2026 में भ्रष्ट अफसरों पर और कसेगा शिकंजा: निगरानी ब्यूरो का स्पीडी ट्रायल पर फोकस, 2025 में रिकॉर्ड एफआईआर और ट्रैप कार्रवाई
निगरानी ब्यूरो 2026 में भ्रष्ट लोकसेवकों के खिलाफ कार्रवाई और तेज करेगा। स्पीडी ट्रायल कोषांग गठित कर समयबद्ध सजा दिलाने पर जोर दिया जाएगा। डीजी जितें ...और पढ़ें

निगरानी ब्यूरो का स्पीडी ट्रायल पर फोकस
जागरण संवाददाता, पटना। नए वर्ष 2026 में भ्रष्ट लोकसेवकों के खिलाफ निगरानी ब्यूरो की कार्रवाई और सख्त होने जा रही है। अब केवल घूसखोर अधिकारियों को पकड़ने तक ही सीमित न रहकर, उन्हें समयबद्ध सजा दिलाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। इसके लिए निगरानी ब्यूरो में जल्द ही स्पीडी ट्रायल कोषांग का गठन किया जाएगा। साथ ही आय से अधिक संपत्ति (डीए) और ट्रैप मामलों की जांच व निपटारे की रफ्तार बढ़ाने के लिए अलग स्पीडी कोषांग भी बनाया जाएगा। यह जानकारी निगरानी ब्यूरो के महानिदेशक जितेंद्र सिंह गंगवार ने बुधवार को ब्यूरो कार्यालय के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में दी।
डीजी गंगवार ने बताया कि 2026 में एक तीसरी बड़ी पहल भी की जा रही है। इसके तहत आधुनिक डिजिटल तकनीकों से लैस एक नए भवन का निर्माण कराया जाएगा, जहां जांच से जुड़े अत्याधुनिक संसाधन उपलब्ध होंगे।
इससे अनुसंधान की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 निगरानी ब्यूरो के लिए उपलब्धियों भरा रहा है और पिछले 20–25 वर्षों के रिकॉर्ड इस साल टूटे हैं।
डीजी के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में निगरानी ब्यूरो में औसतन हर साल 72 से 73 एफआईआर दर्ज होती थीं, लेकिन 2025 में यह संख्या बढ़कर 122 तक पहुंच गई।
खास बात यह रही कि 30 दिसंबर को एक ही दिन में सर्वाधिक 20 एफआईआर दर्ज की गईं। पूरे वर्ष के कार्यदिवसों को देखें तो औसतन हर दूसरे दिन एक एफआईआर दर्ज हुई। इसके विपरीत वर्ष 2024 में महज 15 एफआईआर ही दर्ज की गई थीं। यानी एक साल में कार्रवाई करीब आठ गुना बढ़ी है।
ट्रैप मामलों में ऐतिहासिक रिकॉर्ड
वर्ष 2025 में सबसे अधिक ट्रैप यानी घूस लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के मामले सामने आए। कुल 122 एफआईआर में से 101 एफआईआर ट्रैप से संबंधित थीं, जो कुल मामलों का करीब 81–82 प्रतिशत है।
इन मामलों में 107 भ्रष्ट लोकसेवकों को पकड़ा गया, जिनमें 7 महिला पदाधिकारी और 6 बिचौलिए शामिल हैं। ट्रैप कार्रवाई के दौरान कुल 37 लाख 80 हजार 300 रुपये घूस की राशि जब्त की गई।
पिछले वर्ष 2024 में ट्रैप से जुड़े सिर्फ 8 मामले दर्ज हुए थे, जबकि पिछले 25 वर्षों का औसत 47 एफआईआर प्रतिवर्ष रहा है। इस लिहाज से 2025 ऐतिहासिक वर्ष साबित हुआ।
डीजी ने बताया कि 24 मई को एक लोकसेवक को 3 लाख रुपये घूस लेते और एक अन्य को वाशिंग मशीन के साथ घूस लेते पकड़ा गया, जो निगरानी के इतिहास में दुर्लभ उदाहरण है।
वहीं 27 अगस्त को एक ही दिन औरंगाबाद, खगड़िया, दरभंगा और भोजपुर में चार अलग-अलग ट्रैप कार्रवाई कर रिकॉर्ड बनाया गया। 17 दिसंबर को भी एक ही दिन ट्रैप की दो और डीए की एक कार्रवाई की गई।
डीए मामलों में दोगुनी तेजी
आय से अधिक संपत्ति के मामलों में भी इस वर्ष बड़ी बढ़ोतरी हुई है। 2024 में जहां केवल 2 एफआईआर दर्ज हुई थीं, वहीं 2025 में 15 भ्रष्ट लोकसेवकों के खिलाफ डीए के मामले दर्ज किए गए।
इन मामलों में अब तक 12 करोड़ 77 लाख रुपये की अवैध संपत्ति सामने आई है, जो अनुसंधान पूरा होने पर और बढ़ सकती है। सबसे बड़ा डीए केस भवन निर्माण विभाग के एक कार्यपालक अभियंता पर 2 करोड़ 74 लाख रुपये का है।
निपटारे की दर में बड़ा सुधार
डीजी गंगवार ने बताया कि मामलों के निपटारे की गति भी तेजी से बढ़ी है। जहां 2020 में 23 मामलों का निपटारा हुआ था, वहीं 2025 में रिकॉर्ड 121 मामलों का डिस्पोजल किया गया।
पहले सजा दिलाने में औसतन 12–13 साल लग जाते थे, लेकिन अब इस अवधि को कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। स्पीडी ट्रायल की जिम्मेदारी डीआईजी-2 मृत्युंजय कुमार को सौंपी जाएगी।
नियोजित शिक्षक घोटाला
नियोजित शिक्षकों से जुड़े मामलों में अब तक 6 लाख 56 हजार से अधिक प्रमाणपत्रों की जांच हो चुकी है। इसमें 1711 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 2916 शिक्षकों को अभियुक्त बनाया गया है। अकेले 2025 में इस मामले में 130 एफआईआर दर्ज हुई हैं।
प्रेस वार्ता में डीआईजी मृत्युंजय कुमार, एसपी नवीनचंद्र झा, एसपी मनोज कुमार, एसपी सुबोध कुमार विश्वास और डीएसपी विनोद कुमार पांडेय समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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