नए साल में शिक्षा को नई रफ्तार, बदलेगा सारण का शैक्षणिक भविष्य, 24 मॉडल स्कूलों से सुधरेगी पढ़ाई की गुणवत्ता
सारण जिले में नए साल से शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव की शुरुआत हो रही है। 24 मॉडल स्कूल विकसित किए जाएंगे, पीएम श्री और पीएम उषा योजनाओं से शैक्षणिक ...और पढ़ें

बदलेगा सारण का शैक्षणिक भविष्य
अमृतेश, छपरा(सारण)। नए साल की शुरुआत के साथ ही सारण जिले में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े और दूरगामी बदलाव की तस्वीर उभरने लगी है। स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालय तक बुनियादी ढांचे के विस्तार, आधुनिक संसाधनों, डिजिटल पढ़ाई और समावेशी शिक्षा को लेकर ठोस पहल की जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के साथ जिला प्रशासन के प्रयास मिलकर शिक्षा को नई दिशा देने की तैयारी में हैं। वर्ष 2026 को जिले में शिक्षा के कायाकल्प का वर्ष माना जा रहा है, जो आने वाले समय में सारण के भविष्य को नई पहचान देगा।
24 मॉडल स्कूलों से सुधरेगी पढ़ाई की गुणवत्ता
शिक्षा की गुणवत्ता को समान और बेहतर बनाने के उद्देश्य से जिले में 24 मॉडल स्कूल विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक प्रखंड, अनुमंडल और जिला स्तर पर एक-एक विद्यालय को मॉडल स्कूल का स्वरूप दिया जाएगा।
जिला स्तर पर राजकीय कन्या उच्च विद्यालय, अनुमंडल स्तर पर जिला स्कूल और छपरा सदर प्रखंड में काजीपुर उच्च विद्यालय को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा।
इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, आधुनिक प्रयोगशाला, समृद्ध पुस्तकालय और बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि छात्रों को आधुनिक शिक्षा का लाभ मिल सके।
पीएम श्री और पीएम उषा से बदलेगा शैक्षणिक परिदृश्य
प्रधानमंत्री श्री योजना के तहत जिले के 20 विद्यालयों को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित किया जाएगा। स्मार्ट बोर्ड, डिजिटल लर्निंग, विज्ञान प्रयोगशालाओं और खेल अधोसंरचना को मजबूत किया जाएगा।
वहीं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जयप्रकाश विश्वविद्यालय को पीएम उषा योजना के अंतर्गत 20 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। इससे विश्वविद्यालय और इससे जुड़े कॉलेजों में भवन, प्रयोगशाला और शैक्षणिक संसाधनों का विस्तार होगा। नए साल में इस योजना के कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।
223 भूमिहीन विद्यालयों को मिलेगी अपनी जमीन
सारण जिले में शिक्षा की बड़ी समस्या भूमिहीन विद्यालयों की रही है। जिले में करीब 223 ऐसे विद्यालय हैं, जिनके पास अपनी जमीन नहीं है। कई स्थानों पर एक ही भवन में तीन-तीन स्कूल टैग होकर संचालित हो रहे हैं। इस स्थिति को बदलने के लिए जिला प्रशासन ने ठोस कदम उठाए हैं।
जिलाधिकारी ने सभी अंचलाधिकारियों को भूमि चयन का निर्देश दिया है। नए साल में सभी भूमिहीन विद्यालयों को जमीन मिलने की उम्मीद है।
जिले के 165 भूमिहीन उच्च विद्यालयों के लिए 75-75 डिसमिल भूमि चिह्नित की जा रही है। भूमि दान करने वालों के नाम पर विद्यालय खोलने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है।
प्लस टू के बाद ड्रॉपआउट रोकने पर फोकस
प्लस टू के बाद छात्रों का पढ़ाई छोड़ना जिले की बड़ी चुनौती है। आंकड़ों के अनुसार 60.54 प्रतिशत छात्र उच्च शिक्षा में आगे नहीं बढ़ पाते। रोजगार की तलाश में कई छात्र बाहर चले जाते हैं, वहीं कई छात्राओं की शादी हो जाती है।
इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए मुख्यमंत्री सात निश्चय सहायता भत्ता योजना का लाभ अधिक से अधिक छात्रों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। जेपी विश्वविद्यालय के अंतर्गत बीसीए, बीबीए और शॉर्ट टर्म वोकेशनल कोर्स शुरू किए गए हैं।
सारण गुरु से डिजिटल पढ़ाई को बढ़ावा
10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए जिला प्रशासन ने ‘सारण गुरु’ के नाम से ऑनलाइन क्रैश कोर्स शुरू किया है। यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज पर विषयवार वीडियो उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
जिला स्कूल में टीचिंग स्टूडियो भी तैयार किया गया है। नए साल में इस डिजिटल पहल को और विस्तार देने की योजना है।
वंचित बच्चों के लिए आवासीय छात्रावास
अनाथ, घुमंतू और वंचित बच्चों की शिक्षा के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय बालक छात्रावास का निर्माण किया जाएगा। करीब छह करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस छात्रावास के लिए जमीन चयन अंतिम चरण में है।
इन तमाम पहलों के साथ सारण जिले में शिक्षा को नई गति मिलने की उम्मीद है। वर्ष 2026 न सिर्फ नई योजनाओं का साल होगा, बल्कि एक सुशिक्षित और सशक्त समाज की नींव रखने वाला वर्ष साबित हो सकता है।

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