी से ही लगातार छह प्रतिशत से अधिक बनी हुई है। यह स्तर आरबीआइ के छह प्रतिशत के सहनीय स्तर से अधिक है।

मुद्रास्फीति से सामना करने में सफल रहेगा भारत

एक कार्यक्रम को आनलाइन संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि संभवत: भारत मुद्रास्फीति का बेहतर तरीके से सामना करने में सफल रहेगा। उन्होंने कहा कि आरबीआइ से भी ऐसे संकेत मिले हैं कि मुद्रास्फीति में गिरावट का रुख है और अगले साल की शुरुआत या मध्य तक यह सहनीय स्तर के दायरे में आ जाएगी। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि मुद्रास्फीति पर बाहरी कारकों का असर बना रहने वाला है, लेकिन भारत अन्य देशों की तुलना में खाद्य उत्पादों एवं ऊर्जा की आपूर्ति के संदर्भ में अच्छी स्थिति में है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में अगले साल तेजी की उम्मीद

सीतारमण ने कहा, 'मैं एक अच्छी एवं तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था और अगले साल इसके और बढ़िया रहने की उम्मीद करती हूं।' इसके साथ ही उन्होंने माना कि कच्चे तेल जैसे जिंसों के आयात के कारण मुद्रास्फीति में होने वाला उतार-चढ़ाव आगे भी बना रह सकता है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल को किफायती दाम पर सबके लिए उपलब्ध होना चाहिए और इसे एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। अगर वस्तुओं की आवाजाही को बाधित किया जाता है तो उसका हम पर असर देखने को मिलेगा।'

रूस से बढ़ा तेल का आयात

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत का रूस से तेल आयात बढ़ा है और पश्चिमी दुनिया के देश भी रूस से काफी मात्रा में तेल खरीद रहे हैं। सीतारमण ने कहा, 'तेल की कीमत का स्तर रूस से तेल खरीद का समर्थन करता है। भारत इसमें अकेला नहीं है। और रूसी तेल का एक कीमत स्तर तय करने की मांग करने वाले भी बड़ी मात्रा में रूस से आयात कर रहे हैं।'

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Edited By: Devshanker Chovdhary

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