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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 22, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

WTO में भारत का मजबूत स्टैंड, गेहूं और चावल निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का किया बचाव

By Siddharth PriyadarshiEdited By:
Published: Thu, 22 Sep 2022 01:28 PM (IST)Updated: Thu, 22 Sep 2022 01:40 PM (IST)

विश्व व्यापार संगठन में भारत ने गेहूं और चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के अपने फैसले का बचाव किया ...और पढ़ें

India's strong stand at WTO, defends its decision to ban rice, wheat exports
India's strong stand at WTO, defends its decision to ban rice, wheat exports

नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) की बैठक में गेहूं (Wheat) और चावल (Rice) के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के अपने फैसले का बचाव किया है। कुछ सदस्य देशों द्वारा चावल और गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर चिंता जताने के बाद भारत ने यह स्टैंड दिखाया है।

पिछले हफ्ते जिनेवा में एक बैठक में अमेरिका और यूरोपीय संघ ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे वैश्विक बाजारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

मई में भारत ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी थी। इस महीने भारत ने टूटे चावल के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा दिया। इसके अलावा मौजूदा खरीफ सीजन में धान की फसल के रकबे में गिरावट के बीच घरेलू आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिए गैर-बासमती चावल पर 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगा दिया था।

घरेलू बाजार को देखते हुए लिया गया फैसला

फैसले का बचाव करते हुए भारत ने स्पष्ट किया कि टूटे हुए चावल के निर्यात पर प्रतिबंध घरेलू बाजार को देखते हुए लगाया गया था। इस चावल का सबसे अधिक उपयोग पोल्ट्री फीड में किया जाता है। हाल के महीनों में अनाज के निर्यात में जबरदस्त वृद्धि देखी गई थी। इससे घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ता गया।

भारत ने कहा कि गेहूं के मामले में खाद्य सुरक्षा चिंताओं के कारण निर्यात पर अंकुश लगाना आवश्यक हो गया। भारत ने यह भी कहा है कि ये उपाय अस्थायी हैं और इन पर लगातार निगरानी की जा रही है। एक अधिकारी ने बताया कि भारत के टूटे चावल के एक प्रमुख आयातक सेनेगल ने भारत से खाद्य पर्याप्तता सुनिश्चित करने के लिए इस कठिन समय में व्यापार को खुला रखने का आग्रह किया।

डब्लयूटीओ के पीस क्लॉज का इस्तेमाल

बैठक में थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया, उरुग्वे, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राजील, न्यूजीलैंड, पराग्वे और जापान ने व्यापार विवादों से बचने के लिए खाद्य कार्यक्रमों के संबंध में भारत के साथ परामर्श करने का अनुरोध किया। आपको बता दें कि अप्रैल में भारत ने तीसरी बार, चावल किसानों को दिए जाने वाले समर्थन मूल्य पर डब्ल्यूटीओ पीस क्लॉज का इस्तेमाल किया है। भारत ने विश्व व्यापार संगठन को सूचित किया कि उसने अपनी गरीब आबादी की घरेलू खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए मार्केटिंग ईयर 2020-21 के लिए चावल किसानों को अतिरिक्त सहायता प्रदान करने के लिए विश्व व्यापार संगठन के पीस क्लॉज का उपयोग किया है।

आपको बता दें कि विश्व व्यापार संगठन के ज्यादातर सदस्य देश विवाद निपटान मंच पर किसी विकासशील राष्ट्र द्वारा दी गई निर्धारित सब्सिडी सीमा में किसी भी उल्लंघन को चुनौती देने से बचते हैं। निर्धारित सीमा से अधिक सब्सिडी को ट्रेड प्रैक्टिस के खिलाफ माना जाता है। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह सीमा खाद्य उत्पादन मूल्य का 10 प्रतिशत तय की गई है। भारत ने इस मुद्दे का स्थायी समाधान खोजने के लिए पुरजोर वकालत की है, लेकिन अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है।

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