नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर ने कहा है कि वैश्विक बाजारों में उथलपुथल का माहौल है और उसके असर से हम भी अछूते नहीं है। यहां FIBAC कांफ्रेंस में उन्होंने कहा भारत में मंदी से निपटने की क्षमता है और जब वैश्विक बाजारों की उथलपुथल शांत होगी तो भारत निवेश का सबसे बेहतर विकल्प बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था किस दिशा में जाएगी इसकी भविष्यवाणी तो नहीं कर सकते, लेकिन यह निश्चित है कि भारत दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में है। राजन ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में अगले एक-दो सालों तक गिरावट का रूख बना रहेगा।

उन्होंने कहा कि यह केंद्रीय बैंक के लिए ग्रोथ बरकरार रखने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आपूर्ति के हिसाब से मांग को सुनिश्चित करे ताकि मुद्रास्फिति काबू में रहे। राजन ने कहा कि अगर सरकार प्रभावी फूड मैनेजमेंट के जरिए कमोडिटी की कीमतों को काबू में रखती है तो आरबीआई को भी ब्याज दरें घटाने में मदद मिलेगी। हमें ब्याज दरों का निर्धारण करने से पहले देखना होगा कि आज से अगले एक सालों में मुद्रास्फिति किस स्तर पर बना रहेगा। उन्होंने कहा कि आरबीआई स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अगर अच्छे संकेत मिलते हैं तो ब्याज दरों में कटौती की जाएगी। उन्होंने माना की कंजूमर इंडेक्स में तेज गिरावट देखी गई है, लेकिन उन्होंने कहा कि लोगों में मुद्रास्फिति की दर के और घटने की उम्मीद है। इसलिए फिलहाल वे ब्याज दरों में कटौती नहीं करने जा रहे हैं।

राजन ने सरकार और आरबीआई के बीच जारी मतभेद (खासकर ब्याज दरों में कटौती को लेकर) के बारे में कहा कि यह आधारहीन बातें है और हम सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने रुपये के अवमूल्यन पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हमारे पास 380 बिलियन यूएस डॉलर का रिजर्व है और जरुरत पड़ने पर हम इसका उपयोग करेंगे।

राजन ने कहा कि चीनी मुद्रा युआन और यूरोपिय मुद्रा यूरो के मुकाबले रुपया मजबूत हुआ है और आरबीआई के पास किसी भी गंभीर स्थिति से निपटने की पर्याप्त मात्रा में विदेशी मुद्रा भंडार है।

बिजनेस सेक्शन की अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें

Posted By: Shashi Bhushan Kumar