Moonlighting पर कितना लगता टैक्स? पेशेवर और वेतनभोगी लोगों के लिए अलग-अलग हैं नियम, जानें पूरी डिटेल
Moonlighting करने पर आय अधिक होने के कारण आपको अधिक टैक्स भरना पड़ना सकता है। मूनलाइटिंग करते समय टैक्स के नियमों को भी अच्छे से जान लेना चाहिए जिससे आप भविष्य की किसी भी परेशानी से बच सके।
नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। मूनलाइटिंग (Moonlighting) पर इस समय देश में चर्चा गरम है। मूनलाइटिंग में कर्मचारी एक जॉब के साथ बिना अपने पहले नियोक्ता को बताए दूसरी नौकरी करता है। एक साथ दो नौकरी करने के कारण व्यक्ति की आय बढ़ जाती है। ऐसे में मूनलाइटिंग करते समय एक नौकरीपेशा को कर देनदारी का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए, जिससे वह भविष्य में होने वाली किसी भी टैक्स से जुड़ी समस्या को टाल सके।
मूनलाइटिंग को लेकर कंपनियों ने भी सख्त रुख अपनाया हुआ है। हाल ही में देश की बड़ी आईटी कंपनी विप्रो ने मूनलाइटिंग के चलते 300 कर्मचारियों को जॉब से निकाल दिया था। इंफोसिस भी इसे लेकर अपने कर्मचारियों को चेतावनी दे चुकी है।
मूनलाइटिंग पर टैक्स
अगर आप भी मूनलाइटिंग से होने वाली आय सैलरी के रूप में प्राप्त कर रहे हैं, तो दोनों नियोक्ताओं की ओर से कर की कैलकुलेशन करते समय 50,000 रुपये की स्टैंडर्ड कटौती और 80सी के तहत 1,50,000 रुपये की कटौती की जाती है। इसके अतिरिक्त कंपनियों की ओर से कर्मचारियों का टैक्स स्लैब निर्धारित कर टैक्स का कैलकुलेशन किया जाता है। इसी आधार पर कंपनियों की ओर से टीडीएस भी काटा जाता है, जो कि टैक्सपेयर की कुल देनदारी से कम होता है।
पेशे से होने वाली आय पर टैक्स
अगर आपको मूनलाइटिंग के जरिए कोई प्रोफेशनल फीस मिली है,तो आप एक टैक्सपेयर के तौर पर इससे होने वाली आय को प्राप्त करने के लिए होने वाले खर्चों को लेकर भी इनकम टैक्स में छूट का दावा कर सकते हैं। इसमें मीटिंग पर होने वाले खर्च, आने-जाने का खर्च और लैपटॉप पर डिप्रीशिएशन को जाता है।
इसके अलावा इनकम टैक्स की धारा 44 एडीए के तहत आप कुछ पेशों में आप अपनी प्रोफेशनल फीस के 50 प्रतिशत पर हिस्से पर इनकम टैक्स में छूट का दावा कर सकते हैं। इनकम टैक्स की धारा 44 एडीए में माना जाता है कि आपने अपनी कुल प्रोफेशनल फीस का 50 प्रतिशत हिस्सा उस आय को कमाने के लिए खर्च किया है। हालांकि इसका लाभ पाने के लिए कुल फीस 50 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए।
कितना लगेगा टैक्स ?
उदाहरण के लिए एक्स नाम का व्यक्ति 14 लाख रुपये का वेतन ए नियोक्ता से लेता है। उसे स्टैंडर्ड कटौती और 80सी के तहत मिलने वाले लाभ को मिलाकर 12 लाख रुपये की आय टैक्सेबल होती है। इस पर नियोक्ता की ओर से 1,79,400 रुपये टीडीएस की कटौती की जाती है। इसके साथ एक्स 9 लाख रुपये की पेशेवर फीस एक अन्य कंपनी से लेता है और उस कंपनी की ओर से 10 प्रतिशत टीडीएस काटा जाता है।
एक्स पुरानी टैक्स प्रणाली का चयन करता है। धारा 44 एडीए के तहत पेशेवर फीस पर 50 प्रतिशत की कटौती के बाद कुल आय 16,50,000 (12 लाख + 4.5 लाख) रुपये हो जाती है। ऐसे में आप पर कुल 3,19,800 रुपये की टैक्स देनदारी बनती है। इसमें से 2,69,400 टीडीएस के रूप में पहले ही काटे जा चुके हैं। एक्स को कुल 50,400 टैक्स का भुगतान करना है।
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