Prashant Kishor: पीके की जन सुराज पार्टी को कौन दे रहा पैसा? JDU नेता के दावे से मचेगा सियासी बवाल!
जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर पर जदयू नेताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रशांत किशोर अपनी राजनीतिक यात्रा में असत्य बोल रहे हैं। जदयू नेताओं ने जन सुराज पार्टी के वित्तीय स्त्रोतों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रशांत किशोर की पार्टी को जॉय ऑफ लिविंग ग्लोबल फांउडेशन से फंडिंग हो रही है।

राज्य ब्यूरो, पटना। जदयू के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार, प्रदेश सचिव मोहित प्रकाश तथा अजीज पटेल ने गुरुवार को जनसुराज के नेता प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपनी राजनीतिक यात्रा में असत्य बोल रहे।
इन नेताओं ने जदयू प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में जन सुराज नेता की राजनीतिक गतिविधियों और उनके द्वारा संचालित वित्तीय स्त्रोतों को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
'करोड़ों रुपये का निवेश कहां से हो रहा है?'
जदयू नेताओं ने कहा कि प्रशांत किशोर की हालिया गतिविधियां और उनका वित्तीय स्त्रोत सवालों के घेरे में है। बिहार की जनता को यह जानना आवश्यक है कि उनकी पार्टी में करोड़ों रुपये का निवेश कहां से हो रहा है। प्रशांत किशोर ने अपने राजनीतिक पार्टी के नाम पर कई गड़बड़ियां की है।
उन्होंने कहा, जनसुराज की स्थापना 28 अगस्त 2023 को हुई, जबकि इसका औपचारिक एलान गांधी जयंती के दिन यानी 2 अक्टूबर 2024 को हुआ।
'पार्टी में वित्तीय गड़बंड़ी'
इस दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि पार्टी के पास कोई वित्तीय कमी नहीं है। वहीं, जनसुराज के अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रामबली सिंह ने कहा कि पार्टी का कोई बैंक खाता नहीं है। यह विरोधाभास दर्शाता है कि पार्टी में वित्तीय गड़बड़ी है।
नीरज कुमार ने कहा कि यह पहली राजनीतिक पार्टी है, जो एक कंपनी द्वारा संचालित हो रही है। यह कंपनी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड है। यह चैरिटेबल फाउंडेशन के नाम पर राजनीतिक गतिविधियां चला रही है, जो टैक्स अनियमितता के एक बड़े मामले को जन्म देता है।
उन्होंने कहा कि इस फाउंडेशन के वित्तीय लेन-देन में भी गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। फाउंडेशन ने 2023-24 के दौरान ₹48.75 करोड़ डोनेशन प्राप्त किया। यह विभिन्न कंपनियों से आया, लेकिन इन कंपनियों की पूंजी से कहीं अधिक राशि डोनेट की गई। प्रशांत किशोर पार्टी और इस कंपनी के बीच संबंध को स्पष्ट करना चाहिए।
बिहार से पूंजी और श्रम का निर्यात हो रहा : पीके
गौरतलब है कि प्रशांत किशोर इन दिनों राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव की तैयारियां में जुटी हुई है। वहीं, बीते मंगलवार को प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार के लोगों की मेहनत से जमा किया हुआ पैसा, बैंकों द्वारा तमिलनाडू, गुजरात आदि राज्यों को दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा, इसका परिणाम यह है कि मजदूर बिहार के पूंजी बिहार की जनता की, लेकिन फैक्ट्री के मालिक तमिलनाडू और गुजरात के हैं। उसके बाद उन राज्यों में बनी वस्तु को बिहार में आयत किया जाता है और लोगों को महंगे दरों पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह उसी तरह है जैसे ब्रिटिश शासनकाल में कपास और नील की खेती बिहार में होती थी पर फैक्ट्री इंग्लैंड में थी, जिससे हमारे ही कच्चे माल से बनी वस्तु को हमें ही उच्च दरों पर बेचा जाता था।
पीके ने कहा, यह दुर्भाग्य की बात है कि आज भी बिहार की वही स्थिति बनी हुई हैं। यदि बिहार के बैंक बिहार सरकार की बात सुनते या फिर आरबीआइ के नियमों का पालन करते तो हैं केवल बिहार की जनता के पैसों से हर वर्ष बिहार में दो लाख करोड़ का अतिरिक्त निवेश होता। जिससे बिहार के लोगों को दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी नहीं करनी पड़ती।
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