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    गरीब बच्चों के लिए शिक्षा की अलख जगाने वाली 'लेडी भीष्म', पूर्णिया में बांट रहीं ज्ञान की रोशनी

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 09:59 PM (IST)

    राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सेवानिवृत्त शिक्षिका अर्चना देव पूर्णिया में गरीब बच्चों को शिक्षित करने के लिए समर्पित हैं। उन्होंने आजीवन अविवाहित र ...और पढ़ें

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    बच्चों को पढ़ाती हुईं अर्चना देव। (जागरण)

    प्रशांत कुमार सोनू, पूर्णिया पूर्व। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सेवानिवृत शिक्षिका अर्चना देव की कहानी व जुनून हर किसी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन चुकी है।

    आरंभिक काल से ही अर्चना देव ने अपने जीवन के दो उद्देश्य निर्धारित कर चुकी थी। पहला पिछड़ी बस्तियों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ना व फिर पशुओं से प्रेम। इस चलते वे आजीवन अविवाहित रहने का निर्णय भी ले लिया था।

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    दस साल पूर्व सेवानिवृत हो चुकी अर्चना देव कार्यकाल के दौरान ही स्कूल टाइम के बाद ऐसी बस्तियों को निशुल्क पाठशाला चलाती थी और अब भी उनका यह मिशन जारी है।

    यही नहीं अपने वेतन के पैसे से वे बच्चों को स्लेट व किताबें भी देती है। शहर से 12 किलोमीटर दूर रानीपतरा बाजार की रहने वाली अर्चना देव के प्रयास से कई बस्तियों की तस्वीर भी बदली है और वहां के बच्चे अब उच्च शिक्षा भी ग्रहण कर रहे हैं।

    चबूतरा को बना दिया स्कूल

    प्रखंड के चांदी पंचायत अंतर्गत रानीपतरा गुमटी अनुसूचित जाति टोला में सेवानिवृत प्रधानाध्यापक अर्चना देव ने चबूतरे को गरीबों का स्कूल बना दिया है। बच्चों को पढ़ाने में अपना पेंशन तक खर्च कर देती है। दिन-रात ये सोचती रहती है कि किस प्रकार ये गरीब बच्चे पढ़-लिख कर आगे बढ़े।

    उनके इस निःशुल्क विद्यालय में आज लगभग एक सौ नौ अनुसूचित जाति के छात्र व छात्राएं अध्ययनरत है। 31 अक्टूबर 2015 को सेवानिवृत्त होने के बाद से अर्चना देव इन अनुसूचित जाति के बच्चों के लिए पूरी तरह समर्पित हो चुकी है और वो अपना सारा समय इन्हीं गरीब बच्चों के बीच शिक्षा दान करने में बीता रही है।

    यहां के बच्चे जिले में आयोजित प्रतियोगिता में अपना लोहा मनवा चुके हैं। इसमें अध्ययनरत कुछ छात्र तो फर्राटेदार अंग्रेजी भी बोलते हैं। बच्चों को यहां से वे सरकारी स्कूल भी भेजती है और जो बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं उनके घर पर जाकर उनके अविभावकों को प्रेरित कर स्कूल भेजने का करती है।

    उनके विद्यालय चलाने का समय भी सरकारी स्कूल के अनुसार ही होता है। अगर सरकारी स्कूल डे हो तो वो सुबह छह बजे से तथा अगर मॉर्निंग हो तो संध्या चार बजे से अपना स्कूल चलाती है।

    अर्चना देव को मिल चुका है शिक्षक गौरव रत्न अवार्ड

    राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सेवानिवृत शिक्षिका अर्चना देव को शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में नेपाल सरकार के प्रथम उपराष्ट्रपति व सर्वोच्च न्यायालय नेपाल के पूर्व न्यायाधीश परमानंद झा द्वारा शिक्षक गौरव रत्न अवार्ड से नवाजा जा चुका है।

    इससे पहले भी इन्हें इंडो नेपाल समरसता ऑर्गेनाइजेशन द्वारा नई दिल्ली में 31 अक्टूबर 2019 को आयरन लेडी अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। उसे 2018 में इसी कार्यक्रम में शिक्षक रत्न अवार्ड से नवाजा जा चुका है।

    जीवन के अंतिम काल से अभियान जारी रखने का संकल्प

    सेवानिवृत शिक्षिका अर्चनादेव का कहना है कि लगातार हर वर्ष शिक्षा से संबंधित पुरस्कार मुझे मिल रहा है इससे मेरा आत्म सम्मान के साथ-साथ हौसला भी बढ़ता है और मुझे अपने अंतिम जीवन काल तक गरीब बच्चों को शिक्षा दान करने की प्रेरणा मिलती रहती है।

    मेरा एक ही उद्देश्य है कि हमारे समाज की लड़किया सुशिक्षित हो इसके लिए हमेशा प्रयत्नशील रहती हूं। विशेषकर लड़कियों को आत्मसम्मान की रक्षा करना और आत्मनिर्भर बनाना मेरा कर्तव्य है। समाज के गरीब बच्चे खासकर जिसके सिर से पिता का साया उठ गया है, उन सभी को शिक्षित और संस्कारी बनाकर सभ्य समाज का निर्माण करना मेरी प्राथमिकता है।