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    Bihar News: नाला-सड़क का निर्माण किए बगैर हो गया 12.50 लाख का भुगतान, गड़बड़झाला पकड़ में आते ही उड़े अफसरों के होश

    Bihar Crime News पंचायत सरकार भी कैसे-कैसे कारनामे करती है नवादा का यह मामला उसकी पोल खोल रहा है। नवादा जिला के बुधुआ पंचायत में मुखिया इंजीनियर और अफसरों की मिलीभगत से बड़ा घपला हुआ है। बताया जा रहा है कि नाला-सड़क का निर्माण नहीं हुआ लेकिन कागज पर काम दिखाकर साढ़े 12 लाख रुपये की निकासी कर ली गई।

    By Vikash Chandra Pandey Edited By: Mukul Kumar Updated: Sun, 11 Aug 2024 06:49 PM (IST)
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    प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर

    राज्य ब्यूरो, पटना। नवादा जिले के बुधुआ पंचायत में नाला और सड़क का निर्माण होना था। धरातल पर निर्माण नहीं हुआ, लेकिन कागज में कामकाज दिखाकर 12.50 लाख रुपये का भुगतान हो गया।

    नियंत्रण व महालेखा परीक्षक (कैग) की जांच में यह गड़बड़झाला पकड़ में आया है। कैग का मानना है कि मुखिया और इंजीनियरों के साथ प्रशासनिक मिलीभगत से यह भुगतान फर्जी तरीके से हुआ है।

    बुधुआ पंचायत अकबरपुर प्रखंड में पड़ती है। उस पंचायत के तेलभद्रो गांव में राजेश ठाकुर के घर से रविंद्र ठाकुर के घर तक ढक्कन सहित नाला निर्माण की योजना थी।

    उसके लिए पांचवें वित्त आयोग से 5.95 लाख रुपये स्वीकृत थे। उसी गांव में पिंटू यादव के घर से सुनील यादव के घर तक 9.98 लाख रुपये से पीसीसी सड़क बनाई जानी थी। यह कार्य 15वें वित्त आयोग की राशि से होना था।

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    दोनों निर्माण-कार्यों के लिए कुल 15.93 लाख रुपये स्वीकृत थे और वर्ष 2020 में फरवरी से जुलाई के बीच में कार्य संपन्न हो जाना था। तत्कालीन पंचायत सचिव कार्यकारी अभिकर्ता थे।

    मुखिया और पंचायत सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से निकाला गया पैसा

    कनीय अभियंता द्वारा मापी पुस्त में दर्ज कार्य मूल्य के विरुद्ध मई से जुलाई के बीच 12.50 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। मुखिया और पंचायत सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से राशि की निकासी हुई थी।

    ऐसे में स्पष्ट है कि मुखिया ने बिना काम के ही भुगतान किया, जबकि वे कार्यों की देखरेख और निगरानी के लिए अधिकृत थे। प्रखंड और जिला स्तरीय पदाधिकारियों ने भी निरीक्षण नहीं किया।

    कनीय अभियंता ने मापी पुस्त में गलत प्रविष्टि की, जिस पर कार्यपालक अभियंता ने भी अपना हस्ताक्षर किया है। इस तरह यह गड़बड़झाला सबकी मिलीभगत से हुआ।

    कैग ने मार्च, 2023 में ही यह मामला सरकार के संज्ञान में लाया, लेकिन अभी तक मात्र यही जवाब मिला है कि सेवानिवृत्त हो चुके तत्कालीन पंचायत सचिव से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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