नई दिल्ली। नवरात्र यानी महिला शक्ति को जानने, समझने और महसूस करने वाला पर्व। इसी दौरान अरुंधति भंट्टाचार्य का देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआइ) का मुखिया बनना नारी सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अरुंधती एसबीआइ की पहली महिला प्रमुख हैं। इससे पहले भी कई महिलाएं अपनी प्रतिभा के बूते बैंकिंग क्षेत्र के शीर्ष ओहदों पर पहुंची हैं। पेश है एक नजर :

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चंदा कोचर : आइसीआइसीआइ बैंक की प्रबंध निदेशक और सीईओ हैं। 1984 में बतौर ट्रेनी ज्वाइन किया। 1994 यानी महज दस वर्ष के भीतर ही वे कंपनी में एजीएम पद पर पहुंच गईं। 2009 में बैंक की सीईओ और एमडी बनीं। क्षेत्र में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के चलते कई पुरस्कारों के अलावा भारत द्वारा पद्म विभूषण से भी नवाजा गया।

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शिखा शर्मा : 1980 में आइसीआइसीआइ बैंक के साथ करियर की शुरुआत की। लगातार 26 साल तक इसी बैंक से जुड़ी रहीं। माना जाता है कि सीईओ पद के लिए चंदा कोचर को इनसे तगड़ी दावेदारी मिली थी। 2009 में देश के तीसरे सबसे बड़े निजी बैंक एक्सिस बैंक की एमडी और सीईओ बनीं। इनके नेतृत्व में बैंक ने करिश्माई तरक्की की।

नैनालाल किदवई : पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट नैना एचएसबीसी इंडिया की भारत में प्रमुख हैं। वे वर्तमान में फिक्की की अध्यक्ष भी हैं। 1982 से अपने करियर की शुरुआत कर के कई बैंकों के अहम पदों पर रह चुकी हैं। वे पहली भारतीय महिला हैं जिन्होंने किसी विदेशी बैंक का भारत में संचालन किया।

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काकू नखाते : मार्च, 2010 से बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच की भारत में मुखिया और अध्यक्ष पद पर विराजमान हैं। इससे पहले वे जेपी मॉर्गन चेज एंड कंपनी में वाइस चेयरपर्सन का दायित्व संभाल चुकी हैं।

विजयालक्ष्मी अय्यर : 1975 में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से अपना करियर शुरू करने वाली विजयालक्ष्मी नवंबर, 2012 से बैंक ऑफ इंडिया की सीएमडी हैं। इससे पहले ये सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की कार्यकारी निदेशक भी रह चुकी हैं।

अर्चना भार्गव : अप्रैल, 2013 से यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की सीएमडी हैं। इससे पहले 1977 से पंजाब नेशनल बैंक में बतौर जीएम कार्यरत थीं। दिल्ली विश्वविद्यालय से एमएससी की डिग्री हासिल करने वाली अर्चना ने क्रेडिट मैनेजमेंट, ह्युंमन रिसोर्स मैनेजमेंट, प्लानिंग एंड डेवलपमेंट और फाइनेंसियल इनक्लूजन जैसे कई विविधतापूर्ण पोर्टफोलियों में काम किया है।

सुब्बालक्ष्मी फणसे : अक्टूबर 2012 से इलाहाबाद बैंक की सीएमडी हैं। इससे पहले ये बैंक ऑफ महाराष्ट्र में विभिन्न पदों पर काम कर चुकी हैं। नवंबर 2009 से अक्टूबर 2012 तक विजया बैंक की कार्यकारी निदेशक थीं। बैंकिंग क्षेत्र में अपने 33 साल के उल्लेखनीय करियर के दौरान इन्हें कई विशिष्ट सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

देश के सबसे बड़े बैंक की चेयरमैन का सफर

अरुंधति भंट्टाचार्य : 1977 में एसबीआइ में बतौर प्रोबेशनरी आफिसर नियुक्त हुईं। 36 साल तक लगातार इस बैंक से जुड़ी रहीं। इस दौरान वे विभिन्न शीर्ष पदों पर रहकर बैंकिंग क्षेत्र में सफलता की सीढि़यां चढ़ती रहीं। कुछ दिनों तक ये एसबीआइ की सहायक कंपनी एसबीआइ कैपिटल मार्केट्स की मुखिया भी रही हैं। ये बैंक की न्यूयॉर्क शाखा की भी जिम्मेदारी संभाल चुकीं हैं।