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    एक तेजस्‍वी यादव का भी विवाह...; BJP नेताओं की सराहना करते RJD नेता ने क्‍यों कहा ऐसा?

    By Arun Ashesh Edited By: Vyas Chandra
    Updated: Mon, 05 Jan 2026 05:41 PM (IST)

    राजद नेता शिवानंद तिवारी ने पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को अपना शानदार विरोधी बताते हुए याद किया। उन्होंने मोदी की समावेशी राजनीति, इफ्तार पा ...और पढ़ें

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    तेजस्‍वी यादव की शादी की राजद नेता ने की चर्चा। फाइल फोटो

    राज्य ब्यूरो, पटना। राजद के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने भाजपा नेता और राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री स्व. सुशील कुमार मोदी को अपना शानदार विरोधी बताते हुए याद किया।

    कहा-सुशील मोदी में कुछ ऐसी बात थी जो उन्हें भाजपा के अन्य नेताओं से अलग करती थी। जेपी आंदोलन से जुड़े भाजपा के और नेताओं की तरह मोदी के मुंह से कभी नफरत फैलाने वाली बात नहीं निकली।

    इस तरह के नेताओं के रूप में तिवारी ने विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. प्रेम कुमार और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष नंंदकिशोर यादव का नाम लिया।

    शिवानंद ने सोमवार को अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा-सुशील तो हर ईद में इफ़्तार पार्टी करते थे। अच्छी तादाद में मुसलमान उसमें शिरकत करते थे। मुसलमानों का अच्छा ख़ासा वोट भी उनको मिलता था।

    सुशील ने किया था अंतरधार्मिक विवाह

    सुशील का विवाह अंतरधार्मिक था। एक ईसाई लड़की जेसिका से उनको प्रेम हुआ और उन्हीं से विवाह भी किया। यह आजकल के माहौल में बहुत विश्वसनीय नहीं लग सकता है।

    सुशील ने ईसाई लड़की के रूप में ही जेसिका जी का वरण किया था। शादी भी आर्य समाज विधि से हुई। उस विवाह में आशीर्वाद देने अटल जी भी आए थे। 

    दूसरी ओर तेजस्वी (Tejashwi Yadav) की शादी भी हमने देखी, लेकिन उस ईसाई लड़की का धर्म परिवर्तन हुआ। शुद्ध ब्राह्मण विधि से विवाह हुआ। विवाह से पूर्व उसके ससुर ने मूल नाम बदलकर नया नामकरण कर दिया।

    शिवानंद ने अपने फेसबुक पर लिखा-उनसे मेरा परिचय जेपी आंदोलन के दौरान हुआ था। सुशील उन दिनों विद्यार्थी परिषद के नेता थे और मैं समाजवादी धारा से जुड़ा था।

    उस आंदोलन के दौरान गोविंदाचार्य और रामबहादुर राय से हमारी मुलाक़ात और बातचीत ज़्यादा थी। गोविंद जी हमउम्र थे।

    रामबहादुर उम्र में मुझसे छोटे थे, लेकिन उनमें संघ वाली वैचारिकता थी। इसलिए बहस मुबाहिसा इन्हीं दोनों से ज़्यादा होता था।

    गोविंदाचार्य की बड़ी भूमिका

    उन दिनों जनसंघ (अब भाजपा) में ऊंची जातियों के नेताओं का वर्चस्व था। कैलाश पति मिश्र जनसंघ के शलाका पुरुष माने जाते थे।

    ताराकांत झा, यशोदा नंद सिंह लाल मुनि चौबे, स्वामी नाथ तिवारी आदि का बोलबाला था। वे लोग नई पीढ़ी के पिछड़ी जातियों के नेताओं को दबाते थे।

    गोविंंदाचार्य ने बिहार जनसंघ में सोशल इंजीनियरिंग की शुरुआत की। सुशील मोदी, नंदकिशोर यादव या प्रेम कुमार जैसे युवाओं को पार्टी के अंदर आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। 

    सुशील मोदी से मेरी असली पहचान बांकीपुर जेल में हुई। हालांकि विचार और मिज़ाज दोनों मामलों में हमलोग एक दूसरे से अलग थे।

    जेल में सुशील और मैं किताबों के साथ आए थे। दिनकर जी की ''संस्कृति के चार अध्याय'' सुशील ने ही मुझे जेल में पढ़वाई थी।

    उन्होंने लिखा- वहां भी हमलोगों में कुछ मामलों को लेकर मतभेद था। बंदियों के मामलों को लेकर प्रशासन से मैंने लड़ाई ठान ली थी।

    स्थिति बहुत तनावपूर्ण हो गई थी। सुशील आम क़ैदियों की समस्याओं लेकर प्रशासन से टकराने के पक्षधर नहीं थे। कभी कभार के तीखे मतभेदों के बावजूद हमलोगों में प्राय: आपसी सद्भाव था।

    आरोप प्रमाणित नहीं हुआ

    सन अस्सी में जनसंघ का रूपांतरण भाजपा के रूप में हो गया। धीरे-धीरे पुरानी पीढ़ी किनारे होती चली गई। नई पीढ़ी के हाथों में पार्टी का नेतृत्व आ गया। सुशील भाजपा के एक नंबर के चेहरा बने।

    बिहार की राजनीति का संपूर्ण नक़्शा उनके दिमाग़ में रहता था था। अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को वे अच्छी तरह जानते पहचानते थे। शिवानंद ने सुशील मोदी के साहस की प्रशंसा की।

    लिखा-जिन दिनों लालू प्रसाद बिहार के सबसे ताकतवर नेता थे उस समय सुशील मोदी बिहार में विरोधी दल के सबसे बड़े नेता थे। बाक़ी लोग थोड़ा दबते थे।

    लेकिन सुशील, लालू को हर मुद्दे पर तर्क के साथ जवाब देते थे। सुशील पर भी तरह-तरह का आरोप लगाने का प्रयास हुआ।

    नाजायज तरीक़े से किसी चर्च की ज़मीन हथियाने का आरोप उन पर लगाया गया। सुशील ने आरोप को प्रमाणित करने की चुनौती दी, लेकिन कोई प्रमाण सामने नहीं आया।