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    चावल में चीन की बादशाहत खत्म! खाद रुकने के बावजूद रिकॉर्ड उत्पादन का ताइवान कनेक्शन सुन ड्रैगन को लगेगी मिर्ची

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 09:54 PM (IST)

    भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ते हुए 15.18 करोड़ टन के साथ विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक बनने का कीर्तिमान स्थापित किया है। केंद्रीय कृषि मंत् ...और पढ़ें

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    चीन की खाद नीति पर भारत की खेती ने दिया जवाब, चावल उत्पादन में नया कीर्तिमान, भारत बना दुनिया का नंबर-1 उत्पादक।

    नई दिल्ली। यदि चीन को यह उम्मीद रही होगी कि खाद की आपूर्ति में रुकावट डालकर वह भारतीय कृषि को कमजोर कर देगा, तो हालिया आंकड़े उसके लिए निराशाजनक हैं। तमाम खाद कमी की आशंकाओं के बीच भारत ने चावल उत्पादन में ऐतिहासिक रिकॉर्ड कायम करते हुए चीन को पीछे छोड़ दिया है। कुल 15.18 करोड़ टन उत्पादन के साथ भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बन गया है, जबकि चीन का उत्पादन लगभग 14.5 करोड़ टन रहा है।

    इस उपलब्धि की जानकारी केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने रविवार को दी। राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने 25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्में जारी कीं, जिन्हें इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (ICAR) ने विकसित किया है।

    बीज, विज्ञान और नीति का मेल

    कृषि मंत्री ने कहा कि नई किस्में अधिक उपज देने वाली और जलवायु-अनुकूल हैं, जिससे उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में इजाफा होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ये बीज जल्द से जल्द किसानों तक पहुंचें। उन्होंने बताया कि वर्ष 1969 में फसल किस्मों की अधिसूचना प्रक्रिया शुरू होने के बाद से अब तक 7,205 किस्में अधिसूचित की जा चुकी हैं। इनमें से 3,236 किस्मों को मौजूदा सरकार के कार्यकाल में मंजूरी मिली है। मंत्री के अनुसार, भारत आज न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी चावल की आपूर्ति कर रहा है।

     

    खाद्यान्न संकट से वैश्विक खाद्य प्रदाता तक

    कृषि मंत्री ने कहा कि भारत ने लंबे समय पहले भोजन की कमी से जूझने वाले देश से निकलकर वैश्विक खाद्य प्रदाता का सफर तय किया है। देश के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार हैं, जिससे खाद्य सुरक्षा मजबूत बनी हुई है।

    चीन के दुश्मन ताइवान से क्या है कनेक्शन?

    भारत के चावल उत्पादन में आज दिख रही मजबूती के पीछे इतिहास का एक अहम अध्याय भी जुड़ा है। 1960 के दशक में जब भारत गंभीर खाद्यान्न संकट से जूझ रहा था, तब पारंपरिक लंबी तने वाली धान किस्मों से प्रति हेक्टेयर उत्पादन बेहद कम करीब 800 किलोग्राम था। उस दौर में यूरिया जैसे रासायनिक उर्वरक उपलब्ध तो थे, लेकिन लंबा और कमजोर तना होने के कारण भारतीय किस्में ज्यादा खाद और पानी का भार नहीं सह पाती थीं और फसल गिर जाती थी। समाधान के लिए अर्ध-बौनी, मजबूत तने वाली किस्मों की जरूरत थी।

    यहीं से ताइवान (Taiwan) की भूमिका शुरू होती है। ताइवान ने भारत को ताइचुंग नेटिव-1 (TN-1) नाम की बौनी धान किस्म उपलब्ध कराई। यह किस्म अधिक खाद और पानी का बेहतर उपयोग कर पाती थी और यहीं से भारतीय कृषि में हरित क्रांति को नई दिशा मिली। TN-1 को दुनिया की पहली अर्ध-बौनी चावल किस्मों में गिना जाता है।

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