विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 30, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

'चलते-फिरते ताबूत बने रेल के डिब्बे', झारखंड रेल हादसे पर बोले लालू; बेटी रोहिणी ने भी साधा निशाना

Published: Tue, 30 Jul 2024 01:43 PM (IST)

झारखंड के हावड़ा-मुंबई मेल हादसे पर पूर्व रेल मंत्री लालू यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। लालू यादव ने ...और पढ़ें

राजद सुप्रीमो लालू यादव और राजद नेत्री रोहिणी आचार्य। (फाइल फोटो)
राजद सुप्रीमो लालू यादव और राजद नेत्री रोहिणी आचार्य। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. झारखंड रेल हादसे पर शुरू हुई राजनीति
  2. लालू यादव बोले- नियमित हादसे चिंताजनक, सुरक्षा पर ध्यान नहीं
  3. रोहिणी आचार्य ने कहा कि दुखद रेल दुर्घटनाएं थम नहीं रही हैं।

राज्य ब्यूरो, पटना। झारखंड के चक्रधरपुर में हुए रेल हादसे (Jharkhand Train Accident) के बाद रेलवे सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। पूर्व रेल मंत्री और राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने भी रेल की सुरक्षा को लेकर सरकार को घेरा और कहा कि रेल के डिब्बे आज चलते फिरते ताबूत बनकर रह गए हैं।

लालू प्रसाद ने मंगलवार को अपने एक्स पर एक पोस्ट डालकर कहा कि 13 दिनों में सात रेल दुर्घटनाएं हुई हैं। नियमित होती रेल दुर्घटनाएं बेहद चिंताजनक है। सरकार ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था के मूलभूत कदम भी नहीं उठा रही है।

'ट्रेनों पर चढ़ने से पहले...'

उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे इतनी असुरक्षित हो चुकी है कि ट्रेनों पर चढ़ने से पहले यात्री प्रार्थना करते हैं कि यह यात्रा उनकी अंतिम यात्रा ना हो।

रोहिणी आचार्य ने साधा निशाना

दूसरी ओर सारण से लोकसभा उम्मीदवार रही रोहिणी आचार्य ने एक पोस्ट डाल कर कहा कि न तो पुल-पुलिया के धंसने का सिलसिला थम रहा है और न ही दुखद रेल दुर्घटनाएं ही थम रही हैं। रेल हादसों की वजह से लगातार जान-माल की क्षति जारी है।

उन्होंने कहा कि पिछले दस सालों से देश की बागडोर जिन लोगों के हाथों में है, उन लोगों को इन सब की तनिक भी परवाह नहीं है। कोरी बयानबाजी की आड़ में भ्रष्टाचार ही इनके शासन का सार है।

'बड़ी-बड़ी बातें तो खूब हो रही...'

रोहिणी ने लिखा कि रेलवे सुरक्षा के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें तो खूब हो रही, मगर दुर्घटनाओं से सीख लेते हुए दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए कोई काम नहीं किया गया।

उन्होंने कहा, हर दुर्घटना के बाद निचले व मध्य स्तर के कर्मचारियों और अधिकारियों पर जिम्मेदारी थोप कर निलंबन की कार्रवाई, समीक्षा व जांच का कोरम पूरा दिया जाता है।

ये भी पढ़ें- हावड़ा-मुंबई मेल कैसे मालगाड़ी से टकराई, सुबह 3.45 बजे पोल नंबर 299/3 के पास आखिर क्या हुआ?

ये भी पढ़ें- हावड़ा-मुंबई मेल हादसा: बिहार-महाराष्ट्र और गुजरात की कई ट्रेनों का रूट बदला, यात्रा से पहले देख लें लिस्ट