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    गोपाल खेमका मर्डर केस की Inside Story, 7 साल पहले बिजनेसमैन के बेटे की हत्या से क्या है कनेक्शन?

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Kumar
    Updated: Sat, 05 Jul 2025 12:46 PM (IST)

    पटना में शुक्रवार रात उद्योगपति गोपाल खेमका की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना गांधी मैदान थाना क्षेत्र में हुई जहाँ अज्ञात बाइक सवार अपराधियों ने उन्हें निशाना बनाया। खेमका को अस्पताल ले जाया गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। 2018 में उनके बेटे की भी हत्या हुई थी। इस घटना के बाद राज्य का राजनीतिक तापमान बढ़ गया है और विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला है।

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    पटना में शुक्रवार रात उद्योगपति गोपाल खेमका की गोली मारकर हत्या कर दी गई। जागरण

    डिजिटल डेस्क, पटना। Gopal Khemka Murder: बिहार की राजधानी पटना के बड़े उद्योगपति गोपाल खेमका की शुक्रवार रात 11:45 बजे सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद से राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। इसके साथ ही राज्य का राजनीतिक तापमान भी बढ़ रहा है। बड़ा सवाल यह है कि उद्योगपति के बेटे की हत्या 7 साल पहले हुई थी। आखिर बेटे की हत्या के बाद पिता के मर्डर की घटना में क्या कोई कनेक्शन है? इस तरह के सभी अनसुलझे सवालों के जवाब नीचे विस्तार से समझें...

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    किसने की थी खेमका के बेटे की हत्या?

    पहले जानें कि बिजनेसमैन गोपाल खेमका के बेटे की हत्या कब और किसने की थी? बता दें कि साल 2018 में गोपाल खेमका के बेटे गुंजन खेमका की हाजीपुर इंडस्ट्रियल एरिया में हत्या कर दी गई थी।

    गुंजन के ऊपर बाइक सवार अपराधी ने ही गोली चलाई थी। बताया गया था कि गुंजन अपनी कार से पटना से हाजीपुर इंडस्ट्रियल एरिया में अपनी फैक्ट्री पहुंचे थे।

    अपराधियों ने इस दौरान गोलियों की बौछार कर दी थी। इस वारदात में एक गोली गुंजन के ड्राइवर को लगी थी, जबकि दो गोलियां गुंजन खेमका को लगी थीं।

    गुंजन की कार में मौके पर ही मौत हो गई थी। इस वारदात के बाद पुलिस ने मस्तू सिंह नामक अपराधी को गिरफ्तार भी किया था। उसे जेल भेजा।

    आरोपी मस्तू के जेल से बाहर आने के बाद उसकी भी हत्या कर दी गई थी। ऐसे में बड़ा सवाल है कि एक ही परिवार के दो लोगों की हत्या के पीछे कोई गहरी साजिश है? बहरहाल, इस हत्याकांड के बाद से परिजनों में काफी गुस्सा है।

    कैसे हुई खेमका की हत्या?

    बीते रोज शुक्रवार रात गोपाल खेमका के मर्डर की यह घटना गांधी मैदान थाना क्षेत्र के रामगुलाम चौक के पास हुई। खेमका बांकीपुर क्लब से घर लौटे थे। 

    उन्हें गोली मारे जाने के बाद मेडिवर्सल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मौके पर थाने की पुलिस समेत तमाम वरीय अधिकारी भी मोके पर पहुंचे।

    हालांकि, स्वजन का आरोप था कि घटनास्थल से पुलिस थाना महज 300 मीटर दूर है। इसके बाद भी पुलिस को मौके पर पहुंचने में काफी समय लगा। थाने के पास ऐसी वारदात होना भी बड़े सवाल खड़ा करती है।

    अपराधी ने नजदीक से मारी गोली

    • गोपाल खेमका गांधी मैदान राम गुलाम चौक स्थित अपने घर के पास अपनी कार से उतर रहे थे। तभी बाइक सवार अपराधियों ने उन्हें नजदीक से गोली मार दी।
    • वे राम गुलाम चौक के पास कतरका निवास की चौथी मंजिल पर रहते थे। उनका पेट्रोल पंप से लेकर फैक्ट्री और अस्पताल तक का कारोबार है।
    • जानकारी के अनुसार, गोपाल खेमका राज्य के बड़े व्यवसायी थे। गोपाल खेमका के पास एमबीबीएस की डिग्री भी थी। वे बांकीपुर क्लब के पूर्व सचिव भी थे।

    प्रत्यक्षदर्शी ने क्या कहा?

    समाचार एजेंसी पीटीआई ने भी इस संबंध में जानकारी दी है। पीटीआई ने खेमका के अपार्टमेंट के गार्ड राम पारस के हवाले से बताया, "मैंने उनकी (गोपाल खेमका की) कार को आते देखा और अपनी कुर्सी से उठ गया। उन्होंने हॉर्न बजाया और जैसे ही मैं गेट की तरफ बढ़ा, मुझे गोलियों की आवाज सुनाई दी। रात के करीब 11.30 बजे थे। मैं गेट पर पहुंचा तो देखा कि वे खून से लथपथ पड़े थे, लेकिन उनकी सांसें चल रही थीं। पुलिस रात 2.30 बजे के बाद आई।"

    पुलिस के आने के बारे में पूछे जाने पर प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि पुलिस रात 2.30 बजे के बाद आई। तब तक खेमका की मौत हो चुकी थी। इससे पता चलता है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद पुलिस लापरवाह रही।

    प्रदेश के लॉ एंड ऑर्डर पर उठे सवाल

    एएनआई ने कांग्रेस नेता प्रेम चंद्र मिश्रा ने कहा, 'बिहार में गुंडा राज है। अपराधी अपराध करता है, भाग जाता है और पुलिस देखती रहती है।'

    उन्होंने यह भी कहा कि राजधानी पटना में जहां इतने सारे सुरक्षा बल हैं, एक प्रतिष्ठित व्यवसायी की हत्या कर दी जाती है और सरकार के लोग वहां बैठकर दावा करते हैं कि यह कानून का शासन है। यह कानून नहीं है।

    मिश्रा ने नीतीश कुमार और भाजपा सरकार पर लोगों की जान और संपत्ति की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप भी लगाया।

    इस बीच, मामले में आरजेडी सांसद मनोज झा ने भी कहा कि बिहार में सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। उन्होंने इस मामले को लेकर सत्ता पक्ष पर जमकर हमला बोला।

    सत्ता पक्ष ने किया बचाव

    वहीं, दूसरी ओर भाजपा नेता गुरु प्रकाश ने व्यवसायी गोपाल खेमका हत्याकांड को लेकर सत्ता पक्ष का बचाव किया। उन्हाेंने कहा कि सरकार स्थिति पर नजर रख रही है। 

    प्रकाश ने कहा कि मुख्यमंत्री, दोनों उपमुख्यमंत्री और हमारे सभी वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में ये मामला है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    उन्होंने जंगलराज के सवाल पर कहा है कि ऐसी घटनाएं सीएम हाउस से पोषित नहीं हो रही हैं। एक समय था जब (बिहार में) राज्य प्रायोजित, राज्य संरक्षित, राज्य प्रमोटेड अपराध होते थे।

    गुरु प्रकाश ने 'जंगलराज' का अर्थ भी बताया। उन्होंने कहा कि 'जंगलराज' की संज्ञा हमने नहीं दी, बल्कि पटना हाई कोर्ट ने ये कहा था कि 'बिहार में कोई कानून और नियम नहीं है'। उस समय और आज के हालात की तुलना मत कीजिए।

    इधर, एएनआई ने जेडीयू नेता नीरज कुमार की इस मामले पर प्रतिक्रिया ली है। नीरज ने कहा कि गोपाल खेमका की हत्या को चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि ये कैसे हुई।

    कुमार ने कहा कि गांधी मैदान के बगल में आपराधिक घटना को अंजाम दिया गया है। पुलिस ने सिटी एसपी सेंट्रल के नेतृत्व में तुरंत एसआईटी बनाई है, उम्मीद है जल्द नतीजे सामने आएंगे।

    उल्लेखनीय है कि घटना गांधी मैदान थाना क्षेत्र के रामगुलाम चौक के पास की है। उन्हें आनन-फानन में मेडिवर्सल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। थाना पुलिस के साथ ही सभी वरीय अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे।

    सवाल ये भी उठे

    • बिजनेसमैन गोपाल खेमका के मर्डर से 7 साल पहले बेटे की हत्या कई सवाल खड़े कर रही है। क्या इसके पीछे कोई साजिश है?
    • कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में जमीन विवाद की बातें भी कही गईं। क्या इस हत्याकांड के पीछे यही असल वजह है?
    • पिता-पुत्र के मर्डर केस में अपराधियों ने एक जैसा तरीका अपनाया, क्या इससे दोनों मामलों में पुलिस कोई कड़ी जोड़ पाएगी?
    • गोपाल खेमका के बेटे की हत्या के आरोपी के जेल से बाहर आने के बाद हत्या क्यों और किसने की?
    • पुलिस थाने से करीब 300 मीटर की दूरी पर हत्याकांड कैसे हुआ? पुलिस क्यों मौके पर देर से पहुंची? यह भी एक बड़ा सवाल और पुलिस के लिए चुनौती है।
    • इस घटना को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। क्या इसका बिहार की राजनीति से भी कोई कनेक्शन है?

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