नई दिल्ली [जाब्यू]। अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीदों को धता बताते हुए नवंबर, 2013 में कारखानों में उत्पादन लुढ़क गया। इससे देश में औद्योगिक मंदी फिर लौटने का खतरा पैदा हो गया है। इस दौरान मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में तेज गिरावट के कारण औद्योगिक उत्पादन 2.1 फीसद घट गया। यह पिछले छह महीने में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक [आइआइपी] में सबसे तेज गिरावट है। इससे पहले मई, 2013 में औद्योगिक उत्पादन में ढाई फीसद की कमी दर्ज की गई थी।

औद्योगिक उत्पादन में तेज गिरावट को देखते हुए उद्योग जगत ने रिजर्व बैंक [आरबीआइ] पर ब्याज दरों में कमी का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। औद्योगिक उत्पादन में कमी की प्रमुख वजह कंज्यूमर ड्यूरेबल उत्पादों की मांग में तेज गिरावट रही है। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में नवंबर, 2013 में 3.5 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है। एक साल पहले इस क्षेत्र में गिरावट की दर एक फीसद से भी कम थी।

गैस के ज्यादा दाम पाने को रिलायंस ने बढ़ाया उत्पादन

देश के औद्योगिक उत्पादन में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की हिस्सेदारी 75 फीसद की है। सबसे तेज गिरावट कंज्यूमर ड्यूरेबल क्षेत्र में रही है। टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन जैसे उत्पादों के उत्पादन में इस महीने 21.5 फीसद की कमी हुई है। इसके अलावा अन्य कंज्यूमर उत्पादों का उत्पादन भी 8.7 फीसद घटा है। इसके विपरीत खनन और बिजली क्षेत्र के उत्पादन में वृद्धि हुई है। कैपिटल गुड्स क्षेत्र का उत्पादन भी नवंबर 2013 में मामूली 0.3 फीसद की दर से बढ़ा है। लेकिन मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में आई गिरावट ने अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों पर भी असर डालने के संकेत दिए हैं।

नए कानूनों से खुश हुआ उद्योग जगत

इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद [ईईपीसी] के चेयरमैन अनुपम शाह के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में गिरावट का रुख बना रहता है तो आगे चलकर इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात की रफ्तार भी प्रभावित होगी। प्रमुख उद्योग चैंबर सीआइआइ ने भी मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के उत्पादन में कमी पर चिंता जताई है।

चैंबर के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी के मुताबिक अमेरिका और यूरोप में अर्थव्यवस्था के हालात में सुधार को देखते हुए मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में गिरावट का रुख बेहद चिंताजनक है। चैंबर ने 28 जनवरी को होने वाली आरबीआइ रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की समीक्षा में ब्याज दरों में अनुकूल बदलाव की जरूरत बताई है।

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