लंदन। आर्थिक मंदी के कारण विकसित देशों में बेरोजगारी के हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। पेरिस स्थित आर्थिक थिंक टैंक ओईसीडी के मुताबिक विकसित देशों में करीब 1.7 करोड़ लोगों को पिछले एक साल से कोई काम नहीं मिला है। ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलेपमेंट (ओईसीडी) ने अप्रैल-जून तिमाही के आंकड़ों के आधार पर यह रिपोर्ट जारी की है।

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इस रिपोर्ट में अमेरिका और स्पेन सहित कुल 33 देशों के बेरोजगारी के आंकड़े शामिल किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन देशों में बेरोजगार लोगों में से तीन में से एक व्यक्ति को पिछले एक साल से कोई भी काम नहीं मिला है। ओईसीडी 34 विकसित देशों का संगठन है।

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इन देशों में लंबी अवधि की बेरोजगारी बढ़कर 35.3 फीसद हो गई है जो वर्ष 2007 की अंतिम तिमाही में वित्तीय संकट पैदा होने के बाद से अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। वित्तीय संकट शुरू होने के समय कुल बेकारी में लंबी अवधि की बेरोजगारी 27 फीसद थी। वर्ष 2007 में जहां 86 लाख लोगों को एक साल से काम नहीं मिला था, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर दोगुना हो गई है। मंदी की शुरुआत होने पर कॉरपोरेट घरानों द्वारा खर्च घटाने के फैसले से बेरोजगारी में वृद्धि हुई है क्योंकि नए रोजगार के अवसर कम हुए हैं।

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अमेरिका व आइसलैंड में लंबी अवधि की बेरोजगारी में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई है। आइसलैंड में यह बेकारी 238 प्रतिशत, जबकि अमेरिका में 167 प्रतिशत बढ़ी है। इसके अलावा स्लोवाक रिपब्लिक में यह बेकारी 70.7 प्रतिशत, यूनान में 65.5 प्रतिशत, आयरलैंड में 59 प्रतिशत, इटली में 56.4 प्रतिशत, स्पेन में 49.3 प्रतिशत व एस्टोनिया में 48.5 प्रतिशत बढ़ी है।

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