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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 23, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Tata Trusts से आई बड़ी खबर, मेहली मिस्त्री को आजीवन ट्रस्टी के रूप में फिर से नियुक्त करने की पहल शुरू

Published: Thu, 23 Oct 2025 06:31 PM (IST)

Tata Trusts: टाटा ट्रस्ट्स ने मेहली मिस्त्री को अपने तीन प्रमुख परोपकारी निकायों के लिए फिर से ट्रस्टी नियुक्त करने ...और पढ़ें

Tata Trusts से आई बड़ी खबर, मेहली मिस्त्री को आजीवन ट्रस्टी के रूप में फिर से नियुक्त करने की पहल शुरू

Tata Trusts से आई बड़ी खबर, मेहली मिस्त्री को आजीवन ट्रस्टी के रूप में फिर से नियुक्त करने की पहल शुरू

नई दिल्ली, पीटीआई। Tata Trusts: टाटा ट्रस्ट्स से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार टाटा ट्रस्ट्स ने अपने तीन प्रमुख परोपकारी निकायों के लिए मेहली मिस्त्री को फिर से ट्रस्टी नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम से वह आजीवन ट्रस्टी बन जाएंगे। इस घटनाक्रम से परिचित लोगों ने यह जानकारी दी।

टाटा ट्रस्ट्स के CEO द्वारा गुरुवार को अन्य ट्रस्टियों को जारी किए गए इस सर्कुलर में मिस्त्री को सर रतन टाटा ट्रस्ट, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन में फिर से नियुक्त करने की मांग की गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब संगठन में आंतरिक मतभेदों की खबरें आ रही हैं।

पूर्व दिग्गज रतन टाटा के करीबी मिस्त्री को पहली बार 2022 में टाटा ट्रस्ट्स में नियुक्त किया गया था। उनका तीन साल का कार्यकाल 28 अक्टूबर को समाप्त हो रहा है।

संपर्क करने पर, टाटा ट्रस्ट्स ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इस सप्ताह की शुरुआत में, टाटा ट्रस्ट्स ने सर्वसम्मति से वेणु श्रीनिवासन को आजीवन ट्रस्टी के रूप में फिर से नियुक्त किया था, और अब ध्यान मिस्त्री के नवीनीकरण से संबंधित आगामी निर्णय पर केंद्रित है।

सूत्रों के अनुसार, मिस्त्री ने तीन अन्य ट्रस्टियों प्रमित झावेरी, जहांगीर एच.सी. जहांगीर और डेरियस खंबाटा के साथ मिलकर श्रीनिवासन की टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी और उपाध्यक्ष के रूप में पुनर्नियुक्ति को मंजूरी देते हुए यह शर्त रखी थी कि भविष्य में ट्रस्टियों के सभी नवीनीकरण सर्वसम्मति से स्वीकृत किए जाएंगे, अन्यथा उनकी मंजूरी वापस ले ली जाएगी।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब इस बात पर राय विभाजित है कि क्या मिस्त्री का कार्यकाल स्वतः ही जारी रहेगा या आजीवन कार्यकाल के लिए ट्रस्टियों की सर्वसम्मति से अनुमोदन की आवश्यकता होगी।

कथित तौर पर, टाटा ट्रस्ट्स के भीतर एक सीधा विभाजन है एक गुट नोएल टाटा के साथ जुड़ा हुआ बताया जाता है, जिन्होंने रतन टाटा के निधन के बाद अध्यक्ष का पद संभाला था, और दूसरा गुट पूर्व दिग्गज के वफादारों से बना है।

यह मामला सरकार तक पहुंच गया था और टाटा समूह के शीर्ष अधिकारियों, जिनमें टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा और टाटा संस के अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन शामिल थे, ने इस महीने की शुरुआत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की थी।

टाटा ट्रस्ट्स, जो सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट सहित कई धर्मार्थ ट्रस्टों की देखरेख करने वाली एक प्रमुख संस्था है, की टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। टाटा संस 156 साल पुराने टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है, जिसमें 30 सूचीबद्ध संस्थाओं सहित लगभग 400 कंपनियां शामिल हैं।

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