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    बंदूक के साए से वर्दी के हौसले तक: लाल गलियारे की बेटियां अब संभाल रही सुरक्षा की जिम्मेदारी

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 11:57 AM (IST)

    रोहतास के पूर्व नक्सल प्रभावित पहाड़ी इलाकों की बेटियां अब सुरक्षा बलों में शामिल हो रही हैं। हाल ही में होमगार्ड बहाली में 35 युवतियों ने सफलता पाई ह ...और पढ़ें

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    सैनिक बनने के लिए कर रही कड़ी मेहनत 

    प्रेम कुमार पाठक, डेहरी ऑन सोन (रोहतास)।कभी नक्सल प्रभावित “लाल गलियारे” के नाम से पहचाने जाने वाले रोहतास जिले के सुदूर पहाड़ी इलाकों में एक समय ऐसा भी था, जब बेटियों की पढ़ाई तक पर पाबंदी थी। नक्सलियों के डर से स्कूल जाना खतरे से खाली नहीं था। लेकिन समय बदला, हालात बदले और अब वही इलाके की बेटियां वर्दी पहन देश और समाज की सुरक्षा की कमान संभालने को तैयार खड़ी हैं।

    सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और प्रशासन का भरोसा मिलने के बाद इन पहाड़ी गांवों में बेटियों के सपनों ने उड़ान भरनी शुरू कर दी है। इसका ताजा उदाहरण हाल ही में हुई होमगार्ड बहाली में देखने को मिला है, जहां सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों की 35 युवतियों ने सफलता हासिल की है। इससे पहले भी इसी इलाके की एक दर्जन बेटियां बिहार पुलिस और दारोगा बहाली में चयनित हो चुकी हैं।

    इन बेटियों में आत्मविश्वास और देशसेवा का जज्बा जगाने में अहम भूमिका निभाई है डेहरी प्रखंड के नवाडीह गांव के युवक मोहित कुमार पांडेय ने। उन्होंने बिना किसी शुल्क के युवकों और युवतियों को शारीरिक प्रशिक्षण देना शुरू किया और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी। बीते एक वर्ष में उनके मार्गदर्शन में 53 युवक-युवतियों ने बिहार पुलिस, होमगार्ड और सेना भर्ती जैसी परीक्षाओं में सफलता का रास्ता तय किया है।

    मोहित पांडेय सिर्फ प्रशिक्षण ही नहीं देते, बल्कि बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए उनके अभिभावकों को भी समझाते हैं। वे गांव-गांव जाकर माता-पिता को भरोसा दिलाते हैं कि बेटियां भी वर्दी पहनकर सम्मानजनक भविष्य बना सकती हैं। खास बात यह है कि वे लड़कियों से किसी तरह का शुल्क नहीं लेते।

    इस वर्ष जिले में होमगार्ड बहाली के तहत कुल 559 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, जिनमें 189 युवतियां शामिल हैं। इनमें से 35 युवतियां सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों से हैं, जिन्होंने बाबा फिजिकल एकेडमी की प्रेरणा से यह मुकाम हासिल किया। नौहट्टा की प्रियंजलि दुबे, लक्ष्मण बिगहा की प्रीति, शंकरपुर की ज्योति, रोहतास की प्रियंका, तिलौथू की अपर्णा, पतपुरा की ब्यूटी कुमारी, दहियाड़ की माया और अंजलि जैसी बेटियां आज पूरे इलाके के लिए मिसाल बन चुकी हैं।

    मोहित पांडेय बताते हैं कि उनके गांव नवाडीह में पहले सेना भर्ती की तैयारी की कोई व्यवस्था नहीं थी। उन्हें 12 किलोमीटर दूर डालमियानगर खेल मैदान जाना पड़ता था। आज वही अनुभव वे गांव के पास लक्ष्मण बिगहा खेल मैदान में युवाओं को बांट रहे हैं।

    प्रशिक्षण के दौरान लंबी दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद, गोला फेंक, डिस्क फेंक, पैड स्टेज सहित सेना और पुलिस की सभी फिजिकल परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। बीएसएफ, एसएसबी, आर्मी, एयरफोर्स, नेवी, बिहार पुलिस और दारोगा बहाली तक का प्रशिक्षण यहां दिया जा रहा है।

    कभी भय और बंदूक के साए में जीने वाला यह इलाका आज बदलाव की मिसाल बन रहा है, जहां लाल गलियारे की बेटियां अब खुद सुरक्षा की ढाल बनने निकल पड़ी हैं।