8th Pay commission: सैलरी हाइक से ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की चर्चा क्यों, ये कैसे होता है तय? आसान शब्दों में समझिए
8th Pay commission: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर की भूमिका महत्वपूर्ण है। डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने ब ...और पढ़ें

8th pay commission: सैलरी हाइक से ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की चर्चा क्यों, ये कैसे होता है तय? आसान शब्दों में समझिए
नई दिल्ली| केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच इन दिनों एक ही सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है कि आठवां वेतन आयोग (8th pay commission) कब लागू होगा और बढ़ी हुई सैलरी (Salary Hike 2026) कब से आएगी? लेकिन इस पूरी बहस का सबसे अहम पॉइंट है फिटमेंट फैक्टर (8th pay commission Fitment Factor) क्योंकि यही तय करता है कि मौजूदा वेतन कितना बढ़ेगा। यही वजह है कि हर कर्मचारी जानना चाहता है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर कितना हो सकता है और सरकार इसे आखिर किस आधार पर तय करती है।
अफवाहों और कयासों के बीच जागरण बिजनेस ने ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल (Manjeet Singh Patel) से बात की। उन्होंने फिटमेंट फैक्टर की पूरी गणना को आसान भाषा में समझाया, ताकि कर्मचारियों को सही तस्वीर मिल सके।
फिटमेंट फैक्टर क्या होता है? (What is fitment factor?)
डॉ. मंजीत पटेल बताते हैं कि फिटमेंट फैक्टर एक मल्टीप्लायर होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा कर नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। जितना ज्यादा फिटमेंट फैक्टर, उतनी ज्यादा सैलरी और पेंशन।
फिटमेंट फैक्टर कैसे काम करता है? कैलकुलेशन से समझें (How will the fitment factor increase the salary?)
अगर किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी 18,000 रुपए है और फिटमेंट फैक्टर 2.64 तय होता है, तो:
- ₹18,000 × 2.64 = ₹47,250
- यानी बेसिक सैलरी सीधे बढ़कर ₹47,250 हो जाएगी।
अगर मौजूदा बेसिक सैलरी ₹50,000 है तो:
- ₹50,000 × 2.64 = ₹1,32,000
- मतलब नई बेसिक सैलरी ₹1,32,000 तक पहुंच सकती है।
इस बार फिटमेंट फैक्टर कितना हो सकता है?
डॉ. मंजीत पटेल के अनुसार, इस बार तीन फिटमेंट फैक्टर में से कोई एक लागू हो सकता है। इनमें 2.13, 2.64 और 2.80 शामिल हैं।
- 2.13 फिटमेंट फैक्टर का मतलब 'नो प्रॉफिट, नो लॉस' स्थिति है।
- 2.64 को न्यूनतम ठीक-ठाक फिटमेंट फैक्टर माना जा रहा है।
- 2.8 या उससे ऊपर तब संभव है, जब फैमिली यूनिट 3 से बढ़ाकर 5 मानी जाए।
फिटमेंट फैक्टर किन फैक्टर्स पर निर्भर करता है? (On what factors does the fitment factor depend?)
- महंगाई और जीवन-यापन की लागत
- CPI और CPI-IW के आंकड़े
- सरकार की वित्तीय स्थिति और बजट
- कुल वेतन खर्च की सीमा
- प्राइवेट सेक्टर से सैलरी की तुलना
- इंडस्ट्री सैलरी सर्वे और मार्केट बेंचमार्क
फैमिली यूनिट और खर्च की गणना... कैसे तय होता है फिटमेंट फैक्टर? (How is the fitment factor decided?)
- वेतन आयोग सबसे निचले स्तर के कर्मचारी को आधार बनाता है।
- फैमिली यूनिट: कर्मचारी + पत्नी/पति + 2 बच्चे (मौजूदा नियम), जिसे कर्मचारी को 1 यूनिट, पति/पत्नी को 1 यूनिट और दो बच्चों को आधा-आधा यूनिट माना जाता है, जो कुल मिलाकर तीन यूनिट होते हैं।
एक दिन में कितनी कैलोरी होनी चाहिए?
खाना, कपड़ा, शिक्षा, स्वास्थ्य, ट्रांसपोर्ट और न्यूनतम सामाजिक जरूरतें। इन सबका एक दिन का खर्च निकाला जाता है, फिर उसे 30 से गुणा कर महीने की न्यूनतम सैलरी तय होती है। इसके बाद उसी आधार पर ऊपर के लेवल की सैलरी तय होती है और डीए को शून्य से शुरू किया जाता है।
बढ़ी हुई सैलरी कब से आएगी?
8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से ड्यू माना जा रहा है, यानी नियमों के हिसाब से बढ़ी हुई सैलरी (8th pay commission salary hike 2026) इसी तारीख से मिलनी चाहिए। लेकिन मंजीत पटेल का कहना है कि आयोग को रिपोर्ट देने, कैबिनेट मंजूरी और लागू होने में करीब 18 से 24 महीने लग सकते हैं। ऐसे में कर्मचारियों के हाथ में बढ़ी सैलरी 1 जुलाई 2027 या 1 जनवरी 2028 से आने की पूरी संभावना है।
'सरकार चाहे तो 6-7 महीने में पूरी हो सकती है प्रक्रिया'
मंजीत पटेल (Manjeet Patel) के मुताबिक, अगर सरकार चाहे तो यह प्रक्रिया 6-7 महीने में भी पूरी हो सकती है, लेकिन अब तक के संकेत बताते हैं कि इसे चुनावी कैलेंडर से जोड़ा जा रहा है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए जुलाई 2027 से सैलरी बढ़ोतरी का ऐलान संभव माना जा रहा है। लेकिन अब सवाल यह है कि आखिर फिटमेंट फैक्टर होता क्या है और यह तय कैसे होता है? इस बारे में जानाना इसलिए भी ज्यादा जरूरी है, क्योंकि इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर की हो रही है।
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देरी से कर्मचारियों को क्या नुकसान?
अगर 50% डीए 1 जनवरी 2024 में बेसिक में मर्ज हो जाता, तो कर्मचारी दो साल से ज्यादा सैलरी पा रहे होते। देरी की वजह से लेवल-8 के कर्मचारी को 30-35 लाख रुपए तक का नुकसान हो सकता है, क्योंकि एचआरए और ट्रांसपोर्ट अलाउंस का एरियर नहीं मिलता। 8वां वेतन आयोग कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत बन सकता है, लेकिन सब कुछ फिटमेंट फैक्टर और लागू होने की तारीख पर टिका है। अब नजरें सरकार के अगले कदम और 2027 के आसपास होने वाले फैसलों पर टिकी हैं।

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