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    रूस से ब्राजील तक के पंखों की उड़ान पटना में थमी, राजधानी जलाशय बना प्रवासी पक्षियों का नया ठिकाना

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 02:01 PM (IST)

    राजधानी पटना का जलाशय प्रवासी पक्षियों से गुलजार हो गया है। ठंड बढ़ने के साथ ही हजारों विदेशी और स्थानीय पक्षी यहां जमा हो गए हैं। रूस से ब्राजील तक क ...और पढ़ें

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    राजधानी जलाशय बना प्रवासी पक्षियों का नया ठिकाना

    जागरण संवाददाता, पटना। ठंड के आगमन के साथ ही राजधानी पटना के मुख्य सचिवालय के समीप स्थित राजधानी जलाशय एक बार फिर प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार हो उठा है। जल से लबालब इस जलाशय में इन दिनों हजारों विदेशी और स्थानीय पक्षियों का जमावड़ा देखने को मिल रहा है। सुबह और शाम के समय पक्षियों के सामूहिक कलरव और उड़ान के मनोहारी दृश्य पूरे इलाके को जीवंत बना रहे हैं। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह दृश्य न केवल राहगीरों को ठहरकर देखने को मजबूर कर रहा है, बल्कि राजधानी की पहचान में भी एक नया रंग जोड़ रहा है।

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    इस वर्ष ठंड की शुरुआत से ही तापमान प्रवासी पक्षियों के अनुकूल रहा है। इसका सीधा असर राजधानी जलाशय में दिख रहा है, जहां लगभग चार से पांच हजार प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी दर्ज की जा रही है।

    पर्याप्त जलस्तर, स्वच्छ वातावरण और भोजन की भरपूर उपलब्धता ने इस जलाशय को पक्षियों के लिए सुरक्षित और पसंदीदा आश्रय स्थल बना दिया है। जलाशय के चारों ओर फैली हरियाली और अपेक्षाकृत शांत माहौल इनके ठहराव को और अनुकूल बनाता है।


    सुबह-शाम यहां पक्षियों का कलरव पूरे वातावरण को संगीतमय कर देता है। खासकर सूर्योदय के समय जब पक्षी समूहों में उड़ान भरते हैं, तो यह दृश्य किसी प्राकृतिक उत्सव से कम नहीं लगता।

    शाम ढलते ही जलाशय के किनारे बैठे पक्षियों की कतारें और उनकी चहचहाहट दिनभर की थकान को दूर कर देती हैं।


    यहां देखी जा रही प्रमुख प्रवासी प्रजातियों में कांब डक, लालसर, गडवाल, कूट, पिनटेल, लेसर विसलिंग डक जैसी जलपक्षियां शामिल हैं।

    इनके अलावा स्थानीय पक्षियों की भी अच्छी-खासी संख्या मौजूद है, जिनमें हाउस क्रो, कॉमन मैना, एशियन कोयल, स्पॉटेड डव और कॉलर्ड डव प्रमुख हैं। प्रवासी और स्थानीय पक्षियों का यह साझा संसार जलाशय की सुंदरता को कई गुना बढ़ा रहा है।


    राजधानी जलाशय की एक खास बात यह है कि यहां आने वाले कई प्रवासी पक्षी दुनिया के बेहद दूर-दराज के इलाकों से हजारों किलोमीटर की यात्रा तय कर पहुंचते हैं।

    इनमें उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, ब्राज़ील, ईरान, अफगानिस्तान, रूस, चीन, तिब्बत और नॉर्थ यूरोप जैसे देशों के पक्षी शामिल हैं। लंबी और कठिन उड़ान के बाद पटना का यह जलाशय उनके लिए विश्राम और भोजन का सुरक्षित केंद्र बन जाता है।


    पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, जलाशय में पानी का पर्याप्त स्तर बने रहना और बेहतर प्रबंधन प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ने का मुख्य कारण है।

    जल की उपलब्धता से जलीय वनस्पतियां, कीट-पतंगे और छोटी मछलियां पनपती हैं, जो पक्षियों के लिए भोजन का प्रमुख स्रोत हैं। इसके साथ ही मानवीय हस्तक्षेप में कमी और अपेक्षाकृत शांत वातावरण भी इन्हें यहां लंबे समय तक ठहरने के लिए प्रेरित करता है।


    इन दिनों राजधानी जलाशय प्रकृति प्रेमियों और मॉर्निंग वॉक करने वालों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है। लोग दूरबीन और कैमरों के साथ पक्षियों को निहारते नजर आ रहे हैं।

    कई फोटोग्राफर और बर्ड वॉचर्स यहां सुबह-सुबह पहुंचकर दुर्लभ प्रजातियों को अपने कैमरे में कैद कर रहे हैं। यह नजारा न केवल पटना की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ा रहा है, बल्कि लोगों में जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश भी दे रहा है।


    कुल मिलाकर, राजधानी जलाशय इन दिनों सिर्फ एक जलस्रोत नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के सह-अस्तित्व का जीवंत उदाहरण बन चुका है, जहां रूस से ब्राज़ील तक के पंखों की उड़ान आकर सुकून पाती है।