Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन पर तेजस्वी यादव ने जताई आशंका, कहा- एक प्रतिशत भी मतदाता छंटे तो...

    Updated: Sun, 13 Jul 2025 07:49 PM (IST)

    राजद नेता तेजस्वी यादव ने मतदाता सूची पुनरीक्षण पर निर्वाचन आयोग पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इससे गरीब मतदाताओं के नाम कट सकते हैं। कांग्रेस और वीआईपी ने भी इस प्रक्रिया का विरोध किया है और तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

    Hero Image
    महागठंधन की संयुक्त प्रेस-वार्ता में बोलते तेजस्वी यादव। (एक्स)

    राज्य ब्यूरो, पटना। मतदाता-सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर राजद नेता तेजस्वी यादव को अब विधानसभा सीटोंं पर वोटों के बिगड़ने की चिंता सताने लगी है।

    रविवार को महागठंधन की संयुक्त प्रेस-वार्ता में उन्होंने एक बार फिर निर्वाचन आयोग पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया।

    तेजस्वी यादव ने कहा कि 90 प्रतिशत मतदाता गरीब-वंचित वर्ग से हैं। उनकी रोटी छीन सकते हैं, लेकिन मताधिकार नहीं। 7.90 करोड़ मतदाताओं में से अगर एक प्रतिशत भी छूट जाएं या दस्तावेज नहीं दे पाए, तो प्रति विधानसभा क्षेत्र 3251 मतदाताओं के नाम कट जाएंगे।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    सीटें हो सकती हैं प्रभावित

    2020 में 35 सीटों पर जीत-हार का अंतर लगभग 3000 मतों का रहा था। 52 सीटों पर लगभग 5000 मतों के अंतर से निर्णय हुआ था। अगर एक प्रतिशत मतदाताओं का नाम भी कटा तो इतनी सीटें प्रभावित हो सकती हैं।

    तेजस्वी ने कहा कि विधानसभा क्षेत्रवार लाइव डैश-बोर्ड की हमारी मांग थी। किस विधानसभा क्षेत्र में कितने प्रपत्र जमा हुए, निर्वाचन आयोग को यह बताने-दिखाने में क्या हर्ज है? निर्वाचन आयोग द्वारा शनिवार तक 80.11 प्रतिशत प्रपत्र जमा होने की जानकारी दी गई।

    इस दावे को उन्होंने वास्तविक सच्चाई से परे बताया। उन्होंने कहा कि आयोग ने यह नहीं बताया कि कितने प्रपत्र सत्यापित और वैध हैं। हमें जानकारी है कि मतदाताओं की सहमति के बगैर बीएलओ फर्जी हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान लगाकर प्रपत्र अपलोड कर रहे।

    उन्होंने कुछ वीडियो और खबरों के क्लिप दिखाए। तेजस्वी ने कहा कि बीएलओ और ईआरओ पर 50 प्रतिशत से अधिक प्रपत्र अपलोडिंग का लक्ष्य थोपे जाने की सूचना है। कई जिलों में विपक्षी दलों के बीएलए को एसआईआर में सक्रिय भागीदारी से रोका गया।

    प्रश्न यह है कि बीएलए को वास्तविक निरीक्षण की भूमिका मिली है या केवल उपस्थिति की सूचना दर्ज हो रही। हम लोग अलर्ट हैं। ग्राउंड में क्या चल रहा है, इस पर नजर है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दस्तावेजों में लचीलापन लाने की राय के बावजूद निर्वाचन आयोग ने कोई औपचारिक संशोधित अधिसूचना जारी नहीं की।

    प्रेस-वार्ता में डॉ. शकील अहमद खान, धीरेन्द्र कुमार झा, केडी यादव, ललन चौधरी, रामबाबू, संजय यादव व एजाज अहमद आदि उपस्थित रहे।

    राजेश बोले, फील्ड में नहीं दिख रहे बीएलओ 

    कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भांति निर्वाचन आयोग भी खोखले वादे कर रहा। आयोग के आंकड़े, दावे, फार्म संग्रह और अपलोडिंग में अनियमितता और अंतर है। निर्वाचन आयोग दावा कर रहा कि डेढ़ लाख बीएलओ नियुक्त किए गए हैं, जबकि फील्ड में वे कहीं दिख नहीं रहे।

    सहनी बोले, वोटबंदी के इस निर्णय से जनता परेशान

    विकासशील इंसान पार्टी के संस्थापक मुकेश सहनी ने एसआईआर पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि भाजपा से तो नहीं, लेकिन उसके सहयोगी दलों से आशा-आग्रह है कि वे एसआईआर का विरोध करें।

    देश की जनता जिस तरह नोटबंदी से परेशान हुई थी, उसी तरह इस वोटबंदी के निर्णय से बिहार के लोग परेशान हैं। इसे जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे गरीब और पिछड़ा वर्ग की परेशानी बढ़ गई है।

    उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि मैं पटना में हूं, लेकिन मेरा प्रपत्र जमा हो गया। जब मेरे साथ ऐसा हो सकता है तो किसी से साथ तो कुछ भी हो सकता है।

    यह भी पढ़ें-

    'इतने मर्डर हो रहे हैं कि...' बढ़ते अपराध को लेकर तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर उठाए सवाल