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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 03, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Bihar Politics: राघोपुर या फिर... प्रशांत किशोर ने 2 सीटों पर खोले पत्ते, चुनाव लड़ने के दिए साफ संकेत

Published: Wed, 03 Sep 2025 07:35 PM (IST)

जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने करगहर या राघोपुर से चुनाव लड़ने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि ...और पढ़ें

पीके ने दिया करगहर या राघोपुर से चुनाव लड़ने का संंकेत (पीटीआई)
पीके ने दिया करगहर या राघोपुर से चुनाव लड़ने का संंकेत (पीटीआई)

HighLights

  1. प्रशांत किशोर करगहर या राघोपुर से लड़ सकते हैं
  2. तेजस्वी यादव के विरुद्ध लड़ने की बात कही
  3. नीतीश कुमार पर बैक-डोर पॉलिटिक्स का आरोप

राज्य ब्यूरो, पटना। जन सुराज पार्टी (Jan Suraaj Party) के सूत्रधार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने करगहर या राघोपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने का संकेत दिया है। एक न्यूज पोर्टल से बातचीत में पीके ने कहा कि चुनाव दो ही जगह से लड़ना चाहिए। पहला, जन्मभूमि और दूसरा, कर्मभूमि से।

पीके ने आगे कहा, जन्मभूमि के हिसाब से मुझे रोहतास जिले में करगहर से चुनाव लड़ना चाहिए और कर्मभूमि के हिसाब से वैशाली जिला में राघोपुर से। बाकी जगह से चुनाव लड़ने का कोई मतलब नहीं।

'अगर चुनाव लड़ेंगे तो तेजस्वी के विरुद्ध... '

इसी के साथ, उन्होंने कहा कि अगर चुनाव लड़ेंगे तो तेजस्वी के विरुद्ध, अन्यथा दूसरी जगह से लड़ने का कोई औचित्य नहीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विरुद्ध चुनाव लड़ने की संभावना पर पीके ने कहा कि वे तो बैक-डोर पॉलिटिक्स करते हैं। अगर वे चुनाव लड़ते तो उनके विरुद्ध उसी सीट से दांव आजमाता।

उल्लेखनीय है कि नीतीश विधान परिषद के सदस्य हैं, जबकि राघोपुर से पिछले दो चुनाव तेजस्वी यादव जीत चुके हैं।

करगहर सीट का सियासी समीकरण

करगहर से अभी कांग्रेस के संतोष मिश्र विधायक हैं। राघोपुर लालू परिवार का गढ़ माना जाता है। वहां से लालू प्रसाद के अलावा राबड़ी देवी भी विधायक रह चुकी हैं।

यादवों की बहुलता वाले इस विधानसभा क्षेत्र में पासवान और राजपूतों के मत निर्णायक हैं। संतोष कांग्रेस की सरकार में मंत्री रह चुके गिरीश मिश्र के पुत्र हैं। सादगी, ईमानदारी और कर्मठता गिरीश मिश्र की पहचान रही है।

करगहर कुर्मी-कोईरी बहुल क्षेत्र है, जहां ब्राह्मणों की अच्छी-साखी जनसंख्या है। यह जनाधार वस्तुत: एनडीए का माना जाता है, लेकिन पिछले डेढ़ दशक से यहां एंटी-कुर्मी राजनीति परवान पर है।

माना जा रहा कि ब्राह्मण समाज से आने वाले प्रशांत किशोर इसी कारण करगहर के प्रति आकृष्ट हैं। हालांकि, राघोपुर में अपनी दिलचस्पी वे पहले भी प्रकट कर चुके हैं।

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