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    Onion Export: क्या फिर रुलाने वाली है प्याज? सरकार ने दी निर्यात की इजाजत

    Updated: Sat, 27 Apr 2024 04:41 PM (IST)

    केंद्र सरकार ने पिछले कई महीनों से प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखा था। लेकिन इसमें थोड़ी ढील दी गई है। सरकार ने 6 पड़ोसी देशों को प्याज निर्यात करने की अनुमति दे दी है। इससे पहले सरकार ने मध्य-पूर्व और कुछ यूरोपीय देशों को 2000 टन सफेद प्याज के निर्यात की भी इजाजत दी थी। आइए जानते हैं कि सरकार ने निर्यात में ढील क्यों दी है।

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    सरकार ने पिछले साल दिसंबर में प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था।

    बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पिछले कई महीनों से प्याज के निर्यात पर पाबंदी लगा रखी थी, ताकि देश में कीमतों को कम रखा जा सके। लेकिन, सरकार ने शनिवार को छह पड़ोसी देशों को 99,500 टन प्याज के निर्यात की अनुमति दे दी है। यह मुख्य तौर पर महाराष्ट्र की फसल है।

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    किन देशों को होगा प्याज का निर्यात?

    उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा बताया कि सरकार ने छह पड़ोसी देशों- बांग्लादेश, यूएई, भूटान, बहरीन, मॉरीशस और श्रीलंका को 99,150 टन प्याज के निर्यात की इजाजत दी है।

    इससे पहले केंद्र सरकार ने विशेष रूप से मध्य पूर्व और कुछ यूरोपीय देशों को 2,000 टन सफेद प्याज के निर्यात की भी अनुमति दी थी।

    प्याज के निर्यात पर क्यों लगा था प्रतिबंध?

    दरअसल, 2023-24 में पिछले साल के मुकाबले खरीफ और रबी फसलों की पैदावार घटने का अनुमान था। इसलिए सरकार ने पिछले साल दिसंबर में प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया दिया, ताकि घरेलू बाजार में इसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। इससे कीमतों को कम रखने में भी मदद मिली।

    सरकार ने उस वक्त बताया था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्याज की डिमांड बढ़ गई है, जिसके चलते यह प्रतिबंध लगाया गया है।

    कितना रहेगा प्याज का उत्पादन

    कृषि मंत्रालय ने पिछले महीने प्याज उत्पादन के आंकड़े जारी किए थे। इसके मुताबिक, 2023-24 में प्याज की पैदावार करीब 254.73 लाख टन होने की उम्मीद है, जो पिछले साल 302.08 लाख टन थी। मंत्रालय ने बताया कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में प्याज का उत्पादन कम हुआ है, जो पैदावार में गिरावट की बड़ी वजह है।

    हालांकि, सरकार ने प्याज भंडारण तकनीक को बेहतर किया है। यही वजह है कि इस भंडारण क्षमता को 1,200 टन से बढ़ाकर 5,000 टन करने का फैसला किया है। सरकार ने दावा किया कि कोल्ड स्टोरेज के पायलट से प्याज के भंडारण में होने वाला नुकसान 10 प्रतिशत तक कम हुआ है।

    (पीटीआई से इनपुट के साथ)

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