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    अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया फिर 90 के पार, 22 पैसे टूटकर 90.20 पर बंद; बार-बार क्यों गिर रही भारतीय मुद्रा?

    By Jagran BusinessEdited By: Ankit Kumar Katiyar
    Updated: Fri, 02 Jan 2026 05:56 PM (IST)

    Indian Rupee depreciation: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 22 पैसे टूटकर 90.20 पर बंद हुआ। कमजोर घरेलू आर्थिक संकेत, विदेशी बाजारों में डॉलर की मजबूती औ ...और पढ़ें

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    अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया फिर 90 के पार, 22 पैसे टूटकर 90.20 पर बंद; बार-बार क्यों गिर रही भारतीय मुद्रा?

    एजेंसी, नई दिल्ली| अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया शुक्रवार को एक बार फिर 90 के स्तर से नीचे फिसल (Indian Rupee depreciation) गया और 22 पैसे टूटकर 90.20 (अस्थायी) प्रति डॉलर (Rupee falls below 90) पर बंद हुआ। कमजोर घरेलू आर्थिक संकेतों और विदेशी बाजारों में डॉलर की मजबूती ने रुपये पर दबाव बनाए रखा। बाजार जानकारों के मुताबिक, विदेशी पूंजी की लगातार निकासी और आयातकों की मजबूत डॉलर मांग से निवेशकों की धारणा कमजोर रही।

    अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 89.95 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 90.25 के निचले स्तर तक फिसला, जबकि 89.92 के उच्च स्तर को भी छू गया। आखिर में यह 90.20 पर बंद हुआ। इससे एक दिन पहले, गुरुवार को रुपया 89.98 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

    विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली और डॉलर की मांग ने रुपये पर दबाव बढ़ाया। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और घरेलू शेयर बाजारों में तेज़ी ने गिरावट को कुछ हद तक थामने का काम किया। बाजार में यह भी चर्चा रही कि सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर बिक्री से निचले स्तरों पर रुपये को सहारा मिला।

    यह भी पढ़ें- 'रुपये में गिरावट कमजोरी नहीं, सोची समझी रणनीति', एक्सपर्ट ने बता दी अंदर की बात; कहा- 100 तक जाएगा रुपया

    क्यों गिर रहा रुपया? एक्सपर्ट ने बताई वजह

    मिराए एसेट शेयरखान के जिंस शोध विश्लेषक अनुज चौधरी (Anuj Choudhary Rupee analysis) ने कहा कि निराशाजनक वृहत आर्थिक आंकड़ों और डॉलर की मजबूती के चलते रुपया फिर 90 के पार (Dollar strength vs Rupee) चला गया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि एफआईआई की निकासी ने दबाव बढ़ाया, लेकिन कच्चे तेल की कमजोर कीमतों और शेयर बाजार की मजबूती से गिरावट सीमित रही। आरबीआई की ओर से संभावित हस्तक्षेप की खबरों ने भी बाजार को कुछ राहत दी।

    मैन्युफैक्चरिंग दो साल के निचले स्तर पर

    इसी बीच, देश के विनिर्माण क्षेत्र से भी कमजोर संकेत मिले। दिसंबर में विनिर्माण गतिविधियां (manufacturing activities) दो साल के निचले स्तर पर आ गईं। मासिक सर्वे के अनुसार, नए ऑर्डर की रफ्तार धीमी पड़ने से गतिविधियों पर असर पड़ा। मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण पीएमआई नवंबर के 56.6 से घटकर दिसंबर में 55 रह गया।

    वैश्विक स्तर पर, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती दिखी और डॉलर सूचकांक 0.07 प्रतिशत बढ़कर 98.38 पर पहुंच गया। घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 573.41 अंक चढ़कर 85,762.01 और निफ्टी 182 अंक बढ़कर 26,328.55 पर बंद हुआ।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.58 प्रतिशत गिरकर 60.52 डॉलर प्रति बैरल रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, एफआईआई गुरुवार को शुद्ध रूप से 3,268.60 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर बिकवाल रहे, जिसका असर रुपये पर भी दिखा।