न्यूयॉर्क। वॉट्स एप्प का अधिग्रहण करने वाला फेसबुक खुद को खुशकिस्मत मान रहा है। ऐसा नहीं है कि अकेले फेसबुक ही इस मैसेजिंग एप्लिकेशन को खरीदना चाहता था। फेसबुक से पहले गूगल ने वॉट्स एप्प को खरीदने के लिए 10 अरब डॉलर का ऑफर दिया था। लेकिन फेसबुक ने इसकी कीमत 19 अरब डॉलर लगाई और सौदा पक्का कर लिया। गूगल ने पूरी कोशिश की थी कि फेसबुक और वॉट्स एप्प का मिलन न हो लेकिन वह थक गया और हार भी गया।

फॉ‌र्च्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल ने वॉट्स एप्प को खरीदने के लिए आखिर दम तक कोशिश की और उसे 19 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम देने की पेशकश की। लेकिन कंपनी के को-फाउंडर्स जेन कूम और ब्रायन ने इसे सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि उन्हें लगा कि गूगल सिर्फ फेसबुक को इस सौदे से दूर रखने के लिए ऐसा कर रही है।

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रिपोर्ट की मानें तो जब गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लैरी पेज को यह खबर लगी कि फेसबुक वॉट्स एप्प को खरीदने जा रही है तो वह तुरंत वॉट्स एप्प के मालिकों से मिलने चले गए और उनसे कहा कि वह फेसबुक से दूर रहें क्योंकि फेसबुक को वॉट्स एप्प से कड़ी चुनौती मिल रही है। ऐसे में उनका अलग रहना कारोबारी नजरिए से वॉट्स एप्प के लिए फायदेमंद रहेगा। उन्होंने वॉट्स एप्प के संस्थापकों को समझाया कि वह अकेले रहे जैसा कि वह हमेशा रहना चाहते थे।

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ऐसा माना जा रहा है कि जेन कूम ने गूगल की पेशकश शायद इसलिए भी ठुकराई क्योंकि गूगल उन्हें अपने बोर्ड में सदस्य के रूप में शामिल करने के लिए तैयार नहीं थी, जबकि फेसबुक ने यह ऑफर उन्हें पहले ही दे दिया था।

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बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि गूगल और फेसबुक के लिए लड़ाई में वॉट्स एप्प का फायदा हो गया। दोनों ही वेबसाइट्स को यह पता है कि मोबाइल एप्लिकेशन आने वाला भविष्य है। इसलिए वॉट्स एप्प का अधिग्रहण दोनों के लिए जरूरी हो गया था।

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