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    कभी अमृत था पानी, अब छूने से डरते हैं लोग, पश्चिम चंपारण में रामरेखा नदी की हालत खराब

    By Gaurav Verma Edited By: Dharmendra Singh
    Updated: Mon, 05 Jan 2026 05:41 PM (IST)

    रामनगर में रामरेखा नदी का पानी अत्यधिक प्रदूषित हो गया है। नगर के नाले, कूड़ा-कचरा और चीनी मिल का अपशिष्ट इसमें मिलकर इसे जहरीला बना रहे हैं। कभी जीवन ...और पढ़ें

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    चीनी मिल से निकलती रामरेखा नदी । जागरण 

    संवाद सूत्र, रामनगर (पश्चिम चंपारण) । रामनगर के बीचों-बीच से होकर गुजरने वाली रामरेखा नदी का स्वरूप नगर सीमा तक पहुंचते-पहुंचते पूरी तरह बिगड़ चुका है। रतनपुरवा गांव तक नदी का पानी अपेक्षाकृत साफ और स्वच्छ रहता है, लेकिन जैसे ही यह नगर क्षेत्र में प्रवेश करती है, इसकी हालत तेजी से खराब होने लगती है।

    नगर से निकलने वाले नाले सीधे इस नदी में मिलते हैं। साथ ही लोग बेधड़क कूड़ा-कचरा और घरों से निकलने वाला मैला भी नदी में डाल देते हैं, जिससे इसका प्राकृतिक स्वरूप नष्ट हो गया है।

    पुरानी बाजार और धांगड़ टोली मोहल्ले से गुजरने के बाद चौरसिया नगर तक पहुंचते-पहुंचते रामरेखा नदी एक नाले का रूप ले लेती है। आगे चलकर हरिनगर चीनी मिल का कचरा भी इसमें बहाया जाता है। इसके कारण नदी का पानी पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है। स्थिति यह है कि अब इस नदी में कोई जलीय जीव भी नहीं बचा है और पानी किसी काम का नहीं रह गया है।

    हालांकि पीने के लिए इस पानी का उपयोग वर्षों पहले बंद हो चुका था, लेकिन अब घरेलू कार्यों, कपड़े-बर्तन धोने, नहाने और यहां तक कि खेतों की सिंचाई के लिए भी यह पानी अनुपयोगी हो गया है। नदी की यह स्थिति सिकरहना नदी में मिलने तक बनी रहती है।

    यह नदी नरकटियागंज और लौरिया क्षेत्र के कई खेतों की सिंचाई का मुख्य साधन रही है। जिन इलाकों से यह गुजरती है, वहां बोरिंग या अन्य सिंचाई साधन भी उपलब्ध नहीं हैं। बावजूद इसके, यदि कोई किसान मजबूरी में इस पानी से सिंचाई करता है तो फसल खराब हो जाती है। कभी क्षेत्र के लोगों के लिए जीवनदायिनी रही रामरेखा नदी से आज आम लोग ही नहीं, मवेशी भी दूर रहते हैं।

    नगर परिषद के तरफ से नहीं लगा वाटर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट

    नगर परिषद की ओर से वर्षों से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की बात कही जा रही है। जिससे कम से कम नदी का पानी साफ कर घरेलू उपयोग और सिंचाई के लायक बनाया जा सके। इसके लिए दो दो बार स्थल का चयन भी किया गया। लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हो सका। सूत्रों से पता चला है कि नमामि गंगे योजना के तहत होने वाला यह काम ठंडे बस्ते में चला गया है। नतीजतन नदी की हालत दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है और इसके अस्तित्व पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

    कहते हैं नगर एवं ग्रामवासी

    नगर के निवासी दीपक कुमार का कहना है कि रामरेखा नदी की हालत इतनी खराब है कि इसका पानी किसी लायक नहीं है। नगर की गंदगी और चीनी मिल का केमिकल वाला कचरा इसका बेड़ा गर्क कर दिया है। इसकी सफाई बहुत ही जरूरी है। देवराज क्षेत्र के तौहीद आलम का कहना है कि इस क्षेत्र से जब रामरेखा नदी गुजरती है तो इससे बदबू निकलती है। लोगों को अब इसके पानी से भय लगता है। लोग माल मवेशी तक को भी इसका पानी नहीं पिलाते हैं। शाहनवाज हुसैन का कहना है कि सिंचाई के लिए अगर गलती से खेतों में इस पानी का उपयोग कर दिया जाए तो, इससे सारी फसल खराब हो जाती है।


    एसटीपी योजना फिलहाल प्रक्रिया में है। मुख्यमंत्री समग्र योजना से नदी की साफ- सफाई और बेड के निर्माण को लेकर कार्य प्रक्रिया में है। निर्देश प्राप्त होते हीं नगर क्षेत्र में इस पर कार्य शुरू किया जाएगा।
    गीता देवी, सभापति, नगर परिषद रामनगर।