सहरसा [कुंदन]। टॉलीवुड फिल्मों व टीवी सीरियल्स में स्थापित उल्का गुप्ता आज नित शोहरत के नए मुकाम हासिल कर रही हैं। टीवी सीरियल 'झांसी की रानी' में मनु का किरदार निभाने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज उनके पास कई फिल्मों के ऑफर हैं। राह आसान हो गई है, लेकिन मंजिल अभी दूर है।

बिहार की मूल निवासी उल्का कहती हैं कि फिल्मों में उनके दोस्त व गाइड पापा हैं। पापा उनके रोल मॉडल हैं। 
उल्का कहती हैं, 'मेरे पापा ग्रेट हैं। उन्होंने अपने और मेरे सपने को सच करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी। मेरी सफलता सही में पापा की सफलता है।'
सहरसा शहर के चांदनी चौक के रहने वाले गगन गुप्ता ने 30 साल पहले जो सपने अपने लिए देखे थे, उसे पूरा करने के लिए अपनी बेटी को तैयार किया। तमाम संघर्ष के बाद एक मामूली कलाकार से आगे नहीं बढ़ सके, लेकिन बेटी उल्का गुप्ता का गुरु बनकर उसे बड़ा कलाकार बना दिया। 
बाप का अनुभव और बेटी की प्रतिभा काम आई 
30 साल पहले गगन मुंबई गए थे। संघर्ष किया। फिल्मों में छोटे-मोटे रोल और सीरियल में काम भी मिले। संघर्ष के दिनों में ही शादी रचा ली और मुम्बई के पृथ्वी थियेटर से जुड़ गए। वर्ष 1997 में उल्का का जन्म हुआ। पिता बचपन से ही उल्का को अभिनेत्री बनाने का सपना देखते थे।
आर्थिक तंगी के कारण बेटी को किसी बेहतर प्रशिक्षण संस्थान में अभिनय का प्रशिक्षण दिलाने की क्षमता नहीं थी। वे खुद अपनी बेटी के गुरु बने और अभिनय की बारीकियों को सिखाने लगे। 
कुछ ही वर्षों में उल्का को सीरियल व विज्ञापन में काम मिलने लगा। झांसी की रानी का किरदार मिलने के बाद उल्का ने ऊंचाई को छू लिया। आज उल्का के पास शोहरत है। कई फिल्मों के ऑफर मिल चुके हैं। हालांकि, गगन इसे अपनी बेटी की सफलता मानते हैं। 
2007 से सीरियल में कर रही हैं काम
वर्ष 2007 में उसे पहला ब्रेक सीरियल 'रेशम दान' में मिला। इसके बाद 'सात फेरे', 'सवारी', 'सलोनी की बेटी' सीरियल में काम करने के बाद 2009 में 'झांसी की रानी' में लीड रोल से बड़ी कामयाबी मिली। वह सीरियल पांच वर्ष तक लगातार चला। 2013 में  'खेलती है जिंदगी' में उसका अभिनय निखरा। उल्का तेलगू फिल्म 'अंधरा पोरी', मराठी फिल्म 'ओढ-एट्रेक्शन', सीमा कपूर निर्देशित हिन्दी फिल्म  'मिस्टर काबेडी' में लीड रोल कर चुकी हैं। 
उल्का कहती हैं कि फिल्म या सीरियल करने से पहले स्टोरी को पढ़ती हूं। तब कोई निर्णय लेती हूं। पापा मेरी प्रेरणा हैं। उन्होंने संघर्ष करके मुंबई में मुझे राह दिखाई।

Edited By: Kajal Kumari