भारत की आर्थिक वृद्धि अत्यंत नाजुक दौर में, निजी खपत और पूंजी निवेश में दिखी धीमी रफ्तार
आरबीआइ के एमपीसी सदस्य जयंत आर वर्मा ने कहा है कि अब तक निजी खपत और पूंजी निवेश रफ्तार नहीं पकड़ रही है। वहीं आइआइएम अहमदाबाद के प्रोफेसर ने कहा दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत के सामने मंदी का जोखिम नहीं है।

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। आरबीआइ की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य जयंत आर वर्मा का मानना है कि भारत की आर्थिक वृद्धि 'अत्यंत नाजुक' दौर में है और इसे अभी पूरा समर्थन देने की जरूरत है। वर्मा ने कहा कि निजी खपत और पूंजी निवेश ने अब तक रफ्तार नहीं पकड़ी है, ऐसे में अर्थव्यवस्था की आर्थिक वृद्धि कमजोर बनी हुई है।हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत के सामने मंदी का जोखिम नहीं है।
उन्होंने कहा कि वास्तव में भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन अन्य बड़े देशों से बेहतर है। भारतीय प्रबंध संस्थान-अहमदाबाद (आइआइएम) के प्रोफेसर वर्मा ने कहा कि अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में चार इंजन काम करते हैं। इनमें से दो इंजन निर्यात और सरकार के खर्च ने महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद की, लेकिन अब अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दो अन्य इंजनों को निभानी होगी।
इन चार क्षेत्रों में वृद्धि जरूरी
उन्होंने कहा, 'मैं अर्थव्यवस्था की वृद्धि के चार इंजन के बारे में सोचता हूं। ये हैं- निर्यात, सरकारी खर्च, पूंजी निवेश और निजी उपभोग।' वर्मा ने कहा, 'वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती की वजह से निर्यात वृद्धि का मुख्य कारक नहीं रह सकता। वहीं सरकार का खर्च भी राजकोषीय दिक्कतों की वजह से सीमित है।'
निजी उपभोग में तेजी जारी
एमपीसी के सदस्य ने कहा कि विशेषज्ञ काफी समय से इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि निजी निवेश रफ्तार पकड़े। हालांकि, भविष्य की वृद्धि संभावनाओं को लेकर ¨चिंता की वजह से पूंजी निवेश प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा, 'महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या आगामी महीनों में दबी मांग ठंडी पड़ने के बाद चौथे इंजन यानी निजी उपभोग की तेजी जारी रहेगी।' उन्होंने कहा, 'इन स्थितियों को देखते हुए मुझे आशंका है कि आर्थिक वृद्धि अत्यंत नाजुक स्थिति में है और इसे सभी तरह के समर्थन की जरूरत है।'
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