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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 02, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Bihar Politics : मंत्री की गाड़ी रोकने वाले सिपाही को जदयू विधायक ने बताया मेंटल, कहा- मैं होता तो...

By Rahul KumarEdited By:
Published: Thu, 02 Dec 2021 03:56 PM (IST)

बिहार विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन मंत्री जीवेश मिश्रा की गाड़ी रोकने के मुद्दे पर सदन के बाहर ...और पढ़ें

मंत्री जीवेश मिश्रा और जेडीयू विधायक गोपाल मंडल। जागरण आर्काइव
मंत्री जीवेश मिश्रा और जेडीयू विधायक गोपाल मंडल। जागरण आर्काइव

पटना, आनलाइन डेस्क। बिहार विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान सदन के बाहर और अंदर रोजाना हंगामा हो रहा है। विपक्षी दल शराबबंदी तो कभी किसानों की समस्या को लेकर लगातार सरकार को घेरने की कोशिश में लगे हैं। लेकिन शीतकालीन सत्र के चौथे दिन बिहार सरकार के मंत्री ने ही सरकार पर सवाल खड़े कर दिए। सूबे के श्रम संसाधन मंत्री जीवेश मिश्रा (jivesh Mishra) ने विधानसभा गेट पर गाड़ी रोकने को लेकर सदन के बाहर और अंदर जमकर हंगामा किया। मंत्री ने पटना के डीएम और एसएसपी पर मर्यादा के खिलाफ आचरण का आरोप लगाया। जिसके बाद विपक्षी पार्टियों के सदस्यों ने मंत्री के सुर में सुर मिलाते हुए कार्रवाई की मांग की। वहीं जनता दल यूनाइटेड के विधायक गोपाल मंडल (Gopal Mandal) ने कहा है कि सिपाही ही मेंटल था उस पर एक्शन लेना चाहिए। हम होते तो क्या से क्या कर देते।

'हम होते तो क्या से क्या कर देते'

अपने बयानों और कारनामों की वजह से सुर्खियों में रहने वाले जेडीयू के विधायक गोपाल मंडल ने कहा कि मंत्री की गाड़ी, जिस सिपाही ने रोका है उसका दिमाग विचलित होगा। सिपाही मेंटल होगा। विधायक ने कहा कि मंत्री से बढ़कर डीएम एसपी नहीं हैं। जिसने ये बदमाशी की है उसपर कार्रवाई होनी चाहिए। डीएम एसपी पर कार्रवाई क्यों होगी? जब पत्रकारों ने गोपाल मंडल से पूछा कि क्या इस तरह से गाड़ी रोकने से विधायकों का अपमान होता है तो उन्होंने कहा कि जनता ने चुनकर भेजा है, उनका अपमान क्यों होगा। उन्होंने कहा कि ये गलत तरीका है अगर हम वहां होते तो क्या से क्या कर देते।

दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो- मंत्री

मंत्री जीवेश मिश्रा ने सदन के अंदर भी इस मुद्दे के उठाया। उन्होंने कहा कि एसपी और डीएम के आने की वजह से मेरी गाड़ी रोक दी गई। उन्होंने सदन में मांग की दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जन प्रतिनिधियों को ऐसे अपमानित किया जाना, किसी तरह से उचित नहीं है। ये तय होना चाहिए कि डीएम, एसपी बड़ा की सरकार बड़ी। मेरी गाड़ी रोकी गई इसलिए मैं सदन में लेट आया हूं।