सुरेंद्र प्रसाद सिंह, नई दिल्ली : पाम की घरेलू खेती को मिल रहे प्रोत्साहन से पाम आयल के आयात में 30 प्रतिशत तक की कटौती हो सकती है। दरअसल, सरकार ने पाम खेती को बढ़ाने के लिए नेशनल आयल मिशन की शुरुआत की है, जिसके लिए 11 हजार करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। इसमें केंद्र की हिस्सेदारी 8844 करोड़ रुपये होगी। मिशन की सफलता से वर्ष 2030 तक 28 लाख टन अतिरिक्त पाम आयल का वार्षिक घरेलू उत्पादन होने लगेगा। कृषि मंत्रालय के आंकड़े के मुताबिक फिलहाल 3.5 लाख टन हेक्टेयर रकबा में पाम के बागान है। जबकि नेशनल आयल मिशन के तहत वर्ष 2025-26 तक अतिरिक्त 6.5 लाख हेक्टेयर में पाम की खेती का रकबा बढ़ाया जाना है। मिशन की शुरुआत पिछले वर्ष हुई थी।

56 प्रतिशत से अधिक खाद्य मंज आयात करता है भारत

भारत खाद्य तेलों की सालाना अपनी कुल खपत का 56 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। आयातित कुल खाद्य तेलों में अकेले पाम आयल की हिस्सेदारी 80 लाख टन होती है। जबकि पाम आयल का घरेलू उत्पादन मात्र पांच लाख टन ही होता है। नेशनल आयल मिशन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2030 तक हमारा घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, जिससे 25 से 30 फीसद तक पाम आयल का आयात घटेगा।

मिशन के तहत अगले दो तीन वर्षों के दौरान पूर्वी तटीय राज्य आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, असम, त्रिपुरा और मिजोरम में पाम की खेती का रकबा बढ़ जाएगा। इन राज्यों में पाम के जो पौधे लगाए जा रहे हैं, उन्हें फल देने में चार से पांच वर्ष लग सकते हैं। खाद्य तेल का घरेलू उत्पादन कुल जरूरत का 44 प्रतिशत हो रहा है। कुल घरेलू उत्पादन में सर्वाधिक 40 प्रतिशत सरसों, 24 प्रतिशत सोयाबीन और सात प्रतिशत मूंगफली की हिस्सेदारी है।

निजी क्षेत्र की कंपनियां निभा रहीं प्रमुख भूमिका

मिशन के इस अभियान में निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां गोदरेज, एग्रोवेट, पतंजलि फूड्स और 3एफ आयल पाम एग्रोटेक इंडस्ट्रीज प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। मिशन में सालाना 11 हजार हेक्टेयर में पाम आयल के पौधे लगाए जा रहे हैं। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, असम, तमिलनाडु और ओडिशा में गोदरेज एग्रोवेट सक्रिय है। जबकि त्रिपुरा राज्य सरकार ने मिशन के तहत ही पातंजलि फूड्स से पाम खेती के लिए समझौता किया है। हैदराबाद स्थित 3एफ आयल पाम ने अपना कामकाज असम और अरुणाचल में बढ़ाया है।

Edited By: Praveen Prasad Singh