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    EMI Alert: एक बैंक ने ग्राहकों को दी राहत तो दूसरे की बढ़ाया ईएमआई बोझ, IndusInd और RBL ने MCLR में किया बदलाव

    By Abhinav ShalyaEdited By: Abhinav Shalya
    Updated: Sat, 24 Jun 2023 08:45 AM (IST)

    देश के दो बड़े बैंक IndusInd Bank और RBL Bank की ओर से MCLR में बदलाव किया गया है। इंडसइंड बैंक द्वारा एमसीएलआर को 10 आधार अंक तक बढ़ाया गया है जबकि आरबीएल बैंक द्वारा एमसीएलआर की दर को 10 आधार अंक घटाया है। एमसीएलआर वह दर होती है जिसके आधार बैंक किसी लोन की ब्याज दर तय करते हैं। (जागरण फाइल फोटो)

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    इंडसइंड बैंक और आरबीएल बैंक ने MCLR की दरों में बदलाव किया है।

    नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। निजी क्षेत्र के दो बैंकों इंडसइंड बैंक और आरबीएल बैंक की ओर से कुछ चुनिंदा अवधि की एमसीएलआर की दरों में बदलाव किया गया है। इंडसइंड बैंक द्वारा एमसीएलआर में 5 आधार अंक से लेकर 10 आधार अंक तक की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, आरबीएल बैंक की ओर से एमसीएलआर को 10 आधार अंक तक कम किया गया है।

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    दोनों बैंकों की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, एमसीएलआर की दरें आज से ही लागू हो गई हैं।

    इंडसइंड बैंक (Indusind Bank)

    इंडसइंड बैंक की ओर से ओवरनाइट से लेकर तीन महीने की एमसीएलआर की दरों को 10 आधार अंक तक बढ़ाया गया है। जबकि, छह महीनों की अवधि के बेंचमार्क रेट में 5 आधार अंक की बढ़ोतरी की गई है।

    बैंक की वेबसाइट पर दी जानकारी के अनुसार, इस बढ़ोतरी के बाद ओवरनाइट एमसीएलआर 9.35 प्रतिशत, एक महीने की एमसीएलआर 9.40 प्रतिशत, तीन महीने का एमसीएलआर 9.70 प्रतिशत और छह महीने का बेंचमार्क रेट 10 प्रतिशत हो गया है।

    एक साल का एमसीएलआर 10.20 प्रतिशत, दो और तीन साल का एमसीएलआर 10.25 प्रतिशत और 10.30 प्रतिशत हो गया है।

    आरबीएल बैंक (RBL Bank)

    आरबीएल बैंक की ओर से एमसीएलआर में 10 आधार अंक की कटौती की गई है। इसके बाद ओवरनाइट का एमसीएलआर 9.25 प्रतिशत से घटकर 9.15 प्रतिशत, एक महीने और तीन महीने का एमसीएलआर 9.20 प्रतिशत और 9.50 प्रतिशत हो गया है। छह महीने और एक साल का एमसीएलआर 9.20 प्रतिशत और 10.20 प्रतिशत हो गया है।

    क्या होता है MCLR?

    MCLR का पूरा नाम मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग रेट है। इसका इस्तेमाल बैंक की ओर से ग्राहकों को किसी भी प्रकार का लोन देने के लिए बेंचमार्क रेट के रूप में किया जाता है। इसमें बढ़ोतरी या कटौती का सीधा असर ग्राहकों की ईएमआई पर पड़ता है।