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    ड्राइवर डोरमेट्री बंद, बस स्टैंड पर बढ़ी परेशानी; खुले में ठंड काटने को मजबूर चालक-खलासी

    By hasmiEdited By: Radha Krishna
    Updated: Fri, 02 Jan 2026 11:23 AM (IST)

    पटना के बैरिया बस स्टैंड पर बना 90 बेड का ड्राइवर डोरमेट्री एक साल से चालू नहीं हो सका है। इससे भवन को नुकसान हो रहा है, वहीं कड़ाके की ठंड में बस चाल ...और पढ़ें

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    सर्द रात में खुले में लगी स्टील की कुर्सी पर सो रहे यात्री

    जागरण संवाददाता, पटना सिटी(पटना)। रामकृष्णा नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत पटना–मसौढ़ी रोड स्थित अंतरराज्यीय बैरिया बस स्टैंड परिसर में बस चालकों और खलासियों के लिए बनाया गया 90 बेड का ड्राइवर डोरमेट्री भवन एक साल बीतने के बाद भी चालू नहीं हो सका है। संचालन शुरू न होने से जहां भवन को नुकसान पहुंचने लगा है, वहीं कड़ाके की ठंड में चालक, खलासी और कई यात्री खुले में रात गुजारने को मजबूर हैं।

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    बस स्टैंड परिसर में करोड़ों की लागत से बने इस ड्राइवर डोरमेट्री को चालू करने की योजना काफी पहले पूरी हो चुकी थी। भवन में रसोई सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। साथ ही इसके संचालन के लिए एजेंसी का चयन भी कर लिया गया था। बावजूद इसके विभागीय अनदेखी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण अब तक इसका उपयोग शुरू नहीं हो पाया है।

    डोरमेट्री चालू न होने से भवन बेकार पड़ा है। परिसर में चारों ओर गंदगी फैल गई है और रख-रखाव के अभाव में भवन के हिस्सों को नुकसान पहुंचने लगा है। दूसरी ओर, ठंड के इस मौसम में चालक और खलासी खुले विश्राम स्थल पर लगी स्टील की कुर्सियों पर रात बिताने को मजबूर हैं। कई चालक कंबल लपेटकर खुले आसमान के नीचे सोते नजर आते हैं।

    ड्राइवर डोरमेट्री में 12 घंटे के ठहराव के लिए 50 रुपये और 24 घंटे के लिए 100 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसे चालक और खलासी देने को भी तैयार हैं। इसके बावजूद सुविधा उपलब्ध न होने से उनकी परेशानी कम नहीं हो रही है। नगर निगम के अजीमाबाद अंचल द्वारा परिसर में जर्मन हैंगर से बनाए गए 44 बेड के रैन बसेरा में हमेशा भीड़ रहती है, जिससे अधिकांश लोगों को वहां जगह नहीं मिल पाती।

    डोरमेट्री के पास खुले विश्राम स्थल पर सो रहे चालक सोहन राय ने बताया कि ठंड की रात काटना बेहद मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि निगम का रैन बसेरा भरा रहता है और ड्राइवर डोरमेट्री चालू हो जाती तो ठंड से राहत मिलती। खुले में सोने से अक्सर तबीयत खराब हो जाती है। कई अन्य चालकों और खलासियों ने भी अपनी पीड़ा साझा की।

    हालांकि नगर निगम की ओर से रैन बसेरा के पास अलाव की व्यवस्था की जाती है, लेकिन यह व्यवस्था जरूरत के मुकाबले नाकाफी साबित हो रही है। मजबूरी में कई चालक और यात्री खुद ही लकड़ी जलाकर ठंड से बचने का प्रयास करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही ड्राइवर डोरमेट्री चालू नहीं की गई, तो न केवल भवन को और नुकसान होगा, बल्कि सर्दी में लोगों की परेशानी भी बढ़ती जाएगी।