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क्या ऑफिस जॉब वालों से अच्छा कमाते हैं डिलीवरी बॉय? सैलरी और टिप से हुई कमाई का जोमैटो CEO ने दिया हिसाब

Published: Sat, 03 Jan 2026 10:23 AM (GMT+05:30)

जोमैटो के सीईओ दीपेन्द्र गोयल (Deepinder Goyal) ने गिग वर्कर्स की प्रति घंटे की कमाई (Hourly pay gig workers) का ...और पढ़ें

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HighLights

  1. ज़ोमैटो पार्टनर्स की औसत प्रति घंटा कमाई ₹102।

नई दिल्ली। देश में गिग इकॉनमी, खासकर फूड और क्विक-कॉमर्स डिलीवरी से जुड़े कामगारों की कमाई, सुरक्षा और कामकाजी हालात को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी बीच दीपेंद्र गोयल (Deepinder Goyal) जो जोमैटो (Zomato) और ब्लिकिंट (Blinkit) की पैरेंट कंपनी ईटरनल के सीईओ हैं, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर विस्तृत डेटा साझा कर डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई और काम के पैटर्न पर सफाई दी है।

डिलीवरी पार्टनर्स की प्रति घंटा कितनी कमाई है?

गोयल के अनुसार, 2025 में ज़ोमैटो के डिलीवरी पार्टनर्स की औसत प्रति घंटा कमाई (EPH) ₹102 रही, जो 2024 के ₹92 के मुकाबले 11 प्रतिशत अधिक है। यह आंकड़ा टिप्स को छोड़कर कुल लॉग-इन समय के आधार पर निकाला गया है, जिसमें ऑर्डर का इंतजार करने का समय भी शामिल है। उनका कहना है कि केवल ''पीक ऑवर्स'' की कमाई को आधार बनाना वास्तविक आय को सही तरीके से नहीं दिखाता।

गिगवर्कर्स की मंथली कितनी कमाई?

गोयल के अनुमान के मुताबिक, अगर कोई डिलीवरी पार्टनर महीने में 26 दिन और रोज 10 घंटे काम करता है, तो उसकी ग्रॉस मासिक आय लगभग ₹26,500 हो सकती है। ईंधन और वाहन रखरखाव जैसे खर्च (करीब 20%) घटाने के बाद नेट कमाई लगभग ₹21,000 बैठती है।

टिप्स और अतिरिक्त आय पर क्या तस्वीर है?

डेटा के अनुसार, 2025 में जोमैटो पर औसतन ₹2.6 प्रति घंटा टिप्स मिले, जो 2024 में ₹2.4 थे। जोमैटो पर करीब 5% ऑर्डर्स और ब्लिंकिट पर 2.5% ऑर्डर्स में ग्राहकों द्वारा टिप दी जाती है। गोयल ने स्पष्ट किया कि टिप्स का 100% हिस्सा डिलीवरी पार्टनर को मिलता है, इसमें प्लेटफॉर्म की कोई कटौती नहीं होती।

काम के घंटे और लचीलापन: फुल-टाइम या पार्ट-टाइम?

गोयल के मुताबिक, अधिकतर डिलीवरी पार्टनर्स प्लेटफॉर्म का उपयोग पार्ट-टाइम करते हैं। 2025 में औसतन एक पार्टनर ने साल में 38 दिन काम किया जिसमें हर कामकाजी दिन लगभग 7 घंटे लॉग-इन रहा। सिर्फ 2.3% पार्टनर्स ऐसे थे जिन्होंने साल में 250 दिन से ज़्यादा काम किया है।

उनका कहना है कि डिलीवरी पार्टनर्स पर न तो तय शिफ्ट होती है और न ही तय इलाका। वे अपनी सुविधा से लॉग-इन/लॉग-आउट करते हैं और काम का क्षेत्र चुनते हैं।

 

10 मिनट डिलीवरी: क्या इससे तेज चलाने का दबाव पड़ता है?

क्विक कॉमर्स और 10 मिनट डिलीवरी को लेकर सुरक्षा चिंताओं पर गोयल ने कहा कि इस तरह के वादे डिलीवरी पार्टनर्स पर तेज चलाने का दबाव नहीं डालते। उनके मुताबिक ब्लिंकिट पर 2025 में औसत डिलीवरी दूरी 2.03 किमी रही औसत ड्राइविंग समय करीब 8 मिनट, यानी गति लगभग 16 किमी/घंटा रहा। जोमैटो पर औसत गति करीब 21 किमी/घंटा रही है।

गोयल का दावा है कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर औसत रफ्तार लगभग समान है और 10 मिनट या लंबे डिलीवरी समय का फर्क लॉजिस्टिक्स और स्टोर डेंसिटी की वजह से है, न कि राइडिंग यह बिहेवियर की वजह से है।

सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर क्या किया जा रहा है?

सोशल सिक्योरिटी को लेकर गोयल ने बताया कि 2025 में जोमैटो और ब्लिंकिट ने डिलीवरी पार्टनर्स के लिए ₹100 करोड़ से अधिक खर्च किए। जिसमें

  • ₹10 लाख तक का दुर्घटना बीमा
  • ₹1 लाख का मेडिकल कवर + OPD
  • ₹50,000 तक लॉस-ऑफ-पे इंश्योरेंस
  • ₹40,000 तक मातृत्व लाभ शामिल है।

इसके अलावा टैक्स फाइलिंग सपोर्ट, गिग-लिंक्ड नेशनल पेंशन स्कीम, महिला पार्टनर्स के लिए रेस्ट डे और SOS इमरजेंसी सर्विस जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं।

बहस क्यों तेज हुई?

31 दिसंबर को प्रस्तावित गिग वर्कर स्ट्राइक और सोशल मीडिया पर उठी आवाज़ों के बाद डिलीवरी वर्कर्स की मज़दूरी, 10 मिनट डिलीवरी का दबाव और सड़क सुरक्षा जैसे मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। गोयल द्वारा साझा किया गया यह डेटा उसी बहस के बीच प्लेटफॉर्म का पक्ष रखने की कोशिश माना जा रहा है।

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