सारण में हरियाली की नई इबारत... 2026 में बदलेगा पर्यावरणीय परिदृश्य
सारण जिला 2026 तक पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी बनने की ओर बढ़ रहा है। अब तक 6.5 लाख से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं या लगाए जा रहे हैं। यह अभियान सड़कों, ...और पढ़ें

प्रवीण, छपरा(सारण। सारण जिला वर्ष 2026 में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नई पहचान गढ़ने की ओर तेजी से अग्रसर है। सुनियोजित योजनाओं, विभागीय प्रयासों और जनभागीदारी के समन्वय से जिले में हरियाली को सशक्त बनाने का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। अब तक जिले में लगभग 6 लाख 56 हजार से अधिक पौधों का रोपण और वितरण किया जा चुका है या प्रक्रिया में है। यह पहल केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले की जलवायु, भू-जल स्तर और जैव विविधता को संतुलित करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में रखते हुए पौधारोपण की विस्तृत रणनीति तैयार की गई है। वर्षा काल में सड़कों के किनारे, नहरों और नदियों के तटों पर बड़े पैमाने पर पौधे लगाए जा रहे हैं।
इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में भी हरित आवरण बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य केवल पौधों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और दीर्घकालिक रूप से जीवित रहने को सुनिश्चित करना है।
बसंत काल में जिले के पथ निर्माण मार्गों के किनारे पौधारोपण कर सड़कों को हरित गलियारों में बदलने की योजना पर काम किया जा रहा है।
नहर और नदी किनारे लगाए जाने वाले पौधे बाढ़ और कटाव को कम करने में सहायक होंगे, वहीं जल स्रोतों की स्वच्छता और संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएंगे।
कृषि वानिकी योजना के तहत किसानों को पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे खेतों के आसपास हरियाली बढ़ेगी और भविष्य में किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर भी मिलेगा।
इस अभियान की सबसे मजबूत कड़ी जनभागीदारी बनकर उभरी है। “एक पेड़ मां के नाम” जैसे भावनात्मक अभियानों ने लोगों को प्रकृति से जोड़ने का कार्य किया है।
जीविका दीदियों के माध्यम से गांव-गांव तक पौधों का वितरण कर रोपण कराया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में हरियाली तेजी से फैल रही है।
सरकारी विभागों के साथ-साथ गैर सरकारी संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी ने इस मुहिम को और प्रभावी बना दिया है।
पर्यावरण संरक्षण को और मजबूत करने के उद्देश्य से वर्ष 2026 में जिले की चार प्रमुख आर्द्र भूमि (वेटलैंड) को विशेष संरक्षण के लिए चुना गया है।
यहां चयनित प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे, ताकि जल पक्षियों, जलीय जीवों और स्थानीय जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। विभागीय और निजी नर्सरियों के माध्यम से पौधों की सतत आपूर्ति भी सुनिश्चित की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन समन्वित प्रयासों से आने वाले वर्षों में सारण जिला एक हरित, स्वच्छ और पर्यावरण-संतुलित क्षेत्र के रूप में अपनी पहचान बनाएगा और यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।

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