इन दो लड़कों ने बनाई मीशो, जापान में मोटी सैलरी वाली जॉब छोड़ भारत लौटे; बना दिया 50000 करोड़ का प्लेटफॉर्म
विदित आत्रे और संजीव बरनवाल ने जापान में आकर्षक नौकरियां छोड़कर भारत में मीशो की शुरुआत की। उनका लक्ष्य छोटे व्यवसायों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म प्रदान करना था। आज, मीशो 50000 करोड़ रुपये का प्लेटफॉर्म बन गया है, जो छोटे शहरों और गांवों में ऑनलाइन खरीदारी को बढ़ावा दे रहा है।

ई-कॉमर्स कंपनी मीशो (Meesho) अपना IPO ला रही है।
नई दिल्ली। ई-कॉमर्स कंपनी मीशो (Meesho) अपना IPO ला रही है। कंपनी ने अपना प्राइस बैंड 105-111 रुपये प्रति शेयर तय किया है, जिससे अपर बैंड पर प्लेटफॉर्म का वैल्यूएशन लगभग 50095.75 करोड़ रुपये (मूल बकाया शेयरों के आधार पर) हो गया है। ऐसे में हम आपको ये प्लेटफॉर्म कैसे बना, किसने बनाया? इसके बारे में बता रहे हैं। यह कंपनी फायदे में है या घाटे में यह भी जानेंगे।
मीशो को बनाने वाले IIT दिल्ली के दो पूर्व छात्र हैं। जिनका नाम विदित अतरे और संजीव बर्नवाल है। उन्होंने 2015 में जिस सपने को शुरू किया था, आज वो भारत के सोशल कॉमर्स का पर्याय बन चुका है। यह सिर्फ एक ऐप नहीं, बल्कि लाखों भारतीयों (खासकर महिलाओं) की आजीविका का भी जरिया बना है।
एक छोटे से आइडिया का जन्म
2015 में विदित और संजीव ने नौकरी छोड़ दी और बेंगलुरु के कोरमंगला में एक दो-कमरे के फ्लैट में डाइनिंग टेबल पर मीशो की नींव रखी। उनका आइडिया बेहद सादा था कि, “हर किसी को अपना ऑनलाइन बिजनेस शुरू करने का मौका मिलना चाहिए, बिना एक रुपया लगाए।”
उन्होंने देखा कि फ्लिपकार्ट-अमेजन जैसे बड़े प्लेटफॉर्म तो चल रहे हैं, लेकिन छोटे दुकानदारों, गृहिणियों और टियर-2, टियर-3 शहरों के लोगों के लिए ऑनलाइन बेचना मुश्किल है। बस यहीं से मीशो का जन्म हुआ और एक ऐसा प्लेटफॉर्म बना जहां कोई भी व्यक्ति व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिए प्रोडक्ट बेच सकता है।
सोशल कॉमर्स की क्रांति
मीशो ने पारंपरिक ई-कॉमर्स को उलट-पुलट कर दिया। यहां आपको गोदाम रखने, इन्वेंट्री मैनेज करने या शिपिंग की टेंशन लेने की ज़रूरत नहीं। बस प्रोडक्ट चुनो, अपने व्हाट्सएप ग्रुप, फेसबुक फ्रेंड्स में शेयर करो ऑर्डर आया तो मीशो डिलीवरी कर देगा। पैसा आपके खाते में! इस मॉडल ने खास तौर पर महिलाओं को सशक्त बनाया। आज मीशो पर 1.5 करोड़ से ज़्यादा रीसेलर्स हैं, जिनमें 80% से ज्यादा महिलाएं हैं, इनमें ज्यादातर गृहिणियां, छोटे शहरों और गांवों से हैं।
वित्त वर्ष 2025 में, मीशो ने 5,00,000 से ज़्यादा लेन-देन करने वाले विक्रेताओं को 19.9 करोड़ वार्षिक लेन-देन करने वाले उपयोगकर्ताओं से जोड़ा, जिससे 1.8 अरब ऑर्डर दिए गए। कंपनी का नेट मर्चेंडाइज वैल्यू (NMV) वित्त वर्ष 2024 में 21 प्रतिशत की वृद्धि के बाद, वित्त वर्ष 2025 में साल-दर-साल 29 प्रतिशत बढ़कर 29,988 करोड़ रुपये हो गया।
स्थापना के बाद से लगातार घाटा
कंपनी को अपनी स्थापना के बाद से ही घाटा हो रहा है और परिचालन नकदी प्रवाह में नकारात्मक दौर का सामना करना पड़ा है। राजस्व वृद्धि और शुद्ध व्यापारिक मूल्य (एनएमवी) विपणन, प्रौद्योगिकी और मानवशक्ति में महत्वपूर्ण निवेश से प्रेरित रहे हैं, जिससे कुल व्यय में बढ़ोतरी हुई है।
मीशो ने वित्त वर्ष 2025 में 3,942 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया, जो बड़े पैमाने पर एकमुश्त असाधारण मदों से प्रेरित था, जिसमें रिवर्स फ्लिप टैक्स और सार्वजनिक ढांचे में इसके परिवर्तन से जुड़ा लाभ कर शामिल था।
संजीव बर्नवाल
मीशो के सह-संस्थापक और सीटीओ संजीव बर्नवाल ने आईआईटी दिल्ली के बाद सोनी जापान में कोर टेक टीम के साथ काम किया। लेकिन मन में कुछ अपना करने की ज्वाला सुलगती रही। 2015 में वे विदित से मिले, दोनों ने नौकरी छोड़ी और भारत लौट आए, वो भी बिना यह तय किए कि स्टार्टअप में क्या करेंगे! संजीव बरनवाल सोनी मोबाइल कम्युनिकेशंस में एंड्रॉइड कैमरा हार्डवेयर एब्स्ट्रैक्शन लेयर आर्किटेक्चर डिजाइनर और डेवलपर के रूप में भी काम कर चुके हैं। वह पहले सोनी कॉर्पोरेशन के साथ भी काम कर चुके हैं।
विदित आत्रे
विदित आत्रे मीशो के को-फाउंडर और सीईओ हैं। मीशो से पहले, उन्होंने मोबाइल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म इनमोबी के साथ काम किया था, जहां उन्होंने कंपनी के लिए विकास रणनीतियां तैयार कीं। आईटीसी लिमिटेड में रहते हुए आत्रे ने व्यवसाय के ऑपरेटिंग डिपार्टमें को भी देखा है।
विदित आतरे को मिले कुछ बड़े सम्मान
फॉर्च्यून 40 अंडर 40 (2021)
फास्ट कंपनी की वर्ल्ड्स 50 मोस्ट इनोवेटिव कंपनीज़ (2020)
फोर्ब्स 30 अंडर 30 एशिया और इंडिया (2018)
मीशो अपनी टीम में 1,001-5,000 कर्मचारियों की कर्मचारी शक्ति के साथ काम करता है।
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