संसू, दरियापुर : प्रखंड का विशाल व विस्तृत हरदियां चंवर कई दशकों से अपने उद्धारक का इंतजार कर रहा है। लगभग 20 किमी लंबे व 10 किमी चौड़ाई वाले इस चंवर की सूरत आखिर कब और कैसे बदलेगी। यह लोगों की समझ में नहीं आ रहा। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस चंवर की बदहाली दूर हुई तो दर्जन भर गांवों के हजारों किसानों की दशा सुधर जाएगी।

विडंबना है कि यहां के किसान को साल में सिर्फ एक फसल के लिए ही अपनी मेहनत व जमा पूंजी को दांव पर लगाना पड़ता है। बच गई तो बंपर उपज वरना, पैसे और मेहनत गए। रबी फसल भी भगवान भरोसे ही होती है । हरदियां चंवर का अधिकांश भाग साल के आठ माह तक बारिश व नदियों के जल से लबालब रहता है। इस चंवर के मध्य में बसे दो गाव मठककड़ा व मठचिलावे तो बरसात के दिनों में टापू सा दिखता है। इन दोनों गांवों की आबादी करीब 10-12 हजार है । इन लोगो के पास रहने के लिए जमीन है मगर खाने के लिए कुछ नही । खेती योग्य जमीन है भी तो साल के आठ माह पानी रहने से खेती न के बराबर होती है। साल के जुलाई से दिसंबर तक ये दोनों गांव पानी से घिर जाते हैं। रूस की साझेदारी में लगने वाला था स्टील प्लांट:

वर्ष 1970-72 में एक बार इस चंवर की बदहाली दूर होने के आसार दिखे। स्थानीय लोगों को लगा कि हमारी तकदीर संवरने वाली है। बताया जाता है कि उस वक्त सोवियत रूस के साथ साझे में भारत सरकार यहां आयरन एंड स्टील कारखाना लगाने की कोशिश कर रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार यह प्रक्रिया राजनीति की भेंट चढ़ गई। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहते यहां रेल पहिया कारखाना स्थापित करने की कवायद शुरू हुई। कारखाना के अस्तित्व में आने से दशा थोड़ी बदली। पर यहां तो बड़े व नियोजित प्रयास की जरुरत है। स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि इस चंवर में दो चार नहीं सैकड़ों कल कारखाने की स्थापना की जा सकती है।

पूर्व मुखिया राम अयोध्या राय का कहना है कि सरकार इस चंवर पर ध्यान देती तो किसानों की खेती भी अच्छी होगी। क्षेत्र के लोगो का विकास होगा। मठककड़ा निवासी मोनू गिरी का कहना है कि सरकार अगर जल निकासी का इंतजाम हो जाए तो फिर यहां के किसानों की किस्मत बदलते देर नहीं लगेगी। यहां की मिट्टी काफी उपजाउ है। उन्होंने कहा की पानी निकासी के लिए मात्र दो नाले हैं। नेहुरा नाला जो आनंदपुर सोनपुर में गंडक नदी में गिरता है तथा दूसरा महदलीचक नहर जो गंगा नदी में नयागांव में गिरता है। इतने विस्तृत चंवर के लिए केवल दो नाले पर्याप्त नहीं हैं। स्थानीय अनिल राय का कहना है कि चंवर का विकास आज तक नही हो सका। हमलोगों के लिए खरीफ फसल तो उम्मीद के बाहर है ही रबी फसल भी अक्सर बर्बाद हो जाती है।